Thursday, 31 July 2025

कोई दीवाना रोया है

(दिवाना रोया है)
ये जो सारी रात------------
शहर मे बरसात हुई है,
कही किसी की याद मे----
कोई दिवाना रोया है।
ये बिजली,ये चमक--------
किसी बंद हवेली के जले चराग से,
लिपट------------------
आखरी लम्हे कोई परवाना रोया है।
कल सहर के बाद--------------
निकल के देखना तुम आलमे बारिश,
एक हमी है जो जानेगे,
कि कल सारी रात तड़प के----
किसी का अफसाना रोया है।
ये जो सारी रात--------------
शहर मे बरसात हुई है,
एै,रंग------किसी की याद मे,
कोई दिवाना रोया है।

Wednesday, 30 July 2025

(भाई के बांधे चिर पर)

(भाई के बांधे चीर पर)
जुये में द्रोपदी को हारकर-------
जब झुक गये पतियो के सर,
गुँगी हो गई सभा-------------
रो उठी फिर द्रोपदी,
अपने इस तकदीर पर।
वे भी जुआ खेल गई आखिरी लम्हे----
अपने कृष्ण जैसे बीर।
दौड़ पड़े नंगे पाँव कृष्ण भी-----
तब बहन की पीर पर।
गर न आते टूट जाती रस्म राखी की,
फिर कोई भाई ना आता मायके से,
ना फक्र करती एक बहन,
दूःख के दिनो में------------
अपने भाई को बांधे चीर पर।

###रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
एडवोकेट कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
@@@आप सभी को रक्षाबंधन पर्व की ढ़ेरो बधाई।

(बहन की राखी है)

(बहन की राखी है)
एक तरफ दुश्मन की गोलियां,
एक तरफ-----------------------
आज तेरे फौज वाले भाई की छाती है।
मुआफ करना बहन----------
शायद मै आ न सकुंगा!
मै जानता हु कि तुझसे किया-------
एक अहद एक वचन बाकी है।
गर हो सके तो फक्र करना,
अपने शहीद भाई पे!
सुना है शहीद की मौत पर भी,
हमारे मुल्क की बहन करके दिया,
बीना रोये घंटो आरती गाती है।
एै,रंग----------------------
तु भी देख लहराते तिरंगे की तरफ,
उसी में बंधी---------------------
हर बहन की राखी है।

####आप सभी को रक्षाबंधन पर्व की ढ़ेरो बधाई।

(पंद्रह अगस्त)

(पन्द्रह अगस्त)
अपनो के ही हाथो----
सरसैंया पे पिड़ाओ के तीर से विंधा,
भीष्म सा पड़ा है----
पन्द्रह अगस्त.

सड़को पे द्रोपदी के रेप के दृश्यो ने,
फिर भर दी है आजाद देश के
उन तमाम शहीदो की आँखे,
और उनकी रुह के सामने!
शर्म से खड़ा है----
पन्द्रह अगस्त.

बहुत बिरान है मजा़रे कही मेला नही लगता,
ये सच है-----
कि हम शहिदो की शहादत के दगाबाज है,
फिर भी एै,रंग-------------
ये लहराते तिरंगे कह रहे,
कि हमारी तुम्हारी सोच से भी कही ज्यादा,
विशाल और बड़ा है-----
पन्द्रह अगस्त. 

यह कविता मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है. 

रचयिता----रंगनाथ द्विवेदी 
जज कॉलोनी, मियांपुर 
जिला--जौनपुर pin. no. 222002 (U P)
Mo. no. 7800824758

(मीनारों को बख्श दो)

✍️✍️तुम्हें मरना है तो मरो मजहब के नाम पर,
लेकिन ऐ "रंग" तुम इन 
 मंदिर और मस्जिद की मिनारों को बख्श दो.🥲🥲

Tuesday, 29 July 2025

रोटी गाती रही

(रोटी गाती रही)
भूखी माँ सूबह तलक---------
भूख से बिलबिलाती बेटी के लिये,,,,,,,,,
लोरी गाती रही।
पड़ोसियो ने कहा बेटी मर गई-------
ऐ,रंग----वे इस सबसे बेखबर-------
कहके चाँद को रोटी गाती रही।

