Wednesday, 24 April 2019

(मै कुल्हड़ हूँ)

   (मैं कुल्हड़ हूँ)

मैं कुल्हड़ हूँ,


मैं इतनी खूबसूरत


और सुघर


यूँ हीं नहीं हूँ,


मुझे मेरे कुम्हार नें --


पसीने से तर-ब-तर भीग,


बड़ी मेहनत से गढ़ा है,


फिर सुखने के लिए 


इसने घंटो कड़ी धूप में रख 


मेरी रखवाली की,


सुख जाने पे,


मेरे कुम्हार ने ---


एक एक कर 


बहुत प्यार से मुझे उठाया


ताकि मैं कहीं से


फूटूं न ,उसी प्यार से फिर मुझे


मेरे कुम्हार ने,


आवें मे रख मुझे पकाया


और फिर आवें से निकाल


उसनें  मुझे तका


और पूछा, बता तूं ,


कैसी है??


मैंने भी ---


अपने कुम्हार से कहा,कि


तेरी कला ही कुछ ऐसी है, कि


क्या कहूँ??


बस !तू इतना समझ ले,


मेरे कुम्हार ,


मैं पहले सी खूबसूरत


और सुघर हूँ.


मैं कुल्हड़ हूँ.

@@रंगनाथ द्विवेदी


जज कालोनी,मियांपुर


जिला. जौनपुर 222002(U.P.)


(लाल-बत्ती)

       (लाल-बत्ती)


हमसे पूछो कि कौन रही? लाल बत्ती,


एक दागी विधायक---------------


जब अपने फार्म हाऊस पे,


किसी अबला का रेप कर रहा था,


तो उसकी चीख और सिसकी सुन के,


किसी पत्थर का कलेजा भी पिघल जाता,


लेकिन बाहर------------------


इस होते हुये बलात्कार पर भी मौन रही लाल बत्ती।


दंगे हुये,मौते हुई 


सलमा,रजिया,गुड़िया,लक्ष्मी 


सभी तो मरी लेकिन इन्हें भी,


यादव,पंडित और मुसलमान कहा गया,


बहुत पीड़ा हुई,


जब एक वर्ग को बचाके स्याह रात को,


सरकारी दंगे हुये,


कान पे इसके जूँ तलक न रेंगी,


बल्कि ये जिस गाड़ी मे लगी थी उसी में बैठे मंत्री जी,


शराब के पैग छक रहे थे----------


और लखनऊ की तरफ जा रही थी लाल बत्ती।


थाने बिके,


न्याय गया तेल लेने,


शहर के होटलो मे महिना बंधा,


जूआ और जिस्मफ़रोशी हुई,


ऐस.पी.,डि.यम.,जज सभी तो थे,


लेकिन ये कही और बजा रहे थे------------


एक आम आदमी के न्याय और उसके उम्मीद की लाल बत्ती।


सच इसे अब उतर जाना चाहिये,


क्योंकि जब मै इसे तकता हूँ तो लगता है,


कि जैसे बहुत सारी बेगुनाह लाशो के खून से,


रंगी है एै"रंग"--------------


हमारे देश की हर लाल बत्ती।

@@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी।


जज कालोनी,मियाँपुर


जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)


7800824758


(बजरंग बली चुनाव मे है)

(बजरंग बली चुनाव में है)

न जाने ----


       किस गली, किस गांव में है,


इस बार ----


        प्रभु श्री राम के साथ,


        बजरंग बली चुनाव में है.


ले गये थे ----


       कभी ये राम को,


        चुनावी सबरी के घर,


        बेर खाने,


         तब से राम,


          कश्मीरी पंडितों की तरह उपेक्षित,


           अपने ही देश, शह़र


            और गांव में है.


इन्हें नेता ----


            मंदिर के नाम ठग रहे,


            हाय ! कलयुग में राम,


             अपने भक्त नहीं बल्कि,


              जो इन्हें डूबो दे ,


             ऐसे मल्लाह ,


              और केवट की नांव मे है.


न जाने ----


             किस गली, किस गांव में है,


 इस बार ----


            प्रभु श्री राम के साथ ,


            बजरंग बली चुनाव में है.

@@@ रंगनाथ द्विवेदी


 जज कालोनी, मियांपुर


जिला--जौनपुर 222002 (U.P.)

