Tuesday, 26 May 2020

कविता---(मेरे शहर मे बरसात हो रही है )

(मेरे शहर में बरसात हो रही है)
जब से तुम्हें राग मल्हार लिखा है,
तब से मेरे शहर में बरसात हो रही है।
दिवाने हो गये है सारे स्याह बादल,
भूल गये है ये कुछ और शहर है,
जहां इनको बरसना है!
जब से तुम्हें राग मल्हार लिखा है,
तब से मेरे शहर में बरसात हो रही है।
कही तेरी खातिर यही न ठहर जायें,
भेज दे इन्हे ये बस तेरी सुनेंगे,
ये कैदी हो गये है------------
तब से तेरी रुप के,
जब से तुम्हें राग मल्हार लिखा है,
तब से मेरे शहर में बरसात हो रही है।

Sunday, 24 May 2020

(आवश्यकताओ का एक विशाल अग्निपथ )

नरेन्द्र मोदी की सत्ता मे पुनर्वापसी----------
  (आवश्यकताओ का एक विशाल अग्निपथ)

सर्वप्रथम तो मै भारत के इतने बड़े और समृद्ध लोकतंत्र मे एक बार पुन: नरेन्द्र मोदी को पिछली बार से कही ज्यादा सीटे जीतकर आने और उनके प्रधानमंत्री बनने की बधाई देता हूं.अब दो टूक और स्पष्ट बात करते हुये अपनी लेखनी से मै उन तमाम मुद्दों व विसंगतियों की तरफ ध्यान आकृष्ट करना चाहुंगा जहां अब भी बहुत ज्यादा करने की इस मोदी सरकार से जन-अपेक्षा है, इस जन-अपेक्षा को पुरा करने के लिये मोदी के साथ ही उनकी कैबिनेट को भी खपना और तपना है. इस खपने और तपने के लिये सत्ता के नशे से इन सभी को दुर रहना होगा तभी सकुशल सबका साथ,सबका विकास हो पायेगा.
इस वृहद व ऐतिहासिक जीत के साथ ही तमाम बिसंगतियांं भी अपना विकराल मूँह बाये खड़ी है,बेशक अगली बार मोदी ने जाती,संप्रदाय व भाषा से ऊपर उठकर काम किया तभी ये प्रचंड बहुमत उन्हे व उनके किये गये कार्यो को मिला इसलिये ये विजय खैरात नही बल्कि उनके किये गये पिछली सरकार के कार्यो का प्रतिफल है,लेकिन इस प्रतिफल को बनाये रखने और आगे ले जाने के लिये नरेन्द्र मोदी को जन-आकांक्षाओं के अग्निपथ पे खरा उतरना होगा.
ये सत्य है कि किसी भी समृद्ध व विकासशील देश की महति-आवश्यकता है शिक्षा,स्वास्थ्य, सुरक्षा,रोजगार आदि .ऐसे ही कुछ कार्य है जिसे पुरा करना हर सरकार को अग्निपथ पे चलने के बराबर है,इधर कुछ एक सालो से मतदान का ट्रेड हमारे भारत मे तीव्रगति से बदला है. अब जनता अपने जनाधिकार से उसी सरकार का चयन कर रही है जो उनके मानको पे कुछ खरी उतर रही है,जो ऐसा नही कर रही उन्हें जनता खानदानी सीटो से पटखनी दे ससंम्मान उनकी हैसियत काग्रेंस के राहुल की तरह बता दे रही. बहुमत के साथ सत्ता देने पे आप ये विधवा-विलाप नही कर सकते की जनता ने आपको एक असहाय व लगड़ी सरकार दी थी. नरेन्द्र मोदी आज युवाओं के एंग्री यंग मैन है,तरक्की व उनके अथक श्रम ने आज देश ही नही विदेश मे भी भारत के आत्म-संम्मान का मस्तक ऊँचा किया है,सच तो ये है कि आज वे हर उम्र वय के लोगो के हिरो है. मै उसी हिरो यानी---"विजय दीनानाथ चौहान रुपी नरेन्द्र मोदी को भी इस विशाल व वृहद भारत की आवश्यकताओं के अग्निपथ पे विजय पानी होगी".आईये कुछ ऐसी ही आवश्यकताओ के अग्निपथ की तरफ हम इस चुनी सरकार से खरे उतरने की उम्मीद करे.
    ( 1) शिक्षा किसी भी विकसित या विकासशील देश की रीढ़ है जिसको लेके प्लेटो जैसे विद्वान ने कहा कि---"शिक्षा एक जीवन पर्यन्त चलने वाली प्रक्रिया है" .सच ये है कि हमारे यहां की शिक्षा बड़ी बदहाल है,ये देश के कुछ समृद्ध व साफ्ट डकैतों के हाथ है,इसका ये आलम है कि विश्व के सौ कालेजों मे भारत के किसी कालेज का नाम न आना ये सरकार के आदेशों को भी अपने ठेंगे पे रखते है,इस हालात से बाहर सर्व-सुलभ व उत्कृष्ट शिक्षा उपलब्ध कराना इस सरकार की बड़ी जिम्मेदारी है.

