Wednesday, 30 October 2024

व्यंग्य

✍️✍️भूख और गरीबी पर आजकल सूट बूट पहन कर लोग लिख रहे हैं,,यह दौर नागार्जुन का नहीं है,,,हां इस समय हमारी रोटी और गरीबी दोनों ही व्यंग्य है😃😃

व्यंग्य

✍️एक तथाकथित लेखक ने मासिक पत्रिका में छपने की लालसा के वशीभूत होकर उस पत्रिका को “महा ग्रंथ” लिख दिया.बस गनीमत इतनी थी कि, उन्होंने संपादक को “महर्षि व्यास” नहीं लिखा.😃😃😃😃

Tuesday, 29 October 2024

(व्यंग्य)

💃💃🕺🕺अगर आपकी पत्नी,, आपकी पड़ोसन से हंसते हुए यह कहे कि मेरे इसके पापा तो "एकदम गोबर गणेश है",,,तो समझिए की आपकी पत्नी आपके पतियोचीत व्यवहार से संतुष्ट है😀😀🤓🤓

Monday, 28 October 2024

(मां)

(माँ)
माँ-
    मै ढ़ेरो खाता हूँ,पर तेरी 
चुपड़ी रोटी की भूख-
रह जाती है।
आज सबकुछ है,
स्लीपवेल के गद्दे,एसी कमरे
पर नींद-
घण्टो नही आती है।
ऐ रंग यादो मे-
माँ की गोद,
और लोरी रह जाती है।

(याद आऊंगा)

(हिचकियो मे याद आऊँगा)

✍️✍️जाओ चाहे जितनी दूर तुम हमसे,,ऐ मेरी मोहब्बत--
मै तेरी हिचकियो मे याद आऊँगा.

Sunday, 27 October 2024

(दर्द के सीने में जलूंगी)

(दर्द के सीने मे जलुंगी)
ऐ दिवाली के दिये-----------
मै भी तेरे संग जलुंगी।
बस फर्क ये होगा कि------
तुम प्रीत की तीलि से जलोगे,,,
और मै विरह के तीलि से जलुंगी।
तुम मुँडेर,घर और दहलिज़ पे जलोगे--
रौशनी के लिये,
मै तो घुटुंगी,क्योकि मै वे दिया हूँ----
जो अपने ही दर्द के सीने मे जलुंगी।

Saturday, 26 October 2024

शेर

अंधेरी रात का खौफ 
कुछ और बढ़ जाएगा,
क्योंकि––
हमारे शहर के कुछ रईस 
उजाले खरीदने की फिराक में हैं.

Thursday, 24 October 2024

महत्वपूर्ण लेख

आवश्यक सूचना - साहित्यनामा पत्रिका के दीपावली विशेषांक के लिए रचनायें आमंत्रित हैं
साहित्यनामा पत्रिका के दीपावली विशेषांक के लिए प्रमुखतः नीचे दिए गए विषयों पर आलेख और निबंध इत्यादि आमंत्रित हैं। नियत विषयों पर आलेखों के अतिरिक्त रचनाएँ जैसे कहानी, लघु कथा, यात्रा वृत्तान्त, संस्मरण, गीत, गज़ल, कविता, छंद, मुकरी, हाइकु आदि भी भेजी जा सकती हैं। 
यात्रा वृत्तान्त, संस्मरण, कहानी और आलेख के लिए शब्द सीमा अधिकतम 1500 शब्द है। लघु कथाओं के लिए अधिकतम शब्द सीमा 400 शब्द होगी । गीत, गज़ल, कविता, छंद, मुकरी, हाइकु के लिए अधिकतम 20 लाइन नियत है ।
सभी नवोदित व स्थापित रचनाकारों से आग्रह है कि आप अपनी सर्वश्रेष्ठ व अप्रकाशित रचनाएँ ही भेजें। सम्पादकीय मंडल की स्वीकृति होने पर ही रचना को पत्रिका में स्थान मिलेगा इसलिए रचना का स्तरीय होना आवश्यक है । 
रचनाएँ भेजने की अंतिम तिथि 12 नवम्बर रखी गयी है । निर्धारित समय सीमा के बाद भेजी गयी रचनाएँ स्वीकार्य नहीं होंगी। 
अपनी रचना के साथ आप यह अवश्य लिखें कि यह रचना मौलिक और अप्रकाशित है । रचना के साथ आपका एक चित्र, संक्षिप्त परिचय, पता, फोन नंबर और ईमेल भी अवश्य ही दें और सभी कुछ एक ही मेल में दें, अलग अलग मेल से नहीं। रचना के बारे में और अन्य कोई पत्राचार अनुत्तरित रह सकता है ।
आपको अपनी रचनाएँ साहित्यनामा पत्रिका ईमेल sahityanamaa@gmail.com पर भेजनी हैं ।
साहित्यनामा पत्रिका का आगामी अंक दीपावली विशेषांक है इसलिए रचनाएँ दीपावली के त्यौहार और इससे सम्बंधित विषयों पर केन्द्रित हों और रचनाओं का कलेवर भी उसी प्रकार का होना चाहिए । कुछ विषय नीचे दिए गए है जो नियमित स्तंभों से इतर हैं :- 
दीपावली विशेष -
1. कार्तिक मास का महत्व 
2. त्योहारों का व्यवसायीकरण
3. प्रवासी कथा साहित्य में दीपावली
4. भारत में दीपावली को लेकर प्रचलित मान्यताएँ
5. खुशियों और सौगातों का त्योहार है दीपावली
6. सरहदों पर दिवाली
7. त्यौहार की मूल भावनाओं से भटकाव 
8. भगवान् राम के आदर्श और आज के समय में उनकी उपादेयता 
9. हिंदी कविताओं में जलते दीपावली के दीपक
10. दिवाली के दीयों से जगमग है हिंदी साहित्य
11. आलोक पर्व का सांस्कृतिक महत्त्व
12. भगवान धन्वन्तरि का चिकित्सा जगत में योगदान 
13. त्योहारों की बढती चकाचौंध में फीके होते स्वाद और संस्कार 
14. धन तेरस/ नरक चतुर्दशी या रूप चतुर्दशी/ दिवाली/ गोवर्धन/ भाई दूज का पौराणिक महत्त्व 
नियमित स्तम्भ -
A. साहित्य 
1. साहित्यकार जिनकी जन्मतिथि या पुण्यतिथि अक्टूबर/नवम्बर में है जैसे – प्रेमचंद, राम चन्द्र शुक्ल, भगवती चरण वर्मा, जय शंकर प्रसाद, हरिवंश राय बच्चन 
2. साहित्य के रोचक तथ्य 
3. बाल साहित्य 
4. साहित्य इतिहास के झरोखे से 
5. दलित साहित्य 
6. महिला साहित्य 
7. विदेशी साहित्यकार – जॉन कीट्स /ऑस्कर वाइल्ड/ मार्क ट्वेन/ जॉर्ज इलियट
8. नयी पुस्तकें 