(रेप के घाव)

(रेप के घाव)
थाने पे--------
एक गरीब की बिटिया,
अपनी सलवार उतारे---------
जगह-जगह हुये रेप के घाव दिखा रही है।
दरोगा----------
बार-बार थप थपाके देख रहा,
दाँत और नाखून चुभे---------
उरोजो को बार-बार।
लड़की सिहर उठी---उसी रेप के छुअन कासा,
ऐहसास हुआ उसे!
वे समझ गई आँख भर-भरा आई उसकी,
कि अब एक रात और चीखेगी थाने पे,
फिर हरे हो जायेंगे---------------
ना भरने के लिये उसकी उरोजो पे ताजिंदगी,
एै,रंग-----------ये रेप के घाव।

देवता कौन हैं

(देवता कौन है?)
अधर पे गलिज़गी है सबके---------
तो फिर इस शहर मे देवता कौन है?।
खामि अय्यासपन की तकती है जवान लड़की,
आखिर बताओ----------
तुम्हारे घर की जवान लड़की को तकता कौन है?।
अधर पे गलिज़गी है सबके--------
तो फिर इस शहर मे देवता कौन है?।
गरीब क्या जाने,हदीस,तकरीर,मज़हब,
वे रोटी की खातिर--------
मजदूरी मंदिर और मस्जिद दोनो मे कर रहा है,
आखिर इन्हें----------
हिन्दू और मुसलमान कहता कौन है?।
अधर पे गलिज़गी है सबके--------
तो फिर इस शहर मे देवता कौन है?।
हर दंगे मे जलते है घर तबाह होती है बस्तियाँ,
इन घरो मे तो जिंदा इंसान रहते है,
एै "रंग" बताओ तुम्हें गीता और कुरान की कसम,
कि आखिर-----------
इस मंदिर और मस्जिद मे रहता कौन है?।
अधर पे गलिज़गी है सबके---------
तो फिर इस शहर मे देवता कौन है?।

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)।
mo.no.-------7800824758

सियासत मार दे मुझको

कलम के 
सिरहाने,मैं सफेद धागा बांध के लिखता हूं,
क्या पता ऐ "रंग"
कब सियासत मार दे मुझको .

Tuesday, 22 July 2025

(चूल्हा नहीं जलता)

(चूल्हा नही जलता)
तुम तो बात-बात मे शहर जलाना जानते हो------------------
तुम्हारे पास तो कौमो को जलाने का ईधन है।
पर यहाँ फाकाकश़ी सोने नही देती---
पेट तो जलता है ऐ,रंग--------
पर इस बस्ती में अक्सर चूल्हा नही जलता।

पीड़ा

✍️✍️पांचवी बेटी के पैदा होते ही पिता ने की खुदकुशी,,,,,ऐसे व्यक्ति को जब अखबार में पिता लिखा जाता है तो मुझे बड़ी पीड़ा होती है,,,,आखिर उन पांच बच्चियों की मां का क्या होगा? क्या वह पांचो बार अपनी स्वेच्छा से एक बेटे के लिए मां बनने को तैयार हुई होगी शायद नही?😢😢😢😢

विशेष---"मैं ऐसे नीच और अधम व्यक्तियों के पिता लिखे जाने के खिलाफ हूं"

Monday, 21 July 2025

धान की फसलें

(धान की फसले)
मैने इतनी खूबसूरती नही देखी------
ऐ,रंग------इससे पहले,,,,,,,,,,,,,,,
वे बलखाती हुई------------
रोप रही थी-धान की फसले।

व्यंग्य

✍️✍️हमारे देश में द्विवेदी से ज्यादा चतुर्वेदी व्यंग्य लिखते हैं,,क्योंकि हम द्विवेदियों के यहां, जहां पति बुद्धिमान होते है,वही चतुर्वेदियों के यहां उनकी पत्नियां.... 😃😃

