Thursday, 2 May 2019

(भयावह जंगल)

बेटियो और बच्चियो के हर रोज हो रहे बलात्कार पे लिखी रचना.
                         (भयावह जंगल)
शहर की भीड़ मे भी हमने देखा है---------
कुछ आदमियो के अंदर का भयावह जंगल.
मासुम सा सीधा-साधा सा दिखने वाला-----
किसी बच्ची का अकेले मे जब रेप करता है,
और होठो पे कुत्सित हँसी दिखती है तो लगता है,
कि एक कमजोर सी चिड़ियाँ,तड़पेगी,चिचिआयेगी,
रहम की भीख मांगेगी,
मगर फिर भी निगल जायेगा उसे------------
इस शहर के कुछ आदमियो के अंदर का भयावह जंगल.
उसके पंख तितर-बितर हो जायेगे,
सबकुछ हा सबकुछ छिन लेगा,
चिड़ियाँ डरेगी,कापेगी,थरथरायेगी---------
फिर भी मजबुरी है जीना उसे भी ये भयावह जंगल.
उसकी डरी-सहमी खुली आँखो मे ये सवाल,
निरूत्तर सा रहेगा कि आखिर चिड़ियाँ,
किस नीड़,किस डाल,किस छाह जाये,
इस डर से वे रोज मरेगी,
बहुत घुटन है इस भीड़ मे,
बिटिया और चिड़ियाँ अब एक सी ही है,
न जाने दोनो को कब निगल जाये,
शहर के बाहर-----------------
और शहर के अंदर का भयावह जंगल.

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी
जज कालोनी, मियाँपुर
जौनपुर-----222002  (उत्तर-प्रदेश).
no.no.----7800824758

(साइकिल है भाई)

(साइकिल है,भाई)

ये हमारी यादों में, --
बसी हुई, बचपन के--
फिल्म की कुछ रील है, भाई.
ये कैची, मार के चलाता हुआ, मैं
और हमारे दादा की----
बहुत प्रिय ,साइकिल है, भाई.
इस तरफ ----
धान की लहलहाती फसल
और उस तरफ ----
सिंघाड़े वाली झील है, भाई.
जहां गिरे ,चोट तो न आई ,
पर डर गया , उस समय
घर लगा जैसे ----
बहुत मील है, भाई.
दबे पांव,
बचने की जुगत फेल हुई,
दादा ने ,कड़क कर पूछा ,
कहांं गये थे,
उफ !! डर-सहम गया
और सांस यूं लगा कि,जैसे
साइकिल की----
टूटी हुई तील है, भाई.
लेकिन ,दादा समझ गये ,
प्यार से मुझे दुलारा - पुचकारा
और कहा,----
पगले !!मेरे पोते से अच्छी
और प्यारी इस दुनिया में----
नहीं कोई साइकिल है, भाई.

@@ रंगनाथ द्विवेदी

वंदे मातरम गाये

(वंदे मातरम गाये)
शहीद की लाश को जब गाँव दफनाये------
तो वंदे मातरम गाये।
ना बीबी तोड़े चुड़ी ना आँसू बहाये,
फक्र करे हमपे और खुल के मुस्कुराये,
और अपने शौहर की शहादत पे---------
वंदे मातरम गाये।
माँ ने गाई थी बचपन में लोरियां बहुत,
आखिरी इच्छा है कि रोना नही माँ,
गर हो सके तो तु भी मेरी लाश के सिरहाने,
अपने बचपन के लोरियो की तरह-------
वंदे मातरम गाये।
बापु देना कांधा कब्र तक मुझे,
और मिट्टी डालते बखत,
दिल कमजोर मत करना,
क्योंकि मेरी इच्छा है कि आपके लब पे बेटा नही बापु-------
वंदे मातरम आये।
शहीद की लाश को जब गाँव दफनाये-------
तो वंदे मातरम गाये।

@@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.------7800824758