Tuesday, 31 January 2023

(मोहब्बत की कोई हद न थी)
मोहब्बत की,कोई हद न थी,
सब कुछ था,कोई सरहद न थी।
उड़ता था दिले परिंदा दुर तक,
ऐ,रंग-
नियत किसी की बद न थी।
(नट की बिटियाँ)
कहां उसकी माँ ने उसके बाल सवाँरे,
कहां उसकी माँ ने बनाई उसकी चुटियाँ।
वे स्कूल के सामने की सड़क पे,
टिन बजाके करतब दिखाती रही,
फिर कटोरे के चंद सिक्के,
फटी झोली में भर आगे बढ़ गई-------
करतब दिखाने नट की बिटियाँ।
(सारे बसंत मै सजु)
बीसो बसंत मै सजी---------
पोर-पोर गदराई खुद को देख-देख,
बीसो बसंत मै सजी।
कोयल हुई बाँवरी-------
बागो में कूक-कूक कर,
भँवरा हुआ पागल महुये को चुमकर,
मेरे अधर कुँवारे,
मै कुँवारी अंग-अंग--------
बीसो बसंत मै सजी।
यौवन कलश छलके बूँद-बूँद कर,
आँखे हुई बाँवरी,
मेरी पिया दरस को,
हे!बसंत सखी अब तुम-----
कोई एैसी बान मारो कि आये बाबुल के गाँव,
मेरे पिया की डोली,
और मै बैठ चलु उसमे अपने पिया के गाँव,
बीसो बसंत मै सजी।
वे घूँघट उलट के देखे मै शर्म से गडु,
और उनके छुवन की सिहरन,
से कांपे अधर मेरे,
और उस कंपकपी की रात को,
अपना कौमार्य सौप उनको,
फिर अपने प्यार और उनके प्रित की-----
सारे बसंत मै सजु।
@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.-------7800824758

मादक बसंत।

Monday, 30 January 2023

(दर्द के हरम मे है)
नहाने दे-
गीरने दे,ये अश्क़े गुलाब जल,
बढ़ेगी इससे तड़प की खूश़बु।
ऐ,रंग-
जानता है,उसकी याद अब भी,
मेरी दर्द के हरम मे है।

Friday, 27 January 2023

बाल कविता में प्राण तत्व हैं उसका बाल मनोविज्ञान, आपकी रचनाओं की पक्तियों को पढ़ने से अंदर से बाल मन की इस उम्र में भी पुनरावृति हो जाती हैं सर,,, इस बेहतरीन रचना के लिए हार्दिक बधाई हो आपको ✍️✍️
(रुप का आचमन करना)
मै इस ज़मी पे--------------
किसी देवता के प्याले से छलक आई हूँ!
एै"रंग" जरा संभल के-------------
मेरी रुप का आचमन करना।

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.------7800824758

Thursday, 26 January 2023

(उसके हिस्से का भारत है)
फुटपाथ पे अधनंगा--------
वे मासुम सुबह से ही बेच रहा,
आजादी का तिरंगा।
ऐ,रंग---उसके पेट का पिचकापन ही----
शायद!उसके हिस्से का भारत है।
(26 जनवरी)
एक माँ-----------
अपने दुध-मुँहे बच्चे का पेट भरने के लिये,
लुट के आई है अस्त-व्यस्त,
पुरी रात इसकी बदन पे,
बेरहमी से इसके ग्राहक ने लिखा है,
अपने हवस के जंगली नाखूनो से-----
26 जनवरी।
वे देखो फिर रहा युवा--------
अपनी डिग्रीयो की लाश लिये कांधे पे,
माँ बहन की आबरु चंद चिथड़ो मे लिपटी है,
बाप टी.बी. से खाँस रहा,
कहाँ है इसका वंदे-मातरम कहाँ है इसकी--
26 जनवरी।
देश के रहनुमा वे है,
जिन्हें मादरे तमीज़ तक नही,
वे देखो फहरा के लौटे है तिरंगा,
और उसी जश्न मे खुली शराब की बोतल,
बगल सोफे पे गिरी गाँधी टोपी,
अस्त-व्यस्त खद्दर की धोती,
सच मे एै"रंग" देखो इस देश मे,
इस तरह से भी मनाई जाति है----
26 जनवरी।
@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.------7800824758

धन्यवाद!आपका दैनिक वर्तमान अंकुर,निर्मेश के त्यागी भईया और आजाद हिन्दुस्तान की छब्बीस जनवरी का।
(26 जनवरी है)

कीटनाशक पी के----
अभी ख़ुदकुशी किये किसान की लाश,
उसके खेत की मेड़ पे पड़ी है,
सुना है आज 26 जनवरी है!