B. प्रमुख व्यक्तित्व 
9. लाल बहादुर शास्त्री / महात्मा गाँधी/ भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू/ भारतीय मज़दूर संघ के संस्थापक दत्तोपन्त ठेंगडी/ क्रांतिकारी विरसा मुंडा/ भारत रत्न से सम्मानित विनोबा भावे/ समाज-सुधारक ज्योतिराव फुले
10. चंद्रशेखर वेंकट रमन जयंती

C. प्रमुख दिवस 
11. गाँधी जयंती / अहिंसा दिवस 
12. विश्व शाकाहार दिवस  
13. राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस
14. भारत में बाल दिवस / विश्व मधुमेह दिवस
15. राष्ट्रीय शिक्षा दिवस

D. रंगमंच और सिने जगत 
16. अभिनेता शशि कपूर
17. अभिनेता पृथ्वीराज कपूर
18. प्रेम नाथ 
19. अशोक कुमार / किशोर कुमार 

E. तीज - त्यौहार 
20. दशहरा/विजयादशमी  
21. नवरात्रि /दुर्गा पूजा 
22. करवा चौथ 
23. शरद पूर्णिमा 

F. स्वास्थ्य, पर्यावरण और विज्ञान 
24. चिकत्सा विज्ञान के क्षेत्र में बढ़ते कदम  
25. आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस का प्रभाव और योगदान 
26. क्या महिलाओं और पुरुषों को एसी का अलग तापमान चाहिये?
27. विज्ञान और तकनीक  

G. साक्षात्कार और परिचय 
28. युवा रचनाकार का साक्षात्कार 
29. किसी गीतकार का साक्षात्कार 
30. साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर
31. आधुनिक भारतीय साहित्यकार का परिचय
32. विदेशी साहित्यकार का परिचय 
33. सशक्त हस्ताक्षर 
34. प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं 
35. शिवानी का व्यक्तित्व और कृतित्व 
36. नारी मन की चतुर चितेरी शिवानी
37. रामकुमार वर्मा की साहित्यिक- यात्रा
38. रामकुमार वर्मा की इतिहास दृष्टि )


I. पर्यटन – यात्रा वृत्तान्त 
J. सामाजिक सरोकार
K. देश –विदेश 
L. समीक्षा, साहित्य आलोचना और साहित्यिक गतिविधियाँ (समाचार)
M. आपकी पाती (पाठकों की प्रतिक्रियाएं)
N. कैरियर सलाह – कैरियर के लिए नई स्किल्स 
O. क़ानूनी सलाह
P. संस्मरण 
Q. कार्टून और चित्रण 
R. पाक कला 
S. युवा लेखकों का कोना 
T. पाठकों का कोना

(कलयुग की अयोध्या)

(लखनऊ--कलयुग की अयोध्या)
सियासत---------
हर युग में बुढ़े पिता को दशरथ बना देती है।
अचानक मांग बैठती है साधना सी कैकेई,
मुलायम जैसे असहाय दशरथ से पिता से लिया कोई वचन,
और लखनऊ जैसी वर्तमान अयोध्या से,
छिन अखिलेश से राम को!
अपने पुत्र मोह की खातिर,
वे प्रतिक को--------
अमर सी मंथरा के कारण,
कलयुग का भरत बना देती है।
सियासत--------
हर युग में बुढ़े पिता को दशरथ बना देती है।
लेकिन समय की रामायण का ये कलयुगी कालखंड़ है,
अब सियासत की अयोध्या लखनऊ की गद्दी पे----------
आसीन होता है वही राम,
जिसकी यहां की जनता-----
अपने वोटो से बहुमत बना देती है।
@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.-----7800824758
उत्तर-प्रदेश के वर्तमान राजनैतिक हालात पर।

(प्याज)

(प्याज़ )

प्याज़ ठेले की सभी सब्जियों में----
करीना कपूर और 
ऐश्वर्या राय लगने लगी है, 

अदा---
प्रियंका चौपड़ा की तरह, 
ठसक--
कंगना राणावत की तरह, 

हाय रे ! ठेले की किस्मत, 
कि प्याज़, सभी सब्जियों में
बिपाशा बसु
और कैटरीना कैफ लगने लगी है.