(2)स्वास्थ्य---भारत मे शिक्षा से कही ज्यादा बदहाल तो यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था है,एक रुपये की गोली सौ रुपये मे आराम से बेची जाती है दस हजार का इलाज एक लाख मे. और यही दस हजार का इलाज जब लाख मे परिणत होता है तो इनके चम-चमाते अस्पताल की सीढियों पे एक गरीब माँ अपने जवान बेटे की लाश के साथ निर्जीव सी एकटक अस्पताल को तकती है,इस माँ के बेटे के इलाज का सबसे कठीन अग्निपथ है,ये डाक्टर भगवान नही पैसो के हैवान है,सरकार को सरकारी कालेजों से पढ़े सभी डाक्टरों से कडाई के साथ सप्ताह मे एक दिन जनसेवा के तहत कार्य लेना होगा, इस कार्य मे कोताही या हिला-हवाली करने पे आम आदमियों के टेक्स से पढ़े ऐसे डाक्टरों की डिग्री अवैध कर दी जाये.
(3)सुरक्षा के कई चक्र है सरकार की जिम्मेदारी होती है कि वे एक भयमुक्त समाज की श्री वृद्धि करे. महिला सुरक्षा लगभग हर चुनाव मे मुद्दा रहा लेकिन ये अभी भी कुछ एक को छोड़ मुद्दे के आगे बहुत बढ़ नही पाया.हालांकि इस सरकार ने सेना के संम्मान व इनके आयुधो पे बहुत कार्य किया.लेकिन आंतरिक अपराध के मामले आज भी विकराल है,चाहे वे बाल-अपराध हो या कोई अन्य अपराध. वैसे " एक कैंसर अपराध है नक्सलवाद" इसने देश-विरोधी अपराध से लेके हमारे तमाम सैनिकों के जानमाल का भी नुकसान किया है,इसका उन्मूलन एक चैलेंज है ये कठीन अग्निपथ है.
(4)रोजगार इतने बड़े देश मे सभी को रोजगार मुहैय्या करा पाना मुमकिन तो नही,लेकिन जरुरत है जिस स्तर का हूनर उस स्तर का रोजगार युवा व सभी को मिले भले चुनाव मे ये कहना कि---"रोजगार के लिये पकोड़े तले लेकिन ये चुनाव तलक ही ठीक था क्योंकि कि कोई अभिभावक लाखो का कर्ज ले अपने बेटे को महंगी व्यवसायिक डिग्री इसलिए नही दिलवाता की आगे चलकर उसका बेटा पकौड़े तले".अगर पकौड़े ही उसे अपने बेटे से तलवाना होता तो फिर क्या जरुरत थी उसे अपने बेटे को महंगी शिक्षा दिलवाने की .सरकार को समुचित और न्यायसंगत रोजगार, उपलब्ध कराना आंकडे के तहत नही बल्कि यथार्थ के तहत करना होगा,ये उम्मीद आज हर भारतीय नरेन्द्र मोदी से कर रहा.