एकटक तके जा रही उसकी बिटिया,
अपने बापु की लाश को,
क्या करे बेचारी रो भी तो नही सकती,
अपने भाई और बहनो मे सबसे बड़ी है,
आज 26 जनवरी है!

तभी वे अपने जवान सिने से दुपट्टा उतार,
ढ़कती है अपने बापु की लाश,
उसकी पैबन्द लगी सलवार का यू नंगा होना,
साबित करता है कि----
अभी बहुतो से दुर इस देश मे
 26 जनवरी है।

बस कुछ देश लुटने वाले घंटो बोलेंगे भाषण देंगे,
इशारो पे तालियाँ बजाई जायेगी,
इन्ही के अगल- बगल किमती सोफे होगे,
पांव तले मसलने को दरी होगी,
शायद एै "रंग" इतने ही लोगो तलक पहुँची
हमारे इस देश की 26 जनवरी है।

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)।
mo.no.-----7800824758

Tuesday, 24 January 2023

(सलवार बेचेगी)
सात बहने,टी.बी.से खाँसती माँ
ये उसके शराबी बाप की-
उसको वसियत है।
दो वक्त की रोटी को जब,
इनकी अँतडियाँ सुखेगी,तो देखना
ऐ,रंग-ये लड़की,अँधेरी रात मे-
                         सलवार बेचेगी।
(रुदाली रह गई)

पुरे घोषणापत्र में-----------
दर्शक और उनकी ताली रह गई.

वाह!री दिल्ली की सियासत----
कि लोग पांच वर्ष तकते रह गये,
और अन्ना-हजारे के सम्मान की कुर्सी, 
उनके ही चेले 
अरविन्द केजरीवाल की वजह से 
खाली रह गई.

एै"रंग" इस टिश और चुभन की पिड़ा,
कि वे रोये तो नहीं,
पर लगा जैसे-----------
रेत भरी आँखो में उनके कोई रुदाली रह गई.

वे भी दिल्ली थी और ये भी दिल्ली है. 

विधानसभा चुनाव ---2020.

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no-----7800824758

Sunday, 22 January 2023

(मुल्क की याद आती है)
इस गैरे मुल्क में-----------------
बड़ी शिद्दत से मुझे अपने मुल्क की याद आती है।
खोल देता हूं खिड़कियाँ,
और घंटो टहलता हूं कमरे मे-------
जब रात आती है!
अपने मुल्क की याद आती है।
तकता हूं चाँद तो बीबी का चेहरा नुमाया होता है,
याद फिर उसकी हर बात आती है!
अपने मुल्क की याद आती है।
तारे जैसे हो मेरे मासूम बेटे,
उन तारो से गुफ्तगू करता हूं,
लेकिन उन्हे जब प्यार करने को बढ़ाता हूं हाथ,
तो बस खाली हाथ रहता है,
मेरे हिस्से यही इतनी सी सौगात आती है!
अपने मुल्क की याद आती है।
फिर खिड़की से---------------
अंदर आती है एक झीनी सी रौशनी,
जैसे मेरे अब्बु की दुआ!
फिर हवा की एक ठंडी छुवन मे अम्मी की मोहब्बत,
उफ!ये रोटी,ये दोज़ख की बेबसी
कि सहर होने तलक-------------
अपने घर के हर शख्स की जरुरत,
और बहन के निकाह की-----------
याद बस इमदाद आती है!
इस गैरे मुल्क मे------------
बड़ी शिद्दत से मुझे अपने मुल्क की याद आती है।
## # मुल्क से बाहर कमा रहे एक शख्स के अंतरमन की व्यथा।
@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.----7800824758
(26 जनवरी है)
कीटनाशक पी के-----------
अभी ख़ुदकुशी किये किसान की लाश,
उसके खेत की मेड़ पे पड़ी है-----------
सुना है आज 26 जनवरी है।
एकटक तके जा रही उसकी बिटिया,
अपने बापु की लाश को,
क्या करे बेचारी रो भी तो नही सकती,
अपने भाई और बहनो मे सबसे बड़ी है,
तभी वे अपने जवान सिने से दुपट्टा उतार,
ढ़कती है अपने बापु की लाश,
उसकी पैबन्द लगी सलवार का यू नंगा होना,
साबित करता है कि----------
अभी बहुतो से दुर इस देश मे 26 जनवरी है।
बस कुछ देश लुटने वाले घंटो बोलेंगे भाषण देंगे,
इशारो पे तालियाँ बजाई जायेगी,
इन्ही के अगल- बगल किमती सोफे होगे,
पांव तले मसलने को दरी होगी,
शायद एै "रंग" इतने ही लोगो तलक पहुँची-----
हमारे इस देश की 26 जनवरी है।