😀😀😀😀😄😄😄😄

रंगनाथ द्विवेदी. 
जौनपुर ( उत्तर-प्रदेश)

(अवैध संबंध है)

(अवैध संम्बंध है)
हा!मुझे कुबूल है,तेरे इल्ज़ाम से पहले---
ऐ खूबसुरती-------
कि मेरा तेरी तारीफो से---------
अवैध संम्बंध है।

Monday, 21 October 2024

(बाल दिवस है)

(बाल दिवस है)
चाय की दुकान पे----------
सुट-बूट वाले साहब के,
अधरो पे सुलगते सिगरेट का कश है,
उस फैले धुँऐ में तेरह साल का बच्चा,
जूठे कप-प्लेट उठाता है,
जरा सा उसके मैले हाथो का श्पर्श
और माँ की गाली!
मासूम गालो पर------
बाल पकड़कर चंद चाटे,
देख रोटी-------
इतनी कम उम्र में इस बच्चे की भूख,
तेरी खातिर कितना विवश है!
इस मासूम को---------
अपनी पिड़ाओ की दुनिया से बाहर,
ये भी पता नही कि---------
कल तमाम देश के बच्चो के चाचा नेहरु का जन्मदिन,
यानी की बाल दिवस है।

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.7800824758

(बॉलीवुड एक बेवा बिखराव है)

(बाॅलीवुड----एक बेवा बिखराव है)
बाॅलीवुड----------
नरगिस और राज कपुर का अलगाव है,
गुरुदत्त की ख़ुदकुशी है,
तो घुट-घुट के दुनिया से विदा हुई------
मीना कुमारी के सीने का घाव है।
बाॅलीवुड----------
आँसू और ड्रामा है ,
ये उस काका के आनंद का किरदार है,
जो बाबु मोशाय के बाद--------
एक तन्हा कोठरी में तड़पता और घुटता है,
सच बॉलीवुड-----------
एक शराबी
की पिड़ाओ का गैंग्रीनी पाँव है।
बाॅलीवुड----------
वे परवीन बाॅबी है जिसे कई महेश भट्ट ने चाहा मगर,
उसे तन्हा छोड़ दिया!
वे डिप्रेस्ड बंद कमरे में छ दिनो तलक,
मरी पड़ी रही बीना किसी वारिस के,
सच तो ये है कि बाॅलीवुड-------
 औरत की अधुरी ख्वा़हिशो की घुटन,
और एक बेवा बिखराव है।

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जिला--जौनपुर पिन नं--222002 (उत्तर-प्रदेश).
mo.no.----7800824758.

यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है।

(चुनाव आ गया)

( चुनाव आ गया )
ठंडे नेताओं को-----------
चार साल बाद ताव आ गया,
इसका मतलब है चुनाव आ गया.

ये कांंइयाँ--------
फिर इतने वादे दिल-दिमाग मे झोक देगा,
कि हम कल्पनाओं मे खो जायेंगे,
और हमें लगेगा की जैसे हमारे यहाँ------
बहुत जल्द एक अमेरिकन गाँव आ गया,
इसका मतलब है चुनाव आ गया.

बाते चिकनी और चुपडी कर,
दिल और दिमाग मे उतर जायेगा,
लगेगा इसी का कहा ही सच,
कि अब तलक इस गाँव मे केवल चोर-डाकु आये थे,
ये पहली बार है कि उसके रुप मे-----
हमारे यहाँ भी कुछ करने भगवान के भेजे,
एक साव आ गया--------
इसका मतलब है चुनाव आ गया.

ठंडे नेताओं को--------
चार साल बाद ताव आ गया,
इसका मतलब है चुनाव आ गया.

@@@रचयिता----रंगनाथ द्विवेदी.
जज कालोनी, मियाँपुर
जिला--जौनपुर पिन नं.222002 (उत्तर-प्रदेश).
Mo.no.--7800824758

यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है।

Sunday, 20 October 2024

(उजाले की रात है)

(उजाले की रात है)
घर मे देवता आयेंगे,
उजाले की रात है।
दुःख,दर्द भगायेंगे,
उजाले की रात है।
नेह भर के रख दूँ,
आज की थाली-
वे भोग लगायेंगे,
उजाले की रात है।
ऐ रंग,-
क्या अमीर?क्या गरीब?
वे आज-
सब के घर जायेंगे,
उजाले की रात है।
घर मे देवता आयेंगे,
उजाले की रात है।

ढ़ेर सारे दीपो के साथ दीपावली की
शुभकामनाऐ,-रंगनाथ दुबे।

(गुलेल नीलोफर)

(गुलेल नीलोफर)
छुट रहे-
गुड्डे और गुडियो के,
खेल नीलोफर।
अब कैसे होगा,
तेरा अपनी सखियो से-
मेल नीलोफर।
रो रहा,रंग,-
अमिया को तोड़ने वाला,
तेरा छज्जे पे रखा-
गुलेल नीलोफर।

@@@नीलोफर यानी एक सिल-सिलेवार दर्द।

(गुनाह नीलोफर)

(गुनाह नीलोफर)
रखती थी-
सभी का खयाल नीलोफर।
फिर जलायी क्यूँ गयी?
अपने ससुराल नीलोफर।
ऐ रंग,-मेरी नज्म का -
वे गीरेबान झींझोड़े
पूछ रही हमसे-
अपनी गुनाह नीलोफर।

{आप बचा सकते है,
अपने आस-पास एक-
बेगुनाह नीलोफर।}

(अयोध्या उदास है)

राम मंदिर का फैसला आने से पहले 2019 में हमने एक रचना लिखी थी-------

(अयोध्या उदास है)

इस दिवाली भी---
सरयू उदास है,अयोध्या उदास है
हमारी आस्था टेंट मे है, 
उफ! मेरे अंतस मे केवट,
और हे! राम कह रहा--
जटायु उदास है.

रामभक्ति में-----
तमाम शबरी की आँख पथरा रही,
वे देखो----
मंदिर के लिये तराशी गई,
लंबे समय से रखी,
किसी अहिल्या सी,
राम मंदिर की––
शीला उदास है.

ये वनवास----
उन्हीं की नगरी में उफ!
हम नपुंसक है,
शायद इसी से-----
हनुमान, लक्ष्मण,सीता ही नही,
बल्कि अपने राम के वात्सल्य की,
मां--
कौशल्या उदास है.

