Saturday, 19 October 2019

(उन्होने मुझको चाँद कहा था)

(उन्होनें मुझको चाँद कहा था)

पहले साल का व्रत था मेरा-----
उन्होनें मुझको चाँद कहा था।
तब से लेकर अब तक मै-----
वे करवा चौथ नही भुली।
मै शर्म से दुहरी हुई खड़ी थी,
फिर नजर उठाकर देखा तो,
वे बिलकुल मेरे पास खड़े थे,
मैने उनकी पूजा की-------
फिर तोड़ा करवे से व्रत!
उन्होनें अपने दिल से लगा के-----
मुझको अपनी जान कहा था।
पहले साल का व्रत था मेरा-----
उन्होनें मुझको चाँद कहा था।
बनी रहु ताउम्र सुहागिन उनकी मै,
यूँही सज-सवर कर देखू उनको मै,
फिर शर्मा उठु कर याद वे पल,
जब पहली बार पिया ने मुझको----
छत पर अपना चाँद कहा था।
पहले साल का व्रत था मेरा----
उन्होनें मुझको चाँद कहा था।

@@@आप सभी को कल के करवा चौथ की ढ़ेरो बधाई।
रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.-----7800824758