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)।
mo.no.-----7800824758
जोधा-अकबर और पद्ममावत फिल्म में डायरेक्टर के द्वारा हमारे गौरवशाली इतिहास के साथ की गई छेड़छाड़ के बिरोध में लिखी एक रचना.

(जोधा-अकबर और पद्ममावत क्यू है?)

बता एै सिनेमा-
आखिर तुम्हें हमारी इतिहास से,
इतनी अदावत क्यू है?
तेरे दामन मे-----
जोधा-अकबर और पद्ममावत क्यू है?.

सवाल है मेरा तुझसे,
कि सिनेमा के वे--
सेंटीमेंटल सीन और अंतरंगता,
कोई मनोरंजन नही,
ये इतिहास की पद्ममिनी का,
सीने से खिचा आँचल है,
हद तो ये है कि,
इतने टुच्चे सिनेमाकारो के साथ आखिर--
हमारे यहाँ की अदालत क्यू है?.

ठीक है माना कि,
पद्ममावत जायसी की है,
लेकिन एक तरफ "लव माई बुरका" पे रोक,
लगाने वाली अदालत बता,
कि पद्ममावती हर सिनेमाघर मे लगे,
आखिर ये तेरी---
दो मुँही इजाज़त क्यू है? ।
तेरे दामन मे---
जोधा-अकबर और पद्ममावत क्यू है?.

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)।
mo.no.-----7800824758
(अशफ़ाक लिखा है)

हमने गीता और कुरआन से भी ज्यादा,
ऐ मादरे वतन-----------
तेरी मिट्टी को पाक लिखा है.

जो जला है उसे राम प्रसाद बिस्मिल,
और जो दफ़न है-------
उसको अशफ़ाक लिखा है.
(उन्मुक्त होना चाहती हू)
मै फिर से बचपन की तरह-------
स्वछंद और उन्मुक्त होना चाहती हू।
जीना चाहती हु मखमली पल,
भरना चाहती हू फिर----------
हिरनी के मेमनें की तरह कुलांचे,
और पियराई सरसो के बीच,
फिर खड़ी होने की चाह,
वे बासंती हवा का श्पर्श,
फिर शर्म की सिहरन से शर्माई आँखे,
अपनी थरथराती--------------
हथेली से ढकना चाहती हू।
मै फिर से बचपन की तरह-------
स्वछंद और उन्मुक्त होना चाहती हू।
इधर-उधर लापरवाह से वे खुले बाल,
वे बीना ओढ़नी----------
खेतो की मेड़ो पे चलना,
बीना किसी डाट,बीना किसी डर के,
एै जिंदगी------------
मै फिर से अपनी साँसो में,
वही बचपन बोना चाहती हू।
मै फिर से बचपन की तरह-------
स्वछंद और उन्मुक्त होना चाहती हू।
@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.-----7800824758
(वंदे मातरम गाये)

शहीद की लाश को
जब गाँव दफनाये,
तो वंदे मातरम गाये!

ना बीबी तोड़े चुड़ी,
ना आँसू बहाये--
माँ भी हँसती हुई मेरी 
सभी के सामने आये!