(5)हमारे एक पूर्व-प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने एक नारा दिया था--"जय जवान और जय किसान का" ये नारा आज भी उतना ही प्रासंगिक है. किसान किसी भी अरबपति व उद्योगपति से ज्यादा पुज्य व श्रेष्ठ है.किसान को किसी कवि ने अपनी कविता मे "ग्राम्य देवता" कहा है.पिछली मोदी सरकार ने ये कार्य तो अवश्य किया कि---"बीना किसी भेदभाव के व किसी ब्लैकिये के खाद,पानी व विजली मुहैय्या कराई". लेकिन ये सरकार अगली बार सबसे ज्यादा आवारा पशुओं के मुद्दों पे घिरती दिखी ये मुद्दा यथार्थ भी था.किसान की आय दोगुनी हो ये इस देश की सबसे बड़ी खुशी होगी लेकिन आय के साथ ही सरकार को किसानों की फसलो को इन आवारा पशुओं से छुटकारा दिलाना होगा.

(6) इस बहुमत व जादुई आकडे के साथ चुनी सरकार को सभी के लिये स्वच्छ पीने का पानी मुहैय्या कराना बहुत आवश्यक है. जैसा की दुनिया के तमाम भूगर्भ जलवेत्ता कह रहे है कि---"तीसरा विश्व युद्ध पानी को लेकर होगा" अगर होगा तो ये अतिसयोक्ति न होगी क्योंकि हमारे यहा बहुत पहले ही पानी को महत्ता दी गई. तभी तो रहीम जैसे कवि ने कहा कि---
        "रहिमन पानी राखिऐ, बीन पानी सब सून
        पानी गये न उबरै मोती,मानुष, चून"
भारत जैसे वृहद देश मे भांति-भांति के प्रदेश व आवश्यकताये है किसी राज्य मे पानी की दयनीयता बड़ी भयावह है,इस मोदी सरकार से उम्मीद है स्वच्छ व पीने योग्य पानी मुहैय्या कराने की.

इसके साथ अन्य भी तमाम-तमाम आवश्यकताओ का अग्निपथ है अपने पड़ोसी देशो से संबंधों मे नीत सुधार का वैश्विक प्रयास भी मोदी सरकार को करना होगा.अटल बिहारी वाजपेयी जैसे कालजयी प्रधानमंत्री ने कहा भी कि---"हम अपना पड़ोसी नही बदल सकते".तेजी से गिरती अर्थव्यवस्था को कंट्रोल करना,धार्मिक व जातिगत द्वेश की खाई को पाटना.ये तमाम वे बिंदु है जिसपे--" इस ऐतिहासिक विजय नायक नरेन्द्र मोदी को कार्य करना है" और जनता के जनमत से लग रहा कि नरेन्द्र मोदी को अब ये रहते कायनात न भुलेगा,उन्हें विश्वास है की हमारा मोदी ये करेगा आजादी के कुछ एक प्रधानमंत्री हुये जिसे जनता ने अधिकार पुर्वक हमारा या अपना कहा,.ऐसे मे मोदी की जिम्मेदारी पहले से चौगुनी बढ़ जाती है ये जिम्मेदारी और आम-आदमी की आवश्यकताओ का विशाल अग्निपथ मोदी अवश्य पार करेंगे ये इस देश के जनता की उम्मीद है.

@@@लेखक---रंगनाथ द्विवेदी.
जज कालोनी, मियांपुर
जिला---जौनपुर 222002 (U.P.)
Mo.no.7800824758

यह लेख मेरा स्वलिखित व अप्रकाशित है.

Thursday, 21 May 2020

लेख---(एक्जिट पोल )

2019 की लोकसभा चुनाव का-------
                        (एक्जिट पोल)