Saturday, 19 July 2025

गुरु शिष्य का मान

(गुरु शिष्य का मान बढ़ा देता है)
कौन कहता है?
कि एकलब्य यु ही अपने गुरु को--
काट अँगूठा देता है।
अरे तासीर तो देखो-------
कि वे बुत से भी अपने शिष्य को,
कितना ज्ञान अनुठा देता है।
एक जुलाहा,कालीन का बुनकर 
गुरु की चाह में सो जाता है सीढ़ियो पर,
वही कबीर बन गुरु को दर्जा---------
मंदिर के भगवान से भी ऊँचा देता है।
देश के संकट की घड़ी में भी,
गुरु गोबिंद सिंह--------------
मुगलियाँ सल्तनत के सवा लाखो से,
अपने एक-एक बेटो को लड़ा देता है,
यु ही नही झुकाते हम सर गुरु पुर्णिमा को,
एै,रंग-----गुरु वे है जो देश और
शिष्य का मान बढ़ा देता है।

###इस रचना को पुरा पढ़ हमारे देश की इस महान परंम्परा पर गर्व करे।
आप सभी को गुरु पूर्णिमा की बधाई।
कृपया----पुर्णिमा को संशोधित कर पूर्णिमा पढ़े।

Wednesday, 16 July 2025

आर्केस्ट्रा पर नाचती रही

(आॅरकेस्टा पे नाचती रही)
मेकप से छिपा के अपने मासूम का दर्द,
एक माँ------------------
अर्धनग्न पुरी रात ऐ,रंग--------
आॅरकेस्टा पे नाचती रही।

व्यंग्य

✍️✍️कुछ पति-पत्नी ऐसे हंसते हैं कि,– जैसे दोनों की शादी "अपहरण पद्धति से हुई हो" 😃😃

Tuesday, 15 July 2025

(आज बादल)

(फिर घिरे आज बादल)
सारे शहर में फिरे आज बादल,
तुम्हे देखकर फिर घिरे आज बादल।
है तेरी हुस्न के ये बादल भी मारे,
ये जाना सनम--------------
जब तुम्हे चुमने की हसरत लिये,
आपस मे ही खुद भिड़े आज बादल।
सारे शहर में फिरे आज बादल,
तुम्हे देखकर फिर घिरे आज बादल।
मांगा सभी ने पानी मगर,
ना सुनी बादलो ने-------
किसी की दुआ!
वे तो तुम थी हमारे शहर में सनम,
जो बूँद बनकर ज़मी पे गिरे आज बादल।
सारे शहर में फिरे आज बादल,
तुम्हे देखकर फिर घिरे आज बादल।

###हमारे शहर में आज लगातार बादल घेरे हुये है अब बरसात कितनी होती है ये बात की बात है।

(शराब नहीं लेकिन)

(शराब नही लेकिन)
तेरी सरिया मे शराब नहीं लेकिन-----------
हम पीने वालो के लिये खराब नही लेकिन।
हम बाँट लेते है अक्सर नशे मे जूठन भी-----
यहाँ के पंडित और मियाँ का जवाब नही लेकिन,
तेरी सरिया मे शराब नही लेकिन।
ना वे गीता जानता है और न मै कुरान की आयत,
जबकि उसका घर मंदिर की तरफ है,
और मेरा घर मस्जिद की तरफ है,
हमारे लिये जुम़ा और मंगलवार एक सा है,
हम पीते है,किसी दिन का हमारे पास एै"रंग"-----
कोई हिसाब नही लेकिन।
तेरी सरिया मे शराब नही लेकिन,
हम पीने वालो के लिये खराब नही लेकिन----
तेरी सरिया मे शराब नही लेकिन।