ऐ,रंग--
इस शहीद की है आखिरी इच्छा,
सरहद पे मेरा बेटा भी--
होके लहू-लुहान
वंदे मातरम गाये"

Saturday, 21 January 2023

(आतंकवाद और बेगुनाह लाशे)
मै मासुमो की लाशो पे मरसिया लिख रहा हूँ,
अभी कल बीता है लम्हे चेहल्लुम,
सीना फट गया हिन्दु का,कलम सदमे में है।
रोजा,नमाज,जकात,खैरात,हज़------
सब हराम है ऐ आतंकी मुसलमानो,,,,
आखिर तुम्ही बताओ इस,रंग को-------
आखिर मज़हब के नाम पे इतना कत्ल,
कुर्आन की किस आयत या पन्ने मे है।

@बेगुनाह लाशो को मुझ हकिर से शख्स़ का एक आँसु-ए-मरसिया।
मरसिया------शोकगीत।

Friday, 20 January 2023

(रेपिस्ट विधायक )

रेपिस्ट----
विधायक को टिकट मिलते ही,
ए "रंग"
हमारे शहर की एक 'द्रोपदी',
अपने पुराने जिस्मानी---
घावों पे रो उठी 😭😭😭😭
(आईनो पे गीत लिखे)
हमने टुटे हुये ख्व़ाबो पे गीत लिखे,
सारी रात तड़पे हुये चिरागो पे गीत लिखे।
लोग कहते रहे कि-------
उसके घर का आईना खुबसुरत है,
ऐ,रंग---हमने उसी के हाथो टुटे हुये,
कई आईनो पे गीत लिखे।
(अदब की लाश देखी है)
तु शौक से शामिल हो,रईसो के उर्स में,
हमने कई दिन से भूखि-
ऐ,रंग-शहर मे,
अदब की लाश देखी है।

अदब-साहित्य।

Wednesday, 18 January 2023

(पेट पढ़ना है)
अखबारे पढ़ के सो गया है शहर,
ऐ,रंग---------
हमें तो अँधेरी रात मे,
किसी वेश्या का----------
पिचका हुआ पेट पढ़ना है।

Tuesday, 17 January 2023

(पुराना खत)
बड़ा संभाल के रंखा है,
तेरी याद की दराज़ में------
हमने पुराना ख़त।
तु बिछड़ी,जुदा हुई हमसे,
फिर भी ये शकु था कि,हमसे ना मांगा--
तुमने पुराना ख़त।
है ये ख्व़ाहिश कि गर----
आखिरी हिंचकी भी आये,
तो मेरी तकिये के नीचे से----
निकले पुराना ख़त।
ऐ,रंग----वे लाश-ए-दफ्ऩ पे भी,
नही आयेगी,
उसे उसकी मजबुरियाँ रोकेंगी,
पर गम नही,
बस मेरे कब्र-ए-सिरहाने कोई चराग नही,
जलाना पुराना ख़त।

Saturday, 14 January 2023

चुनावी कटाक्ष-----शनिवार
(चुनाव की खिचड़ी)
बड़ी गुलज़ार है दलित के गाँव की खिचड़ी,
चटखारे लेके खा रहे बेस्वाद-बेमन,
क्या करे मजबूरी है--------------
सामने है इनके चुनाव की खिचड़ी।
एै"रंग" दलित बहुत खुश है इनके आचरण से,
वे भी खिला रहा है इन्हे अपने तरिके से----
बेमन-बेभाव इस चुनाव की खिचड़ी।
@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.-----7800824758

धन्यवाद!दैनिक वर्तमान-अंकुर,निर्मेश के त्यागी भइया,और आज के चुनावी कटाक्ष के साथ स्नान-दान पर्व खिचड़ी की ढ़ेर सारी बधाई।

Friday, 13 January 2023

(चैन से सोने नही देगी)
मेरा कत्ल-
तेरी जिंदगी का आखिरी होगा।
तडपोगे,ऐ रंग-जब मेरी चीख,
तुम्हे चैन से सोने नही देगी।
(तेरी कोख़ माँ)
कौन जाँचेगा तेरी कोख़ माँ,
लड़ खड़ी हो ज़माने से,
तु भी है एक बेटी ये सोच माँ।
कौन जाँचेगा तेरी कोख़ माँ।
दे प्यार,लोरियाँ गा,मेरा हक दे,
उठा!एक बेटे की तरह,
मुझको भी ले अपनी गोद माँ।
कौन जाँचेगा तेरी कोख़ माँ।
उगने दे ये चाँद,उतरने दे अपने आँगन,
मै यकीन दिलाती हूँ-----
कि तुम अपने बेटे से भी ज्यादा करोगी----
एक दिन इस बेटी पे नाज़ माँ।
कौन जाँचेगा तेरी कोख़ माँ।

सेब द चाइल्ड।

Wednesday, 11 January 2023

(मेरी कत्ल का निमंत्रण है)
मेरी दिल फरेब चाहत से,
ऐ,रंग-कह दो
कि उसे मेरी-कत्ल का निमंत्रण है।