जैसा की सभी सर्वे मोदी को एक मर्तबा फिर सत्ता मे--"अगली सुनामी की तरह ही लौटता दिखा रहे है".अगर खुदा ना खास्ता इस एक्जिट पोल की सुनामी सच हुई तो मुझे ये कहते व लिखते हुये आश्चर्य नही कि--"मोदी अपने चिंतन की गुफा से बाहर तो आ जायेंगे लेकिन काग्रेंस व अपने-अपने राज्य की बड़ी पार्टियां अपनी हताशा की उस गुफा मे चला जायेगा, जहां से बाहर निकलने के लिये एक न खत्म होने वाली घड़ियों का इंतजार करना होगा". इस बोझिल इंतजार के बाद का प्रतिफल क्या होगा बाद की बात है ,लेकिन सभी चुनावी एक्जिट पोल इस समय भाजपा को अकेले सरकार बनाने की बहुमत का संदेशा दे रहा और पुरे N.D.A को 350 के कुछ कम या ज्यादा बता रहा,ये एक्जिट पोल---"औंधे मुंह गिरे तभी कुछ संभव है, ये आज की तारीख मे मुमकीन नही अगर ऐसा हुआ तो, ये भारत के लोकतंत्र मे हुऐ चमत्कारो मे से पहला चमत्कार होगा जिसके एक्जिट पोल को सदियां याद करेंगी". क्योंकि ऐसा एकाध नही बल्कि समस्त एक्जिट पोल कह रहे कि, रिटर्न आफ मोदी.
सातवे व अंतिम चरण के मतदान से पहले काग्रेंस ने अपने एक समर्थक से सत्ता मे मोदी को आने से रोकने के लिये राज्य की उन मजबूत पार्टियों से संपर्क साधना चालू कर दिया था,जो चुनाव से पहले ऐंठे-ऐंठे से थे.आज की काग्रेंस एक झुकी हुई, पूर्ण रुप से टूटी काग्रेंस है ,ये सभी पार्टियां भी बाखूबी जानती है.लेकिन काग्रेंस के साथ ही कमोबेश इनकी भी यही हालत है.इन सबो ने खासकर काग्रेंस ने इससे पार-पाने व उबरने के लिये एक मीटिंग आगे की रणनीति के लिये 23 को रखी थी,जिसे एक्जिट पोल ने इन्हें टालने के लिये विवश कर दिया, यानि एक्जिट पोल ने कुछ तो तुषारापात या वज्रपात इनपे कर ही दिया है.
भाजपा की जीत के चाणक्य या कौटिल्य कहे जाने वाले अमित शाह जैसे कुटनीतिकार आज की राजनीति मे एकलौते कहे जा सकते है.आज एक्जिट पोल का खाका जो चमकता या 23 मई को उदय होता दिख रहा है,वे इन्हीं अमित शाह के तहत हो पा रहा.अमित शाह की बुद्धि का माइनर इतना ससंक्त है कि इसे डिसफ्यूज करने के चक्कर में---"उन्ही के राज्य मे कई और सारे राजनीतिक माइनर फट जा रहे".बंगाल की ममता के समर्थकों का इस चुनाव मे नग्न नर्तन बहुत कुछ बताने के लिये पर्याप्त है.मोदी और शाह ने एक तरह से ममता के बंगाल को इतना शसक्त तरीकें से घेरा कि वे इसमें घिर गई,ममता का ये घिरापन ही एक्जिट पोल मे दिख रहा ये एक्जिट पोल अगर सच हुआ तो--" फिर ममता को बंगाल मे खुद को काग्रेंस हो जाने से रोकना होगा".
एक्जिट पोल ने 23 मई को आने वाले चुनाव परिणामों से पहले ही ये संकेत दे दिया है कि---"काग्रेंस के सत्ता की दुल्हन ने निमंत्रण बट जाने के बाद काग्रेंस से अपना विवाह न करने का एक घाती निर्णय ले लिया है,यानी काग्रेंस के राहुल को ये एक्जिट पोल उनके डबल कुवारे होने का सर्टिफिकेट देता दिख रहा".
23 मई तलक के लिये इति-सिद्धम् एक्जिट पोल.

Tuesday, 19 May 2020

लघुकथा---(मालगाड़ी )

लघुकथा----(मालगाड़ी )

त्रिलोकी व उसके कामगार मजदूर साथियों को इस लॉकडाउन के दरमियां , इतने बड़े महानगर में अब ज़हर खाने को भी पैसा नही बचा था. उसपे भी चलो, रह लेते अगर सरकारी दावे के अनुसार उन्हें रूखी-सुखी कुछ भी खाने को मिल जाती, लेकिन नही मिला अंत में मजबूर होकर, त्रिलोकी अपने दस मजदूर साथियों के साथ, किसी तरह इधर-उधर से चंद रोटियों की व्यवस्था कर मुंबई से पैदल ही रेल की पटरियों के किनारे-किनारे अपने-अपने घर  चल पड़े. 