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)।
mo.no.----7800824758

यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है।

युवा सृजन

युवा सृजन
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युवा सृजन मासिक वेब पत्रिका का जून अंक अब आपके सामने है । आपको इस अंक में बहुत सी प्यारी कविताएँ,कहानी,लेख अन्य पढ़ने को मिलेगा सभी रचनाएँ बहुत ही अच्छी और पठनीय हैं ,बतौर पाठक मुझे कविता कादंबरी didu, Ankita Shambhawi ,विशाखा मुलमुले, Rangnath Dubey स्नेहा सिंह ,पूजा शकुंतला शुक्ला,शिव कुशवाहा, रामनगीना मौर्य ,डॉ हंसा दीप जी की रचनायें ज्यादा पसन्द आयी बाकी आप पढ़कर अपनी प्रतिक्रिया दें ।रचनाओं पर पाठकीय प्रतिक्रिया इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इन्हीं प्रतिक्रियाओं को ध्यान में रखकर हम सृजनलोक प्रकाशन द्वारा दिया जाने वाला सृजनलोक सम्मान -2021 भी प्रदान करेंगें ।इसके अलावा एक और बात कहना चाहूंगा पत्रिका के आने के बाद आप सभी का जितना सहयोग और स्नेह हमें प्राप्त हुआ वो सच में हमारे लिए मायने रखता है उसके लिए मैं आप सबका आभारी हूँ, ये स्नेह यूँ ही बनाये रखिये ।

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2 - आगामी अंक के लिए आप सभी की रचनाएँ आमंत्रित हैं ,आप इस अंक के लिए 30 जुलाई तक हमें अपनी रचनाएँ भेज सकते हैं ।
उप सम्पादक 
आशीष जायसवाल
ashishjaiswal916@gmail.com
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व्यंग्य

वैसे इस मौसम में पता नहीं क्यों मुझे खूबसूरत टमाटरों को देखकर उन्हें प्यार से साली कहने की इच्छा होती है,,,,शायद ऐसा इनके महंगे होने की वजह से होता है

व्यंग्य

✍️✍️ एक अप्रमाणित रिसर्च के अनुसार किसी बड़े पद पर आसीन "महिला उच्चाधिकारी के बेरोजगार पति की हालत बिना फिल्टर के बीड़ी की तरह होती है"😃😃

Monday, 14 July 2025

शिकारे वाली लड़की

(शीकारे वाली लड़की)
मुझे बार-बार याद आती है,
वे शीकारे वाली लड़की!
डलझील की मदमस्त लहरो को,
वे उसका एकटक देखना,
फिर जादुई हँसी,
हाय!जाने कहाँ खो गई,
वे अदभुत नजारे वाली लड़की,
मुझे बार-बार याद आती है,
वे शीकारे वाली लड़की।
वे उसका तिलिस्मी बदन,
और उसके जुड़े से निकलती वे गुलाब की खुशबू,
अब कही नही मिलती सुघने को,
और कही नही दिखती मुझे,
वे लश्कारे वाली लड़की,
मुझे बार-बार याद आती है,
वे शीकारे वाली लड़की।
पहाड़ो की वे ढ़लती शाम,
वे संगीतमय आवाजे,वे बाँसुरी के स्वर
कही कुछ नही!
बस तन्हाई मे यादो की चंद तस्बीर,
जो हवाओ के झोके से फड़फड़ाती है,
और मै निकल आता हु यादो से उसकी,
बस रह जाती है याद जेहन में,
वे शीकारे वाली लड़की।

###न जाने कब घाटियो मे अब अमन के दिन लौटेगे,न जाने फिर कब डलझील में दिखेगी हम शायरो और कवियो की वे शीकारे वाली लड़की।

एक सफल चंद्रयान

(एक सफल चंद्रयान)

आन,बान, शान 
बेटी है राष्ट्रगान,,
फौलादी हौसले है,इतने 
कि छूने उड़ चली है देखो--
वे सारा आसमान.

