Tuesday, 30 September 2025

खण्डित राम

(राम एक कलाकार में खंडित हो गये)
इंतज़ार कर रही है करके मेकप,
किसी ग्राहक का!
पत्थर की नहीं------------
अपने भूखे पापी पेट की अहिल्या।
आज गुलज़ार भी तो है,
कोठे वाली गली!
क्योंकि आज------------
दशहरे के राम और रावण की झांकी निकलनी है,
उसे याद है,
कि अगले बीते वर्ष भी वे इसी तरह,
मेकप किये अपने कोठे के छज्जे पे खड़ी थी,
तो राम बने कलाकार ने किस तरह काम उन्मुक्त नजरो से,
उसके उन स्तनो को तका था!
पहली बार दशहरे की---------------
उसकी वे पिड़ा असह्य थी!
क्योंकि इस कोठे वाली अहिल्या ने,
जिस राम को अब तलक सुना था,
वे राम जैसे-------------
इस कलाकार में खुद खंडित खड़े थे।

Saturday, 27 September 2025

कहानी

मुझे उस समय जिस तरह के शक्ल सूरत की लड़कियां पसंद थी उसमें से एक भी गुण मेरी कॉलोनी की सुनैना में नहीं थे, अब उस समय चाहे तो आप मेरी उम्र को भी एक दोष या कमी में शामिल कर सकते हैं.खैर सुनैना कुछ दूर के रिश्ते में भी थी इस लिए ना चाहकर भी कभी कभी थोड़ी बहुत व्यावहारिक बातचीत उससे कर लेनी पड़ती थी. अब मुझे तो नहीं पता पर हा मेरी उतनी बातचीत से भी जैसे सुनैना के चेहरे पर एक खुशी थोड़ी देर के लिए ही सही पर आ जाती थी लेकिन मैं उस खुशी को समझ नहीं पाता था.
वैसे मेरे घर में ले देकर तीन लोग ही थे मां पापा और मैं बाकी बड़ी दीदी थी लेकिन उनका ब्याह शादी हो गया था वह अपने बाल बच्चों और परिवार में खुश थी

बेगुनाह रावण

(बेगुनाह रावण जल रहा है)
अब रावण का चरित्र---------
रामलीला में खल रहा है!
बेचारा------------
एक सीता के नाते प्रतिवर्ष जल रहा है।
एै दिल्ली--------------
जबकि तु लंका से गई बीती है,
क्योंकि रेप और बलात्कार,
तेरी सड़को पे चल रहा है,
और बेवजह---------
दशहरे में रावण जल रहा है।
अब वक्त आ गया है कि,
तेरी सदन में---------
रावण की समिक्षा होनी चाहिये!
क्योंकि अपनी सीता को,
अब रावण से कही ज्यादा,
उसका राम छल रहा है,
और दशहरे में एै,रंग------
बेगुनाह रावण जल रहा है।
@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.---7800824758
यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है।
आप सभी को नौरात्र और दशहरे की ढ़ेर सारी बधाई।

Friday, 26 September 2025

खुजली बहुत है 
कुछ खाज आने दे

मैं बड़ी बेसब्री से तेरी इंतजार में हूं 
ना डरा 
तू झूम के आ 
मैं भी तो देखूं 
लखनऊ की सड़कों पर 
मेरे सैलाब आने दे 

हमारी पुलिस 
ठीक करना जानती हैं 
दंगे बवाल को 


























Wednesday, 24 September 2025

(मदिरापान किया है)

(मदिरापान किया है)
हाँ मैने भी-----------------
यौवन के बोतल से अक्सर,
थोड़ा सा मदिरापान किया है।
जहां-जहां से भी छलका है----
मैने पैग भरे है!
हाँ काफिर होकर भी मैने--------
ये पूजा और अजान किया है,
थोड़ा सा मदिरापान किया है।
सच तो ये है कि यौवन को थोड़े-थोड़े,
तकते सब ही है,
सबकी लालच अलग-अलग है छिपी-छिपी,
बस मेरी खता यही है यारो----------
कि मैने इसको मान लिया है,
थोड़ा सा मदिरापान किया है।
इस यौवन की मदिरा ने-------
कई संत मौलबी छिन लिये,
इसकी अँगड़ाई ही एैसी है कि क्या किजै?
एै,रंग-----ये मदिरा माया है
जो हिचकी-हिचकी कड़वी है,
मैनै इस कड़वाहट के बोतल से 
थोड़ा सा मदिरापान किया है।

एक शेर

उससे
मेरा तलाक तो हो गया लेकिन
ऐ "रंग",
मैं उसकी मोहब्बत की मेहर के
पहले दुप्पटे को,लौटा नही पाई .

टिप्पणी

लगभग हर शहर मे तीन प्रमुख होर्डिंगो का कब्जा हैं एक है प्राइवेट अस्पताल,दूसरा हैं स्वर्ण आभूषण केंद्र और तीसरी होर्डिंग है नेताओं की और इन तीनों में एक बात कामन हैं कि यह आम आदमी के खून पसीने की गाढ़ी कमाई को मुस्कुराते हुए चट कर जाते हैं यह हमारे समाज के ड्रैकुला हैं 👺👺

Tuesday, 23 September 2025

एक टिप्पणी

✍️✍️आजम खान क्या राजनीतिक निर्णय लेते हैं यह बात की बात है,,लेकिन मेरे ख्याल से उन्हें बसपा ज्वाइन नहीं करना चाहिए,,क्योंकि बसपा हमारे उत्तर-प्रदेश की सबसे अविश्वसनीय राजनीतिक पार्टी है🙊

Monday, 22 September 2025

खजुराहो के पत्थर

(khajuraho ke patthar)
bnaya hai ek klakar ne tap kar ,
kamuk nhi uski murtiya kewl ,
ek jaadu hai "rang" 
wrna hme apni trf bulaate hai,
khajuraho ke patthar.