इस दिवाली भी---
सरयू उदास है,अयोध्या उदास है.

रचयिता---रंगनाथ द्विवेदी.
जज कालोनी, मियांपुर
जिला--जौनपुर 222002 (U P)
7800824758

(जोक)

✍️✍️इस समय हार्ट अटैक की वजह से ज्यादा मौते हो रही है,,,इसलिए आई लव यू जैसे रासायनिक शब्दो का प्रयोग😀😀पति और पत्नी भी बहुत अनिवार्य होने पर ही करें🤓🤓

Saturday, 19 October 2024

(एक जिंदा दिया हूं)

(एक जिंदा दिया हूँ)
ताउम्र अपनी मै जल-जल के जिया हूं,
मै आदमी नही-----------
एक जिंदा दिया हूँ।
तमाम खराशे है,है तमाम सिलवटे
उधड़ा रहा मै----------
किसी मुफ़लिस के बिछौने सा,
हर जख्म जिंदगी का-------
मै खुद से सिया हूं।
मै आदमी नही--------
एक जिंदा दिया हूँ।
हु मै एक एैसा सजायाफ्ता,
जो रो नही सकता!
खौलते है आँसू मेरे दिल के अंदर,
मै कभी बहार में नही-------
खिजा़ में जिया हूं।
मै आदमी नही------
एक जिंदा दिया हूँ।

(जोक)

फेसबुक के सभी कुंवारे लड़के दिसंबर लास्ट तक ऊर्फी जावेद की फोटो को ध्यान से देखे🤓 
उन्हें ठंड में डाबर च्यवनप्राश खाने की जरूरत नही पड़ेगी यह सूचना कुंवारों के जनहित में जारी 🤓🤓

Thursday, 17 October 2024

(गुलेल नीलोफर)

(गुलेल नीलोफर)
छुट रहे-
गुड्डे और गुडियो के,
खेल नीलोफर।
अब कैसे होगा,
तेरा अपनी सखियो से-
मेल नीलोफर।
रो रहा,रंग,-
अमिया को तोड़ने वाला,
तेरा छज्जे पे रखा-
गुलेल नीलोफर।

(एल आई सी की तरह करता है)

(एल.आई.सी की तरह करता है)
मै तंग आ गई हूँ उसकी किस्त से,,,,,,,,
ऐ,रंग----मेरा शौहर-----
मुझसे मोहब्बत भी---------
एल.आई.सी की तरह करता है।

(ताजमहल)

ताज़महल पे हो रही सियासत से प्रेरित एक रचना-----------
                     (और एक ताज़महल)
मुहब्बत की निशानी की खातिर है याद महल-----
उफ!आज सियासत की ज़द में है ताज़महल।
मै नही कहता कि लड़ा जाये इस जगह------
लड़ने को और भी है इसके बाद महल।
कुछ जोड़े कसम खाते है न जुदा होने की--------
एैसा इसके सिवा दुनिया में नही है मुझे कोई याद महल।
रहने दो इसे मंदिर-मस्जिद मत कहो------
जैसे भी है रहने दो इस ज़मीने जन्नत मे ये आबाद महल।
क्योंकि जानता हूँ एै "रंग" कि बना नही सकती ये दुनिया---
इस ज़मी पे कोई एक और ताज़महल।

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)।
mo.no.----7800824758

Wednesday, 16 October 2024

(बनके फूल नीलोफर)

(बन के फूल नीलोफर)
कर नही पाये,
बना के तुम्हे बेटी
ये कुबूल नीलोफर।
तबाह कर देगी,पुरा कुनबा
उनकी-
ये भूल नीलोफर।
ऐ रंग,-
ये दुनियावी चलन है
कि फिर-
किसी के आँगन मे खिलेगी-
बन के फूल नीलोफर।

(खपरैल के घर)

(खपरैल के घर)
मिट्टी की सोंधी गंध,वे तितलियो के पर,,
वे खुला आसमान,वे पीपल की हवा---
सब कुछ टिसता है मेरी यादो मे।
ऐ,रंग--इस फ्लैट की घुटन से कही अच्छे थे-----------
मेरी गाँव मे खपरैल के घर।

(रावण)

(रावण )
पुराने खल चरित्र का रावण ,
आज के माडर्न खल चरित्र के रावण से,
कही ज्यादा पवित्र व श्रेष्ठ था,
क्योंकि उस रावण पे,
आज के माडर्न रावण की तरह-----
"किसी मासूम आठ वर्ष की बच्ची के,
रेप का कोई इल्जाम न था" ।
पुराने रावण पे तो,
उस राम ने विजय पाली,
पर माडर्न रावण से,
आज के राम डर गये है,
उससे गली-गली, शहर-शहर,
बचते व छिपते फिर रहे,
और माडर्न रावण अट्हास कर रहा।
शायद ऐसा लग रहा कि जैसे,
उस महा-विद्वान पुराने रावण के----
 मारने के श्राप से राम पीड़ित हो गये है।
सच तो ये है कि आज के माडर्न रावण को जला पाना,
इस नपुंसक समाज के बस का नही,
तभी तो अब भी,
हर दशहरे मे उसी पुराने रावण को------
जलाया जा रहा।

@@@रचयिता----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जिला---जौनपुर Pin.no.222002
(उत्तर-प्रदेश)।
Mo.No.--7800824758.

यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है।

(मैं दर्दे दरख़्त हूं)

(मै दर्दे दरख्त़ हूँ)
मै वे दर्दे दरख्त़ हूँ--------
जो चोट पे भी चुप रहती है शाख-शाख।
सब छोड़ जाते है--------
कुछ लम्हों के बाद मुझको,
मै सिसकती हु तन्हा अक्सर,
अपनी ही साँस-साँस।
मेरे बदन की ये लिबासे पत्तियां,
कर देती है खिज़ा में-------
बेपर्दा बदन मेरा!
मै जीती हूं किस तरह-------
शर्म को अपनी पलको से टांक-टांक।
मै वे दर्दे दरख्त़ हूँ-------
जो चोट पे भी चुप रहती है शाख-शाख।

@@@रचयिता----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.----7800824758

Tuesday, 15 October 2024

(गुनाह नीलोफर)

(गुनाह नीलोफर)
रखती थी-
सभी का खयाल नीलोफर।
फिर जलायी क्यूँ गयी?
अपने ससुराल नीलोफर।
ऐ रंग,-मेरी नज्म का -
वे गीरेबान झींझोड़े
पूछ रही हमसे-
अपनी गुनाह नीलोफर।

{आप बचा सकते है,
अपने आस-पास एक-
बेगुनाह नीलोफर।}

(बहस की जुर्रत करेगी)

(बहस की ज़ूर्रत करेगी)
गीता-कूर्आन----------
की मौत का मुझे खौफ़ नही।
गर कोई माँ किसी दंगे मे मरेगी,,,,,,,
तो ऐ,रंग--मेरी नज़्म हर मर्तबा------
मंदिर-मस्ज़िद से बहस की ज़ूर्रत करेगी।

Monday, 14 October 2024

तंज

😀😀वह पारिवारिक रील बनाकर वायरल नहीं हो रही थीं,,लेकिन जबसे उसने 90% अपने शरीर को ढकने वाली कपड़ों की रील काटी है,,तब से उसकी हर रील "वायरल बुखार हो गई है"😢😢

(जोक)

🥸🥸सावधान विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि इस समय हमारे देश में "बेरोजगार और इच्छाधारी प्रेमिकाओं की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही हैं"😀😀😀

(शेर)

✍️✍️नाम लेने को 
लें तो लूँ ऐ "रंग" --
लेकिन कोई शख्स मेरे शहर में बेनकाब हो जाएगा.😢😢

(शेर)

✍️✍️काफ़िया रदीफ़ में तुम लिखो,,हमें तो मोहब्बत लिखना था लिख दिया🌹🌹♥️♥️

(जोक)

✍️✍️आप सभी अपनी–अपनी पत्नियों को विश्व हृदय दिवस की हार्दिक बधाई दे दीजिए,, क्योंकि एक व्यक्ति का हृदय उसके शादी के बाद ही सर्वाधिक मजबूत होता है.😀😀😀😀

(जोक)

✍️✍️एक बहुत बड़ी पत्रिका है जो केवल अंतिम चरण वाले लेखकों को ही छापती है,,अतः अगर आप अंतिम चरण वाले लेखक हैं एक दो चरण में ही अपनी रचना या अपना लेख भेज दे 😀😀🥸🥸

(जोक)

मोहब्बत के एक वरिष्ठ डॉक्टर का कहना है कि--"प्रेमिका डेंगू है,साली चिकनगुनिया,सरहज टाइफाइड और सास मलेरिया,,इसलिए ज्यादा से ज्यादा आप अपने दिल के प्लेटलेट को मेंटेन रखें"😀😀

(जोक)

✍️✍️पहले विवाह से पूर्व लड़की वालों की तरफ से हमारे यहां के लड़को का इंटरव्यू लिया जाता था,,आज नौकरी के लिए लिया जाने वाला इंटरव्यू उसी की नकल है😁😁😁😁

(बस्तियां)

✍️✍️मासूम बच्चियों की रेप से बेहतर है,,,कि हमारे शहर में कुछ बस्तियां तवायफों की हों🥲🥲

(शेर)

खुद भूख से मर गया ऐ "रंग",,,,जो ता उम्र
औरों की अमीरी के ताबीज़ बेचता था 😥😥

(अख्तरी बेगम)

(अख्तरी बेगम)

लग रहा कि जैसे 
गा रही हो 
ठुमरी,दादरा,टप्पा 
अख्तरी बेगम. 

सामने चांद है,रात है, 
तारे है 
उन्हीं के बीच दिख रही 
अपने आप में डूबी
और खोई सी 
अख्तरी बेगम. 

उसके हौले–हौले से चलने की आवाज़ 
करीब आती जा रही
शायद! मेहमान खाने में 
फिर किसी से मिलने आ रही है
अख्तरी बेगम.

ना कुछ खोने का दर्द, 
ना कुछ मिलने की चाह 
बस एक तार टूटा 
और इस जमीं से 
सिर्फ विदा हुई 
मरी नही 
अख्तरी बेगम.

रंगनाथ द्विवेदी 
जज कॉलोनी,मियाँपुर 
जिला--जौनपुर 222002 (U P)

(जोक)

✍️✍️हमारे जौनपुर में तो जलेबी से ज्यादा इमरती मशहूर है,,वैसे भी "जलेबी की शक्ल जहां ललिता पवार से मिलती है वही हमारे यहां की इमरती की शक्ल ऐश्वर्या राय से"😃😃😃😃

(सूक्ति परक वाक्य)

✍️✍️डॉक्टर आज की तारीख में भगवान की आड़ में सफेद कपड़े में छिपा वह कातिल है जो अपने अस्पताल से लेकर पैथोलॉजी के जांच तक आपकी हत्या करता है🥲🥲

(जोक)

✍️✍️दीपावली में योग्य उल्लू ना मिलने पर आप आपात स्थिति में अपने पति की पूजा कर सकती हैं,,😃😃

(शेर)

✍️✍️ आड़े-तिरछे उबड़-खाबड़ पत्थरों की ओट में लिपट के लौटते हैं पति-पत्नी,,, उफ़!क्या करे आठ लोगों की बैठी चाल में मोहब्बत नहीं होती 😢😢 
मुंबई का एक सच यह भी

(जोक)

आप ऐसी लड़की से कदापि शादी ना करें,जिसके पिता के बाल उसकी मम्मी की शादी के बाद से झड़ गए हो,,😃😃 एक जेनेटिक सर्वे