निमंत्रण शब्द का इस्तेमाल मैने बस एक प्रयोग के तौर पर किया है।
(कामायनी नही)
हाँ!-----------
मै भी पढ़ी जाती हूँ,
किसी बंद कमरे में नंगे बदन,
ऐ,रंग-----ये और बात है कि,
मै किसी जय शंकर प्रसाद की-----
कामायनी नही।
ठंड मे सरकारी अलाव के क्या हाल है एक ठंड की रात ने स्पष्ट कर दिया
                              (जला अलाव देखा है)
ठंड मे---------
अकड़ के मरे हुये बुढ़े का हमने घाव देखा है!
बंद करो------
ये तवायफ़ी अखबारबाजी अपनी,
बस तुम्हारें पहले पेज पे ही हमने--------
शहर मे जला अलाव देखा है।
(यूवा बारूद थे )

आप 
इस देश की संस्कृति और
सभ्यता के सुबूत थे,

आप,
देश ही नही बल्कि,
शिकागो के शून्य में मौजूद थे.

आपका भगवा बाना,
मुखमंडल पर एक अलौकिक तेज,
सच आप, सच्चे अर्थो में
हमारी मातृभूमि के
पहले---
धार्मिक और आध्यात्मिक
यूवा "बारूद" थे.

@@@रंगनाथ द्विवेदी
जौनपुर (U P )
mo. no.7800824758
😀😀राजनीति में---
कुछ मशरूम टाईप के नेताओं की वजह से,

कल हमारे शहर के कुछ तथाकथित नेता टाईप के स्वाभिमानी----
कुकुरमुत्तो नें आत्महत्या कर ली 😀😀😀😀
उफ! मासूम जैनब
                     (रेप से जैनब मरी है)
ये जो रेप से जैनब मरी है,
किसी वालिद की बिटिया,
किसी की जीऩत,किसी की परी है-------
ये जो रेप से जैनब मरी है।
जिस्मानी भूख और हवस की हद है,
वे मासूम कितनी चीख़ी होगी,
या अल्लाह! वे कौन? नमाज़ी था,
कि मरने के बाद भी लग रहा की,
जैसे जैनब बहुत डरी है---------
ये जो रेप से जैनब मरी है।
इंसाफ़ मांगे किससे,
खामोश है पाक मे तहरिक-ए-इंसाफ़,
गोलियां मिली शायद यही किस्मत है,
हर मुल्क के जैनब की,
लेकिन जैनब सी किसी मासूम की लाश,
शर्मिंदगी से सर झुका देती है,
क्योंकि किसी भी मुल्क की जैनब,
हमारे मज़हब और मज़हबी किताब से कही बड़ी है,
ये जो रेप से जैनब मरी है।

@@@पाकिस्तान मे एक मासूम जैनब को मेरी श्रद्धांजलि।
(बाँहो मे गीत रोये)
गज़ल की बाँहो मे गीत रोये,
रोये शहनाई तेरी याद की,
तो बाँसुरी भी लबो से भीग रोये।
गज़ल की बाँहो मे गीत रोये।
एक तरफ तेरे इंतज़ार की श़मा,
तो दुसरी तरफ विरह के दीप रोये।
गज़ल की बाँहो मे गीत रोये।
लौट आ ऐ,रंग----फिर से मेरी दुनिया मे,
कि तेरी प्रीत रोये।
गज़ल की बाँहो मे गीत रोये।

Tuesday, 10 January 2023

(माँ की लोरी रह जाती है)
माँ--------
मै ढ़ेरो खाता हूँ,
पर तेरी चुपड़ी रोटी की भुख रह जाती है।
आज सब कुछ है,,,,,,
स्लीपवेल के गद्दे एसी कमरे----
पर नींद घंटो नही आती है।
ऐ,रंग----यादो में----
माँ की गोद---------
और लोरी रह जा है।

Monday, 9 January 2023

(पुस की रात)

कहां कटती है,फटे कंम्बल से,
ऐ शहर गाँव मे,
पुस की रात.

हाड़ कपकपाती ठंड में 
कहां देख पाता है-शहर
खेत के किनारे पडे किसी-
किसान की लाश.

ये अखबार की बे-शरमी है,
"रंग-" वरना---
गाँव मे आज भी है,वही ठंड
और वही है
मुंशी प्रेमचंद के-
               पुस की रात.