फक्र है तुम पर
कि तुमने,
चूल्हे,चौके,बर्तन
से इतर लिखी है
खुद की एक पहचान.,

तुम सिर्फ बेटी,बहु,पत्नी नहीं
बल्कि हो इसरो की
एक सफल चंद्रयान 

✍️✍️🇮🇷🇮🇷🇮🇷🎺🎺🎷🎷

रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी,मियांपुर
जौनपुर--220022 (U P)
mo.no.7800824758

मजाक

✍️✍️इसको इसके अंतरंग वस्त्रों में नचाकर अंबानी ने इसके घमंड रूपी शरीर के मोबाइल को,भारत के जीवो नेटवर्क से जोड़ दिया,,,अब यह कहीं भी नाचेगी तो हैंग करेगी इसलिए रिचार्ज पर मत जाइए बल्कि रिचार्ज की देशभक्ति पर जाइए😃😃😃😃

Saturday, 12 July 2025

गजलों का बदन बेच दिया

(गज़लो का बदन बेच दिया)

एक गरीब शायर को-
भूख ने कुछ इस कदर तोड़ा,
कि ए "रंग"

उसने रोटी के लिये,
एक रईस को---
अपनी गज़लो का बदन बेच दिया.

दर्जन भर बच्चे हैं

विश्व जनसंख्या दिवस पे एक व्यंग्यात्मक कविता ।
                    (दर्जन भर बच्चे है) 
हमारे शौहर बहुत अच्छे है, 
उन्हीं के फजल से---------
तो दर्जन भर बच्चे है ।
कोई सुखी खाता है, 
तो कोई चटनी से रोटियाँ,
हाय! मेरे बच्चों के अब्बू की मोहब्बत, 
कि मर जाऊ,
इतनी मेरे मेकप और बादाम के खर्चे है.
हमारे शौहर बहुत अच्छे है, 
उन्ही के फजल से--------
तो दर्जन भर बच्चे है. 
अभी कल ही आई थी अस्पताल से समझाने ,
एक कलमुही मैम, 
मै बिगड़ गई उसी पे कि तु क्या जाने, 
मेरे बच्चे के अब्बू ----------
अभी भी मर्द अब्बल दर्जे है. 
हमारे शौहर बहुत अच्छे है, 
उन्ही के फजल से---------
तो दर्जन भर बच्चे है. 
वे कटोरे भर तेल की मालिश, 
और सैकड़ों दंड बैठक या अल्लाह, 
फिर उनका मेरा कनखियों से देखना, 
यू लगता है कि जैसे, 
मेरे पेट मे कुछ और बच्चे है.
हमारे शौहर बहुत अच्छे है, 
उन्ही के फजल से--------
तो दर्जन भर बच्चे है. 

@@@रचयिता----रंगनाथ द्विवेदी ।
जज कालोनी, मियाँपुर 
जौनपुर---222002 (उत्तर प्रदेश) ।
no. no. 7800824758

यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है ।

खत नहीं था

(खत नही था)
जो दी थी उसने कभी लरज़ते हाथ से,
वे खत नही था।
थी उसके धड़कनो की गज़ल,
हर हर्फ में वे थी मेरे रुबरु,
पुरी रात जैसे थी रुबाई की,
चराग जल रहा था----------
उस रौशनी में मोहब्बत थी,
कोई खत नही था।
एक खुशबू थी भीनी सी हर साँस मे,
ये आँख ठहरी रह गई,
सहर होने तलक एै,रंग-------
मेरी अँगुलियो मे वे थी,
कोई खत नही था।
###सहर होने तलक--सुबह होने तलक।

व्यंग्य

😃😃 मेरे ख्याल से भूतपूर्व प्रेमियों के लिए एक "भूतपूर्व प्रेमिका" नाम की मासिक पत्रिका निकलनी चाहिए जिसके संपादन का सारा दायित्व किसी योग्य और अनुभवी भूतपूर्व प्रेमी से कराया जाए😃😃

Wednesday, 9 July 2025

(सावन चला गया)

(सावन चला गया)

झूले चले गये,कज़री चली गई,
मेहमान तो आते रहे गाँव मे लेकिन,
पर पहले जो आता था-
वे पाहून चला गया.

ऐ,"रंग"
धीरे-धीरे ये हादसा हुआ,
बारिश तो हुई लेकिन,
गाँव से मेरे सावन चला गया.