रेल की पटरियों पे चलते-चलते त्रिलोकी ने कहा- यार! थक गये है,  थोड़ा आराम कर लिया जाये, फिर चला जाये. तो सभी साथियों ने त्रिलोकी के हां में हां  मिलाई. चूकि पाँव की थकन और मन की थकन त्रिलोकी के सभी मजदूर साथियों पे इतनी हावी थी,  कि कहाँ  वे बस रेल की पटरी पर हल्का सा आराम करना चाहते थे, लेकिन इस हल्के से आराम भर से उन्हें इतनी गहरी नींद उन पटरीयों पर आ गई कि उन्हें पटरीयों पे हॉर्न बजाती हुई मालगाड़ी भी जगा ना सकी. और पटरियों पे सोये हुए त्रिलोकी के मजदूर साथिओं को कुचलते हुए,  वे मालगाड़ी आगे बढ़ गई. 

 वे तो त्रिलोकी की किस्मत अच्छी थी, कि वे अचानक लघुशंका को चला गया और जब लौटकर उसने अपने साथियों का हाल देखा तो, त्रिलोकी आवाक़  सा कभी साथियों की कटी तड़पती लाशें, ख़ून से सनी बिखरी रोटीआं व उस मालगाड़ी को देख रहा था, जो अपने पीछे उसके मजदूर साथिओं की उन खुली और पथराई आँखों में अपने घर कभी न पहुंच पाने का सन्नाटा व दर्द छोड़े जा रही थी. 

यह लघुकथा मेरी स्वलिखित व अप्रकाशित है. 


लेखक---रंगनाथ द्विवेदी 
जज कॉलोनी, मियांपुर 
जिला--जौनपुर pin. no. 222002 (U P)
Mo. no. 7800824758

कविता---(मेरी डिग्रियां )

कविता---(मेरी डिग्रियां )

मै रोज चढ़ता हूं, 
इस महानगर में देने, 
इंटरव्यू की सीढ़िया. 

पर मेरे हार की सलीब पे, 
लटक जाती है, 
मेरी डिग्रियां. 

ये बेरोजगारी का भयावहपन, 
और घुटन, 
वही इंटरव्यू
और मेरे हताश लौटते कदमो पे, 
कहकहे लगाती----
महानगर के दफ्तरों की सीढ़िया. 

नौकरी के लिए---
फुटपाथ-फुटपाथ राते काटी, 
खाया कभी नही खाया, 
बस अखबार में कलम से, 
कहां-कहां जाना है, 
निशान लगा अल-सुबह चल पड़ता, 
चढ़ने और उतरने---
मैं दफ्तर की सीढ़ियां.

हमेशा की तरह सुनने नो, 
एक दिन हार गया, 
और भीतर से टुट गया, 
तड़पाने लगी माँ की खांसी, 
छोड़ दिया मैंने दफ्तर-दफ्तर जाना, 
चलाने लगा रिक्शा, 
आज महीनो हो गये मैंने नही देखी, 
क्या करता देखकर, 
जब मुझसे कही ज्यादा ऐ "रंग"
असहाय और बेरोजगार थी--
मेरी डिग्रियां. 


यह कविता मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है. 