@@@रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियांपुर
जौनपुर 222002 (U P )
Mo. no.7800824758
(मेंहदी लगाने के लिये)
जीसे---------
ता उम्र खुद की मेंहदी ने रुलाया,
ऐ,रंग-----वही खातुन पुरे शहर में----
मश़हूर है मेंहदी लगाने के लिये।

Sunday, 8 January 2023

(मेरी रुह कैद है)
ऐ बेवफ़ा--------
मुझे आजाद कर दे,
क्यूकि तेरे शहर में-----
अब तलक मेंरी रुह कैद है।

Saturday, 7 January 2023

धन्यवाद!मध्य प्रदेश से प्रकाशित सांध्य हिन्दी दैनिक समाचारपत्र "6pm" और संपादक बड़े भईया सतीश जोशी का जिन्होंने मेरी रोमांटिक कविता "सुहागरात" को अपना स्नेह दिया।

(सुहागरात)
यूँही पड़ी रहने दो कुछ दिन और कमरे मे---
हमारे सुहागरात की बिस्तर
और उसकी सिलवटे।
मोगरे के अलसाये व गजरे से गिरे फुल,
खोई बिंदिया,टूटी चुड़ियाँ!
और सुबह के धुंधलके की अंगडाई मे,
हमारे बाँहो की वे मिठी थकन!
कुछ दिन और----------
हमारे तन-मन,बिस्तर को जिने दो
ये सुहागरात।
फिर जिवन की आपाधापी मे ये छुवन की तपिस खो जायेगी,
तब शायद तुम और हम बस बाते करेंगे,
और ढ़ुढ़ेंगे पुरी जिंदगी---------
इस कमरे मे अपनी सुहागरात।
और याद करेंगे हम बिस्तर की सिलवटे,
मोगरे के फुल,खोई बिंदिया,टूटी चुड़ियाँ
और सुहागरात के धुंधलके की वे अंगडाई,
जिसमे कभी हमारे तुम्हारे प्यार की मिठी थकन थी।
@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.-----7800824758
(कोरोना वैक्सीन )

यह है----
शादी शुदा लोगों की
"कोरोना वैक्सीन "

यह
"मेड इन ससुराल" है
जो यह भलीभांति जानती है
कि उसे,
अपने पति को कब
और कहा
कितनी "डोज" देनी है 
यह पुरे वर्ष
बिना किसी "साइड इफेक्ट" के
अपने मनचाहे "टेम्परेचर" पर
रहती है,

ये "वैक्सीन",
अपने पति के यहां 
"तीज" से लेकर "करवा चौथ"
तक "सक्सेज" है.

अतः
अगर आपने शादी ना की हो
तो तुरंत कर डालिए
ताकि आपको भी मयस्सर हो
यह शादीशुदा लोगों की
"कोरोना वैक्सीन".

"यह हास्य रचना किसी भी पति-पत्नी के रोमांटिक मूड को क्वारंटाइन हो जाने के उद्देश्य से नही लिखा गया है".

रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, जिला-जौनपुर 222002
(U P )
Mo. no.7800824758

Friday, 6 January 2023

(सुहागरात)

यूंही पड़ी रहने दो
कुछ दिन और कमरे मे,
हमारे "सुहागरात" की बिस्तर
और उसकी सिलवटे.

मोगरे के अलसाये व
गजरे से गिरे फुल,
खोई बिंदिया,टूटी चुड़ियाँ!
और सुबह के धुंधलके की अंगडाई मे,
हमारे बाँहो की वे मिठी थकन!
कुछ दिन और--
हमारे तन-मन,बिस्तर को जिने दो
ये 'सुहागरात".

फिर जीवन की आपाधापी मे,
ये छुवन की तपिश खो जायेगी,
तब शायद तुम और हम बस बाते करेंगे,
और ढ़ुढ़ेंगे पुरी जिंदगी--
इस कमरे मे अपनी "सुहागरात".

और याद करेंगे हम
बिस्तर की सिलवटे,
मोगरे के फुल,खोई बिंदिया,टूटी चुड़ियाँ
और, "सुहागरात' के धुंधलके की
वे अंगडाई,
जिसमे कभी हमारे तुम्हारे प्यार की
मिठी थकन थी.

रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर 222002 (U P )
mo. no.7800824758
mo.no.-----7800824758
(सुहागरात)

यूंही पड़ी रहने दो
कुछ दिन और कमरे मे,
हमारे "सुहागरात" की बिस्तर
और उसकी सिलवटे.

मोगरे के अलसाये व
गजरे से गिरे फुल,
खोई बिंदिया,टूटी चुड़ियाँ!
और सुबह के धुंधलके की अंगडाई मे,
हमारे बाँहो की वे मिठी थकन!
कुछ दिन और--
हमारे तन-मन,बिस्तर को जिने दो
ये 'सुहागरात".

फिर जीवन की आपाधापी मे,
ये छुवन की तपिश खो जायेगी,
तब शायद तुम और हम बस बाते करेंगे,
और ढ़ुढ़ेंगे पुरी जिंदगी--
इस कमरे मे अपनी "सुहागरात".

और याद करेंगे हम
बिस्तर की सिलवटे,
मोगरे के फुल,खोई बिंदिया,टूटी चुड़ियाँ
और, "सुहागरात' के धुंधलके की
वे अंगडाई,
जिसमे कभी हमारे तुम्हारे प्यार की
मिठी थकन थी.

रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर 222002 (U P )
mo. no.7800824758
mo.no.-----7800824758

Thursday, 5 January 2023

(मंदिर और मस्जिद मकान सा लगता है)
हमने देखी है---------
दंगे मे अल्लाह और राम की लाशे,
ऐ,रंग----तब से हमे-----
ये मंदिर और मस्जिद एक मकान सा लगता है।
(लाहौर तक जाती है)
बहन की राखी दुश्मनो से लड़ने,
करगिल और पठानकोट तक जाती है।
शहीद की माँ का कलेज़ा फटता है,
इसकी बेवा चिखती है,
फिर भी वंदे मातरम की आवाज़,
सुनो इसके बुढ़े बाप के-----
कप कपाते होठ से आती है।
ऐ,रंग--फिर भी हर मर्तबा कितने गर्व से-
हमारी छप्पन इंच की छाती-----
लाहौर तक जाती है।

Tuesday, 3 January 2023

(नंगा खेलता बच्चा)
वे अपनी तोतली ज़ुबान से बोलता है,
किसी भी हिन्दू या मुसलमान से अच्छा।
मुझे बहुत खूबसुरत लगता है,
वे गली मे नंगा खेलता बच्चा।
क्या?करुँगा जाके-----
मै मंदिर या मस्ज़िद में ऐ,रंग-------
वे मिट्टी से बना रहा देखो मासुम किस तरह----------
एक घर तेरी मकान से अच्छा।
मुझे बहुत खूबसुरत लगता है-----
वे गली मे नंगा खेलता बच्चा।
ताजमहल महज़ पत्थर की एक दिवाल भर नही वे तमाम मोहब्बत करने वालो की एक जिंदा सदा है।
एैसी सदा को आज के डेली वर्तमान अंकुर मे जगह देने के लिये शुक्रिया निर्मेश के त्यागी भइया।@@@ताज़महल@@@
(1)
ना अब कोई शाहजहाँ,ना दुसरा ताजमहल होगा!
तड़पेगी दुनिया मोहब्बत की हो इससे जुदा,
क्योंकि इस जमीं पे चाहत ने नवाज़े है वे पत्थर,
जिसे तुम लाख तराशो--------
फिर भी ना वे ताज़महल होगा।
अंधेरी रातो में रौशनी यहाँ होती है चाँद सी,
हाय!उस खुदा के घर भी-------
ना एैसा ताज़महल होगा।
लोग छुते है अँगुलियो से लोग छुते है अपनी साँसो से,
पर"रंग" गंदा--------
इससे ना कभी ताज़महल होगा।
(2)
एै चाँदनी नहला तु रौशनी से अपने-------
शायद यहीं कही रुहे मुमताज़ उतरी हो।
तु चुम-चुम ले ज़मी का हर कोई ज़र्रा-----
शायद यहीं कही से रुहे मुमताज़ गुजरी हो।
ये पत्थरे संगेमरमर मोहब्बत की जिंदा तहरीरे है----
पढ़ ले इन्हे क्या पता?वे भी यहीं ठहरी हो।
वे समेटे अपनी हर एक साँस मे गुलाब की खुशबू -------
क्या पता?अपने शहंशाहे आलम के दिल मे उतरी हो।
रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.-------7800824758

Monday, 2 January 2023

(प्रीत का बिछुआ)
उम्र ढ़ली---------------
मै ढला पर वे न ढली,
हाय!आज भी चुभे है आधी रात बीस्तर मे,
ऐ,रंग--वैसे ही उसकी प्रीत का बिछुआ।
बेवफाई पे आज एक लम्बे अरसे के बाद, कुछ अलग लिखने की कोशिश की है,जिसे पढ़कर शायद आपको भी किसी की याद आ जाये "शनिवार के दिन ".