पाहून--मेहमान 

स्वरचित और अप्रकाशित है 

रंगनाथ द्विवेदी 
जज कॉलोनी, मियांपुर 
जौनपुर 222002 (U P)

Monday, 7 July 2025

(मौतें बड़ी विरान होती हैं)

(मौते बड़ी विरान होती है) 

बेशक----
सारे शहर का हुज़ूम उमड़ता है, 
शख्शे शोह़रत के जनाज़े मे.

पर ऐ,रंग----
ऐसी मौते बड़ी विरान होती है।

Thursday, 3 July 2025

(लाल किताब हो)

(लाल किताब हो)
तेरे दिदारे हूश्ऩ मे कोई कैसे कामियाब हो,,
तुम नकाब़ के बाद भी नकाब़ हो।
सच तो ये है कि तुम-----------
टोने-टोटके की लाल किताब हो।

(कुरान देख रहे हो)

(कुरान देख रहे हो)
माहे रमज़ान में--------------
जो तुम बेगुनाहो का गला रेत रहे हो,
बताओ इन लाशो में-------------
तुम कौन सा इस्लाम देख रहे हो।
कल मस्जिदे शर्मिंदा थी,
गला भरा था अजा़न का,
जैसे इन लाशो मे हो हर कोई अपना,
सारे मुसलमान का,
मोहब्बत आयत है हमारे मज़हब की,
तुम उसपे ही किचड़ फेक रहे हो।
तुमने छिन कर बेटा,
अमीना को रुलाया है,
पुरी दुनिया के मुसलमानो-------
के मदिना को रुलाया है,
खाक हो जाओगे----------
तुम उसी पत्थर से,
जिस पत्थर को तुम------
माँ के आँचल की तरफ फेक रहे हो।
थू है तुमपे एै इस्लामीके स्टेट,
कभी न कुबूलेगा दुनिया का मुसलमान,
वे जानता है,रंग----------------
कि किस नज़र से तुम कुरान देख रहे हो।

###बाग्लादेश मे गला रेत कर आतंकियो के द्वारा मारे गये सभी बेगुनाहो को मेरी एक श्रद्धांजलि।

व्यंग्य

😃😃शादी करने वाले ज्यादातर पुरुष अनुलोम विलोम करते हैं क्योंकि जब इनकी पत्नी मायके जाती है तब यह सांस लेते हैं और जब मायके से लौट आती है तब यह सांस छोड़ते हैं😃😃

Wednesday, 2 July 2025

(पहला सावन था)

(पहला सावन था)
जब तुम भीगे थे,मै भीगी थी
वे पहला सावन था।
सिहर के तेरे सीने से,
शर्मा के लिपटी थी
वे तेरी बाँहो का,मेरी बाँहो से-----
पहला सावन था।
तुमने होंठो पे रंखा था,होंठ मेरे
वे तेरी होंठो का,मेरी होंठो पे-----
पहला सावन था।
तुम बूँद-बूँद भीगे थे,
मै साँस-साँस भीगी थी----
वे तेरी साँसो का,मेरी साँसो से
पहला सावन था।
जब तुम भीगे थे,मै भीगी थी------
वे पहला सावन था।

###आज हमारे शहर के बरसात की रोमानियत है ये।

(रोटियां किस कौम की हैं)

(रोटियां किस कौम की है)

भरे पेट 
हिंदू मुसलमान होना आसान है,,
पर ऐ "रंग" 
किसी भूखे से पूछ
कि उसकी रोटियां किस कौम की है✍️✍️

व्यंग्य

😀😀 अगर विवाह के कई वर्षों के बाद पत्नियां ज्वालामुखी हो जाती है तो पति भी तब तलक इतने वर्षों में "अग्निशमन यंत्र हो चुके होते हैं"😀😀

Tuesday, 1 July 2025

व्यंग्य

😀😀कुछ लोगो के नाम के साथ जब मैं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यंग्यकार लिखा हुआ पढ़ता हूं,,,तो मुझे ऐसा लगता है कि जैसे "कोई फला व्यक्ति किसी का कालर पड़कर भाई साहब कह रहा हो" 😀😀