(गूंजा का गाँव)

(गुंजा का गाँव)
है,आज भी नदिया का पानी
है,आज भी पीपल की छाँव।
आज भी-
उतरे है,चन्दा पूरे आँगन
है,आज भी ऐ रंग,-
वही चन्दन
और है,वही उसकी-
गुंजा का गाँव।

(हिन्दू और मुसलमान सुनना)

(हिन्दु और मूसलमान सुनना)
कभी भूख का वंदे मातरम-------
तो कभी रोटियो का राष्ट्रगान सुनना।
जो चंद रुपये मे खुद को बेच आई है---
ऐ,रंग---कभी उस औरत की ज़ुबां से,,,
हिन्दु और मूसलमान सुनना।

(बेजा तलाक ना दो)

(बेजा तलाक न दो)
ख्वा़हिशो को खाक न दो!
एै मेरे शौहर-----------
सरिया के नाम पे,
मुझे बेजा तलाक न दो।
बख्श दो---------
कहा जाऊँगी ले मासुम बच्चे,
मुझ बेगुनाह को-------
इतना भी शाॅक न दो,
बेजा तलाक न दो।
न उड़ेलो कान में पिघले हुये शीशे,
मुझ बांदी को सजा तुम--------
इतनी खौफ़नाक न दो,
बेजा तलाक न दो।
न छिनो छत,न लिबास
खुदा के वास्ते रहने दो,
मेरी बेगुनाही झुलस जाये-------
मुझे वे तेजाब न दो,
बेजा तलाक न दो।
सी लुंगी लब,रह लुंगी लाशे जिंदा,
लाके रहना तुम दु जी निकाहे औरत,
मै उफ न करुंगी!
बस मेरे बच्चो की खुशीयो को कोई बेजा,
इस्लामी हलाक न दो-------
बेजा तलाक न दो।

@@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.7800824758
____तलाक एक दर्द है जो इसे भुगत रही कोई औरत ही समझ सकती है!अगर संभव है तो मेरी इस रचना के पढ़ने वालो से मेरी कलम अनुरोध करती है प्लीज कभी किसी भी औरत से बेजा तलाक न ले,शुक्रिया।

(काबुली वाला)

( काबुलीवाला)

मैं रोज देखती हूं------
 खुली खिड़की से
 घंटों सड़क की तरफ, ए 'रंग '
 इस उम्मीद में कि शायद, 
 कभी दिख जाए, 
 वे मेरी बचपन का----
"काबुलीवाला "

@@रंगनाथ द्विवेदी 
जज कॉलोनी, मियांपुर 
जौनपुर, उत्तर-प्रदेश 
Mo.no.7800824758

Saturday, 12 October 2024

(सजा याफ्ता हूं)

(सजा याफ्ता हूँ)
मै उनकी कैद से
रिहाई कहां मांगता हूँ।
ऐ रंग,-
क्या खुब है,मेरी किस्मत
कि मै उनकी जुल्फो का-
सजा याफ्ता हूँ।

(शहनाई कलाकार)

(शहनाई कलाकार)
खुशी मे-
वे हँसा देता था,कई बार।
गम मे-
वे रूला देता था,कई बार।
उसकी मौत-
शहनाई की मौत थी,
ऐ रंग,-
वैसा फिर ना हुआ,कोई शहर मे-
शहनाई कलाकार।

(मैं भी कुम्हार हूं)

(मै भी कुम्हार हूँ)
हा मै भी----------------
अपने गीतो की चाकी पे,
शब्दो की मिट्टी रख,
कुछ गीत------------
उसके दिवाली के दीये की तरह बनाता हूँ।
वे भी कुम्हार है मिट्टी के दियले का,
और मै भी कुम्हार हूँ-------
अपने गीतो का।
वे उपले की आँच में,
पकाता है दियलो को और मै--------
अपने हृदय के उपलो की आँच में,
गीतो के शब्द पकाता हूँ।

Friday, 11 October 2024

(एक जिंदा दिया हूं)

(एक जिंदा दिया हूँ)
ताउम्र अपनी मै जल-जल के जिया हूं,
मै आदमी नही-----------
एक जिंदा दिया हूँ।
तमाम खराशे है,है तमाम सिलवटे
उधड़ा रहा मै----------
किसी मुफ़लिस के बिछौने सा,
हर जख्म जिंदगी का-------
मै खुद से सिया हूं।
मै आदमी नही--------
एक जिंदा दिया हूँ।
हु मै एक एैसा सजायाफ्ता,
जो रो नही सकता!
खौलते है आँसू मेरे दिल के अंदर,
मै कभी बहार में नही-------
खिजा़ में जिया हूं।
मै आदमी नही------
एक जिंदा दिया हूँ।

Thursday, 10 October 2024

(राम एक कलाकार में खंडित हो गए)

(राम एक कलाकार में खंडित हो गये)
इंतज़ार कर रही है करके मेकप,
किसी ग्राहक का!
पत्थर की नहीं------------
अपने भूखे पापी पेट की अहिल्या।
आज गुलज़ार भी तो है,
कोठे वाली गली!
क्योंकि आज------------
दशहरे के राम और रावण की झांकी निकलनी है,
उसे याद है,
कि अगले बीते वर्ष भी वे इसी तरह,
मेकप किये अपने कोठे के छज्जे पे खड़ी थी,
तो राम बने कलाकार ने किस तरह काम उन्मुक्त नजरो से,
उसके उन स्तनो को तका था!
पहली बार दशहरे की---------------
उसकी वे पिड़ा असह्य थी!
क्योंकि इस कोठे वाली अहिल्या ने,
जिस राम को अब तलक सुना था,
वे राम जैसे-------------
इस कलाकार में खुद खंडित खड़े थे।

(लहरों में फना होना है)