(शनिवार के दिन )

 

उठा था एक जनाजा, इसी शहर में
शनिवार के दिन.

वे आशिक,पागल, दीवाना था
जिसका दिल
बड़ी बेरहमी से तोड़ा था,
एक बेवफा ने. इसी शहर में----
शनिवार के दिन.

सुना है कि----
उसआशिक और पागल की,
आह! लगी थी उस बेवफ़ा को
इसी शहर में.
शनिवार के दिन.

तभी तो 
वे जिस रइश के घर गई थी,
करके निकाह अपना,
उस रइश ने, उसे दिया तलाक
इसी शहर में-----
शनिवार के दिन.

वे बहुत तन्हा.
सिसकती रही महीनों.
फिर जाने क्या हुआ?
की उसने कर ली खुदकुशी,
अपने उसी दुपट्टे से,
जिस दुपट्टे में,
कभी देखा था
उसे उसके आशिक ने पहली मर्तबा
इसी शहर में-----
शनिवार के दिन.

@@यह रचना सर्वाधिकार सुरक्षित है अतः इसका बिना अनुमति लिए अंयन्त्र प्रयोग ना करें.

यह रचना अप्रकाशित है.

रचनाकार---रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियांपुर
जौनपुर (U P )
mo. no.7800824758
(औरत और इस्लाम)
औरत इस्ल़ाम मे इतना भी हक नही रखती,
खुदा का दर भी है मर्दे मस्ज़िद,
ये वहाँ भी नमाज़-ए-सज़दा कर नही सकती।
औरत इस्ल़ाम मे इतना भी हक नही रखती।
पर्दा दर पर्दा घुटी जाती है ये बंदिशो की चारदिवारी में-------
ऐ,रंग-----ये अपने साँसो की कुर्आन भी------------
अपनी मरज़ी से पढ़ नही सकती।
औरत इस्लाम में इतना भी हक नही रखती।

@@@इस पोस्ट का आशय किसी को आहत करना नही है।
आज इस फानी दुनिया को एक और बड़े शायर अनवर जलालपुरी ने अलविदा कह दिया,,,अल्लाह मरहूम अनवर साहब को जन्नत बख्श़े।
                       (मुशायरे से उठ गया)
अदब का शम्म-ए-चराग था--------
जो आज बुझ गया।
एै "रंग" पहली मर्तबा अनवर-----
जिंंदगी के बीच मुशायरे से उठ गया।

Sunday, 1 January 2023

(मुबारक हो नया साल)
मेरा वजुद क्या है?मैने पुछा है नया साल,
क्या शिला यही है कि दर्द ही मिले,
मैने तो दिल के अपने कैनवस पे तुमको--
खिचा है नया साल।
मेरा वजुद क्या है?मैने पुछा है नया साल।
मैने ख्व़ाबो के घरौंदे को कितना सजाया,
पर वे भुले नही भुला,हमें जिनको भुलना था
उन्ही की याद मे तो शायद,
अपनी अश्क़ो से हमने यारो------
सिचा है नया साल।
मेरा वजुद क्या है?मैने पुछा है नया साल।
मुझे मिली है दुरियाँ तोहफ़े मे इंतज़ार,
मै खड़ा हूँ अज़नबी सा हर कही,
मै जाऊं किधर?क्या पता?मंज़िल कहा?
लो नाम लेके उनका--------
मैने चिंखा है नया साल।
मेरा वज़ुद क्या है?मैने पुछा है नया साल।
पर गिला नही ऐ दुर के साथी,
मै तो कोसता हूँ बस अपनी मुकद्दर को,
बस तुमको खुश़ी मिले ऐ शरिके हयात मेरी--------------
और मुबारक हो नया साल।

@@@@@ये रचना देश की उपासना नामक पत्रिका मे मेरी 2006 मे प्रकाशित हुई थी।
आप सभी को नव वर्ष मंगलमय हो।