रचनाकार--रंगनाथ द्विवेदी 
जज कालोनी, मियांपुर 
जिला-जौनपुर pin.no.222002 (U P)
Mo.no.7800824758

Tuesday, 12 May 2020

कहानी----(जरीना की मोहब्बत का दर्द )

कहानी-----( जरीना की मोहब्बत का दर्द)

रफ्तार की मोहब्बत में शायद हम जरीना को  इतना दिल दे बैठे कि हम यह भूल बैठे थे कि हर रफ्तार की एक उम्र होती है. जिसे कहीं न कहीं थमना होता है. लेकिन वे रफ्तार हमारी दिल की जरीना ने कुछ यूूँ, थामां की जिसकी चोट और दर्द से अभी तलक मैं नहीं निकल पा रहा. जबकि चोट देते वक्त या हमारी मोहब्बत को दरकिनार करते वक्त भी जरीना की होठों पर वही दिल फरेब मुस्कान थी. जिसने मुझे रफ्तार से दर्द की खाई मैं ढकेल दिया. जरीना कभी हमारे आगोश में घंटो घंटो यूं ही खड़ी रहती थी. उस दरमियां जब वे कुछ बोलती तो लगता जैसे किसी परिंदे ने शाम के धूूँधलके में अपने महबूब दरख़ से कुछ कहा हो. 

 जरीना को अक्सर में उसकी नीली खूबसूरत आंखों की वजह से नीलोफर भी कहा करता था. वाकई जब उसे मैं नीलोफर कहता उस समय जरीना की आंखों की एक-एक तस्वीर मैं अपनी इन आंखों के कैमरे से खींच अपने दिल के एल्बम में सजाता रहता था. 

 लेकिन वे कितना मनहूस दिन था. हमारी मोहब्बत का जब जरीना एक लड़के के साथ उसी तरह हँस और खिलखिला रही थी,  जैसे कभी मेरे साथ हँसती  व खिलखिलाती थी. उस दिन जब मैं उसे देख लौट रहा था,  तो  जाने क्यों मुझे लग रहा था,  कि आज मेरे कांधे पे वे जो कभी अपने सर रखा करती थी,  आज उसी कांधे पर जैसे मेरे मोहब्बत के जनाजे का बोझ हो, और मैं उस जनाजे को लिए लौट रहा हूं. कुछ एक दिन यूं ही बीता मैं उसे अजनबी के साथ देखता और लौट आता. मुझे मालूम था कि जरीना कनखियों से अपने मुझे देखती और अपनी नजर फेर लेती है. 

 1 दिन जरीना खुद मेरे कमरे पर आई. लेकिन उस दिन जो जरीना आई थी,  यह वे जरीना नहीं थी, क्योंकि इस जरीना को मेरे उस कमरे से जैसे कोई बदबू सी आ रही हो. कुछ ऐसा ही जरीना ने शो किया. जरीना कितनी बेवफा व बेहया होगी,  मैं अब तलक उम्मीद नहीं कर पा रहा रहा था. मेरे मोहब्बत की रफ्तार का यह दिन हमेशा के लिए एक खत्म होती,  मोहब्बत का एक्सीडेंट था. जहां रफ्तार नहीं बल्कि आँसू होते हैं. जरीना ने कहा शाहिद-- मैंने सरफराज से निकाह करने का फैसला कर लिया है. उसके पास पैसा घर गाड़ी सब कुछ है,  जिससे जिंदगी चलती है. रही तुमसे मोहब्बत करने की बात तो वे ख्वाब थे,  जो हम तुम देख रहे थे. 

 जरीना ने आगे कहा, -" ख्वाब के जितने दिन होते हैं, जैसे हम और तुम जी चुके, अब इससे  ज्यादा नहीं जिया जा सकता." मैं तो तुम्हें तभी भूल गई थी. हां तुम भी मुझे जितनी जल्दी भूल जाओगे उतना बढ़िया होगा, मुंह लटका कर आंसू बहा कर रोना चाहो,  तो बात अलग है, तुम्हारी मर्जी. जरीना कहे जा रही थी और कहकर जब थमी तो भी कोई शिकन नहीं बस उसने बाय कहा,  और मेरी उस कमरे से दूर होती गई, फिर कभी ना आने के लिए. सच आज मैं एक मशहूर शायर तो हूं लेकिन मेरी जिंदगी के --"इस बेमकसद रफ्तार में ना जरीना है, ना नीलोफर."


यह कहानी मेरी स्वलिखित व अप्रकाशित है. 


लेखक---रंगनाथ द्विवेदी 
जज कालोनी, मियांपुर 
जिला--जौनपुर pin. no. 222002 (U P)
mo. no. 7800824758