Mo.no.7800824758


Friday, 19 April 2019

राग झुमर सुन रहा हूँ

(राग झुमर सुन रहा हूँ)


मै उसके कान की बाली का राग झुमर सुन रहा हूं,


कंगन,बिछुवे,चुड़ियां संगत कर रही,


कोई घराना नही दिल है-----------


जिससे मै राग चाहत सुन रहा हूं,


मै उसके कान की बाली का राग झुमर सुन रहा हूं।


उसका इस कमरे,उस कमरे आना-जाना,


एक सुर,लय,ताल का मिलन है


उस मिलन से उपजी-----------


मै राग पायल सुन रहा हूं,


मै उसके कानो की बाली का राग झुमर सुन रहा हूं।


कपकंपाते होंठ सुर्खी गाल की,


तील जैसे लग रही उसकी सखी,


और कर रही छेड़छाड़ भर बदन,


उफ!उसकी उम्र के उन्माद का------


मै राग काजल सुन रहा हूं,


मै उसकी कान की बाली का राग झुमर सुन रहा हूं।


घन-गरज है,बिजलियाँ है


काँधे पे वे श्वेत आँचल लग रहा कि मछलियाँ है,


उन मछलियो के प्रेम की--------


मै राग बादल सुन रहा हूं,


मै उसके कानो की बाली का राग झुमर सुन रहा हूं।

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।


जज कालोनी,मियाँपुर


जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)।


mo.no.-----7800824758


Friday, 5 April 2019

(सरयू मे समा जायें)


(सरयू मे समा जायें)

ऐ सियासत,


तेरी इस दुर्गति से अच्छा है कि-----


राम फिर सरयू मे समा जायें।


पता नही-------


कब कौन सी भीड़ बहके


और एक भाई,


दुसरे भाई के ही-----


लहू मे नहा जाये,


राम फिर सरयू मे समा जायें।


ऐ अदालत,


तू ही फैसला कर दे,


कि मंदिर या मस्जिद बनाने-----


ये हिंदू और मुसलमां कहां जायें।


ऐ सियासत,


तेरी इस दुर्गति से अच्छा है कि ,"रंग"----


राम फिर सरयू मे समा जायें।


(बसंती गेहूं काट रही है)

(बसंती गेहूं काट रही हैं)

ए.सी.कमरो मे बैठ के--


जो इतनी सुघर और स्मार्ट रही है,


वही बसंती चुनाव में आज कल---


गेहूँ काट रही है.


गजब है लोकतंत्र,


कि ना कालिया, ना शाम्बा


और नाही गब्बर का डर,


इतनी बेखौफ हो गई है बसंती,


कि अपने सर पे,


दुपट्टे रखने वाली औरत को,


बेरहमी से डांट रही है----


बसंती गेहूं काट रही है.


ये अच्छे दिन है,मोदी के


कि सिनेमा की ड्रीमगर्ल,


कृष्ण की मथुरा मे,


शौचालय के पर्चे बांट रही है---


बसंती गेहूं काट रही है.


@@@रचयिता---रंगनाथ द्विवेदी.


जज कालोनी, मियांपुर


जिला--जौनपुर,pin no.222002 (U P)


MP.n0.--7800824758


यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है।


(नेता जी )

(नेता जी)

चुनाव में----


हार के डर से,


बहुत घुट रहे---


नेता जी.


इसीलिए !


जरूरत से कहीं ज्यादा


झुक रहे----


नेता जी.


कल तलक बड़ी ऐठन थी,


दिखना मुहाल था,


आजकल----


गांव-गली, जवार मे,हर कहीं,


दिख रहे----


नेता जी.


खाने-पीने की सुध नहीं,


चिलचिलाती धूप में पसीने से तर-ब-तर हो,


अन्दर ही अन्दर, 


बहुत फूंक रहे----


नेता जी.


मन्दिर-मस्जिद में नवां रहे शीश,


कल तलक,


जिस दलित से चिढ़ते थे,


आजकल----


उसी की बस्ती


और घर मे भोजन कर,


कुछ देर रुक रहे----


नेता जी.

@ रचयिता--रंगनाथ द्विवेदी


जज कालोनी मियांपुर


जिला-जौनपुर.222002(U.P.)


Mo.no.7800824758

यह रचना मेरी स्व रचित व अप्रकाशित है।


(चुनाव आ गया )

( चुनाव आ गया )
ठंडे नेताओं को-----------
चार साल बाद ताव आ गया,
इसका मतलब है चुनाव आ गया.

ये कांंइयाँ--------
फिर इतने वादे दिल-दिमाग मे झोक देगा,
कि हम कल्पनाओं मे खो जायेंगे,
और हमें लगेगा की जैसे हमारे यहाँ------
बहुत जल्द एक अमेरिकन गाँव आ गया,
इसका मतलब है चुनाव आ गया.

बाते चिकनी और चुपडी कर,
दिल और दिमाग मे उतर जायेगा,
लगेगा इसी का कहा ही सच,
कि अब तलक इस गाँव मे केवल चोर-डाकु आये थे,
ये पहली बार है कि उसके रुप मे-----
हमारे यहाँ भी कुछ करने भगवान के भेजे,
एक साव आ गया--------
इसका मतलब है चुनाव आ गया.

ठंडे नेताओं को--------
चार साल बाद ताव आ गया,
इसका मतलब है चुनाव आ गया.

@@@रचयिता----रंगनाथ द्विवेदी.
जज कालोनी, मियाँपुर
जिला--जौनपुर पिन नं.222002 (उत्तर-प्रदेश).
Mo.no.--7800824758

यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है।