(लहरो मे फ़ना होना है)
मै तो फ़कत एक नदी हूँ-------
ऐ वालिदे दरिया,,,,,,,,,,
जिसे एक दिन---------
तेरी लहरो मे फ़ना होना है।

(मैं औरत नही मरुस्थली रेत हूं)

(मै औरत नही मरुस्थली रेत हूँ)
मै औरत नही-----------
मरुस्थली रेत हूं!
बस यूँही अक्सर उकेरती हूं,
ताकी मेरी पिड़ा--------
इन रेतिली कड़ो से ताजी रहे।
मैने तो खुद चुना है----------
अपने जीवन का ये रुदालीपन!
अगर रो दुंगी तो क्या बचेगा?
आँख से बह जायेगी वे पिड़ा भी!
मर जाऊँगी बिना तड़पे,
पाप का पश्चाताप मै जिना चाहती हूं!
अपने चारो तरफ रेत और यही रेत,
मै मुट्ठी-दर-मुट्ठी खाली होऊँ,
चुभे मेरे अंतरतक ये नागफनी,
मैने यही तो किया है---------
झुठे प्यार की खातिर!
तड़पता छोड़ आई थी माँ-बाप,
अगर औरत होती-----------
तो ससुराल होता,मायका होता
आज मै कुछ नही,
बस बिना किसी संवेदना की-----
बहुत दुर तलक फैली,
मरुस्थली रेत हूं।
मै औरत नही------
मरुस्थली रेत हूं।

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.----7800824758

Tuesday, 8 October 2024

(चिट्ठी)

मैं भला
कैसे भूल सकती हू
जब हर रोज दरवाजे पर
मैं घंटो खड़ी रहती थी
डाकिए 
को सारे गांव की चिट्ठियों का गट्ठर
अपनी साइकिल पर टांगे
बाटने के लिए
आते हुए देखने के लिए इस उम्मीद से
की शायद
वह अपनी साइकिल खड़ी कर
अपने चिट्ठियों के गट्ठर से
तुम्हारे प्यार की चिट्ठी निकाल
मुझे थमा
जैसे ही जाने को होता
तो इच्छा होती की उससे कह दू
कि जरा उनकी लिखी चिट्ठियां
थोड़ी और जल्दी दे जाया करो
फिर खुद को तुम्हारे चिट्ठियों के
प्रेम की बावली
समझ, खुद को धत कहती
और उस चिट्ठी को लेकर
बिस्तर के तकिए को सीने से लगाकर
कुछ देर
तुम्हारी चिट्ठियों को देखती 

जब तुम्हारे प्रेम की चिट्ठियां डाक से आती थी,
सच उस चिट्ठी को खोलने से पहले मेरी नज़र
उस चिट्ठी से चिपके

(अपनी उर्वशी पे)

(अपनी उर्वशी पे)
वे अपना सबकुछ वार देती है,
मेरी एक खुशी पे।
इसलिए,ऐ रंग,-मै
रोज कुछ न कुछ लिखता हूँ,
अपनी उर्वशी पे।

(प्यार का चांद)

करवा चौथ की सभी व्रती महिलाओ के प्यार की एक खूबसूरत कविता----
                             (प्यार का चाँद)
हमने पाया है तुममे अपने प्यार का चाँद,
बेशक कल तुम तकोगी छत पे मुझे,
मेरे हाथो से पियोगी व्रत का पानी,
लेकिन मै नही तकुंगा तेरे सिवा मेरी सजनी,
क्योंकि दुनिया तकेगी उसे,
मै तो तकुंगा तुम्हें क्योंकि तुम्हि हो-----------
हमारी धड़कन और हमारे प्यार का चाँद।
मेंहदी,महावर,चुड़ियाँ,सिन्दूर,बिंदिया,
वही पहले करवे सी शर्म,
तुम बहुत अच्छि हो मेरी सजनी,
क्या करुंगा तक के मै,
बहुत फिका है तेरे आगे आज-----
इस पुरे संसार का चाँद।
मै तुम्हें पाऊ हर जनम,
कभी न छिने मेरी आँखो से मेरी सजनी,
क्योंकि पल-छिन नही है तुमसे मेरी सजनी,
तुम्हारे साजन के प्यार का चाँद------
हमने पाया है तुममे अपने प्यार का चाँद।

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर (उत्तर--प्रदेश)।
mo.no.-----7800824758

यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है।

(जोक)

😀😀व्यंग्य लिखने वाले एक डॉक्टर ने बताया कि फेसबुक पर जब महिलाए अपनी सुंदर फोटो लगाती है तो इससे "पुरुषो की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है" 🤓🤓🤓

Monday, 7 October 2024

जोक

😁😁😁दीपावली में योग्य उल्लू ना मिलने पर आप आपात स्थिति में अपने पति की पूजा कर सकती हैं,,😃😃ग्रह नक्षत्र वाले पंडित जी

Sunday, 6 October 2024

(बांसुरी रोई)

(बाँसुरी रोयी)
फूल रोया,
फूल की पाँखुरी रोयी।
इतना दर्द था,उसके जाने का,
ऐ रंग,-
कि अधर पे रखा-
तो बाँसुरी रोयी।

जोक

पत्नी के सामने खिलखिला के हंसना,,हंसने की श्रेणी में नही आता,,,बल्कि यह खीस निपोरने की श्रेणी में आता है

Friday, 4 October 2024

(वक्त बूढ़ा हो गया)

(वक्त बुढ़ा हो गया)
ऐ बेवफ़ा---------
तेरी लौटने का इंतजार करते-करते,,,,,
मेरी जिंदगी का------
वक्त बुढ़ा हो गया।

Thursday, 3 October 2024

(आवरा छोड़ दिया)

(आवारा छोड़ दिया)
उसके शहर को--------
नजदीक से देखने की खातिर,,,,,,,,
ऐ,रंग----हमने-------
खुद को आवारा छोड़ दिया।

(किसानों के अच्छे दिन आ गए)

(किसानो के अच्छे दिन आ गये)
लात-घूँसा और पुलिस के बर्बरता की,
लाठी तलक खा गये----------
किसानों के अच्छे दिन आ गये।
डीजल--पेट्रोल महगा होता गया,
बड़ी मुश्किल से इस मर्तबा खेत जोता गया,
इनके बिकास का सारा पैसा--------
नीरव मोदी और माल्या खा गये,
किसानों के अच्छे दिन आ गये।
पिछली सरकार दस साल रही,
क्या किया उसने ?
हा इतना जरुर किया की हमारे जख्मों पे---
हमसे भी ज्यादा रोने आ गये,
किसानों के अच्छे दिन आ गये।
हर सरकार इन किसानों पे सांडर्स की तरह,
जलियांवाला बाग सा दर्द देती है,
ये ऐसे ही कभी मौसम,
तो कभी हुकूमत से लड़ते--लड़ते हार गये,
ये तब बागी हुये जब सह न सके,
तभी तो ऐ दिल्ली तेरी दहलीज पे आके,
तेरे अच्छे दिन को नकार गये-----
किसानों के अच्छे दिन आ गये।
लेकिन राजनीति अब भी कह रही,
कि विपक्ष को ईधन चाहिये था चुनाव का,
और अब भी पक्ष का वही दावा,
कि किसानों का पहले से कही ज्यादा-----
हमारी सरकार मे अच्छे दिन आ गये।

(पत्रकारिता के नाम पर रेप)

(ब्रेकिंग न्यूज--रेप)

उफ!
थम नहीं रहा, 
हमारे देश में
राजनीतिक रेप, 

किसी मजलूम लड़की
के घाव के निशान 
को ये 
कई-कई बार देखते है 
क्योंकि इन्हे, 
लड़की के घावों से 
विधानसभा के जीत की कुर्सी
अपनी जीभ 
लप लपाती हुई दिखती है 
हर नेता--
शायद इसीलिए चाहता है कि 
होता रहे, 
मासूम और मजलूम, 
लड़कियो का रेप 

यही, 
कमोबेश मीडिया भी 
अपनी लोकप्रियता के, 
टी आर पी का कैमरा लिए, 
बार-बार ब्रेकिंग न्यूज़,  
का ढ़िढोरा पीट, 
उस लड़की का मसालेदार बयान, 
उसके फटे कपड़े, 
ब्रा और टेप, 
को धुंधला दिखाकर 
कर रहा
अपनी पत्रकारिता के नाम पर 
"रेप."

यह रचना मेरी स्वलिखित व अप्रकाशित है. 

रचनाकार----रंगनाथ द्विवेदी 
जज कॉलोनी, मियांपुर 
जिला--जौनपुर (U P )

Wednesday, 2 October 2024

(धरती के भगवान)

धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर बीस रुपए का विगो 195 रुपए में बेच रहे हैं,,,और हमारी चुनी हुई सरकारे नपुंसक और मौन है😥😥

Tuesday, 1 October 2024

(हे! राम)

(हे! राम)
आज भी-
अहिंसा के सिने पे
चला रहा है,गोली,
नाथूराम।
कब थमेगी ये हिंसा-
बन्दुको की ऐ रंग,
आखिर कब निकलेगा,
कातिल के होंठो से-
हे!राम।
गांधी जयन्ति पर।

(आईने तोड़ रही है)

(आईने तोड़ रही है)
जब से आईने ने--------
उसकी ढ़लती उम्र की हक़िकत कह दी,,,,
ऐ,रंग----तब से वे गुस्से मे-----
आईने तोड़ रही है।

(लिंग काट लेती है)

(लिंग काट लेती है)
आज घर मे अकेला पा--------------
उसका पिता ही उससे जबरदस्ती कर,
उसकी अस्मत लुट,
बीना किसी पछतावे के करवट ले-----
यूँही नंगा लेटा रहता है,
बिटिया मौन ओढ़े उठती है,
और उठाती है यहाँ-वहाँ पिता के हाथो फटे,
बिखरे अपने अधोवस्त्र और लिबास,
फिर जाने क्यू ?
उन वस्त्रो को फेक देती है घिन से,
क्या करती? आखिर क्यू पहनती?
और क्यू ढकती?
उस पिता से अपने अंग,
जिसने पुरे शरीर को अपने नाखूनो से खरोंचा,
और दाँतो से बेरहमी से काटा,
उन स्तनो को------------
जो नारी की सर्वोच्च सुंदरता और,
उसके वात्सल्य की प्रतिमूर्ति है।
वे पुन: अपने कामांध पिता को तक,
एक गहरी साँस लेती है,
और यूँही नंगी बढ़ चलती है किचन की तरफ,
वहाँ से चाकू उठा,
आँख मुदे अपने आनंदातिरेक में नंगे सोये पिता का,
सुसुप्तावस्था मे एक तरफ ढ़लके----------
लिंग को काट लेती है।

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)।
mo.no.-----7800824758

मेरी एकाध रचना आपको बिचलित कर सकती है लेकिन इस तरह कि रचना मे एक आंशिक सत्यता भी आप अपने ही सभ्य समाज के किसी न किसी कोने मे पा जायेंगे------ये इसी तरह की एक सत्य घटना का प्रारुप भर है।

(लघुकथा की परिभाषा)

"मेरे खयाल से लघुकथा इतनी भी लघु नहीं होनी चाहिए, जिसमें लघुता तो बनी रहे पर कथा गायब हो जाए"

(जोक)

प्रेमिका डेंगू है और साली चिकनगुनिया,,,इसलिए अपना प्लेटलेट मेंटेन रखने के लिए आप बीच–बीच में अपनी पत्नी को दिखाते रहे. 😀😀