तुम लिखो

✍️✍️काफ़िया रदीफ़ में तुम लिखो,,हमें तो मोहब्बत लिखना था लिख दिया🌹🌹♥️♥️

एक रेगमाल सी जिंदगी

(एक रेगमाल सी जिंदगी)

कौन नही बुनता,
जुलाहे के कालीन सी जिंदगी!
तरह-तरह के धागे में पिरो,
कौन नही देखना चाहता मुकम्मल अपना शाहकार,
पर हो नही पाता ज्यो का त्यो चाहा,
फंस के खत्म हो जाती है मछली सी,
किसी मछेरे के जाल सी जिंदगी।
सारी ख्व़ाहिशे धरी रह जाती है,
एक-एक कर खत्म होती जाती है,
ऐ "रंग" यहां पर सभी जीते है 
एक रेगमाल सी जिंदगी.

Saturday, 20 September 2025

शहीद का पिता

(बुढ़े पिता का कंपकपाता हाथ)
कल शहीद की चीता जला रहा बाप---
रो रहा था!
तभी किसी ने कंधे पे रंखा हाथ,
तो वे चीख पड़ा-----------
कि रहने दो कंधे पे मत रंखो,
इस देश के ये नपुंसक हाथ!
जरुरत नही,
इतनी ही सहानुभूति है मेरे शहीद बेटे से,
तो कहो देश की सियासत से,
कि ला दे-------------
उस हाफिज़ सईद का कटा हाथ,
नही ला सकता ना जानता हूं,
इसी जगह फिर सजेगी,
कुछ फौजी बजायेंगे मातमी धुन,
और अपने शहीद बेटे की चीता को,
आग देगा--------------
किसी बुढ़े पिता का कंपकपाता हाथ।

@@@उरी के तमाम शहीदो को मेरा सलाम।

हेमा मालिनी के गाल लिखूं

(हेमा मालिनी के गाल कैसे लिखूं)

कोई बताए 
मैं अपने शहर की सड़क को
"हेमा मालिनी" के गाल कैसे लिखूं?

इस गड्ढे की खूबसूरती में
हम आने–जाने वालो की जवानी फंसी है
ठीक से महबूबा कैसे गुजरेगी ?
उसकी कमर के "आयोडेक्स"
की हालात को
मैं भला ,"जूही चावला" 
या फिर "माधुरी दीक्षित" की
बलखाती चाल कैसे लिखूं?

फिर!
इस सड़क से गुजरते हुए
अपनी महबूबा को देखना भी रिस्क है,
ना जानें कब कौन सा पांव टूट जाए?
ऐसे टूटी हुई
हड्डी के अस्पताल वाली सड़क को
"उर्मिला मातोंडकर",
के लहराते बाल कैसे लिखूं ?

कोई बताए 
मैं अपने शहर की सड़क को 
"हेमा मालिनी" के गाल कैसे लिखूं?

**मेरे शहर के सड़क की हालत पर मेरा एक रोमांटिक कटाक्ष,,,,इस शिकायत का अभिप्राय राजनीतिक नही बल्कि हमारे शहर के आम जनता की दर्द और पीड़ा से है**

रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी,मियांपुर
जौनपुर (U P) 222002

रचना

आज भी मुझे 
उसे प्रेम पत्र लिखने की इच्छा होती है,
सोचता हूं कि उसके 
उसी पुराने पते पर भेजूं
लेकिन पता नही कि वह 
अब वहा 
अपने पुराने पते पर 
रहती भी है की नही 
फिर पढ़ेगी कैसे 
उसका पति होगा 
घर होगा,बच्चे होंगे 
अब तो उम्र भी 
उसकी चालीस के आस पास हो गई होगी 
क्या बिना चश्में के वह पढ़ पाएगी 
वैसे कॉलेज के दिनों में 
उसके लिखे दो तीन प्रेम पत्र अब भी 
मेरी दराज में हैं 
इसे भी अब तलक मैं फाड़ के फेक चुका होता 
लेकिन

व्यंग्य

✍️✍️ हमारे शहर के व्यक्तियों के मुंह में पाए जाने वाले बत्तीस दांत में से कम से कम छ दांत अपनी युवावस्था में ही झड़ जाते हैं जिसमें से 🥸🥸तीन दांत हम पूरी ईमानदारी से रजनीगंधा और कमला पसंद को दे देते हैं और बाकि तीन दांत हम अपने यहां के दोहरा को दे देते हैं😢😢इसीलिए हमारे यहां लोग गुस्से में दांत नही पिसते उन्हे डर रहता है कि कहीं इसकी वजह से उनका सातवां दांत भी ना चला जाए 😃😃😃😃

Friday, 19 September 2025

ग़ालिब हूं

(अपने दौर का ग़ालिब हूं)

मैं चढ़ा नहीं कभी मस्जिद की सीढ़ियां
थी काफिर-ऐ-लत मुझे छक के पीने की,
गर सलीके से लिखूं
तो ऐ "रंग"
मैं अपने दौर का गालिब हूं.

Wednesday, 10 September 2025

शमा गायेगी

(शमा गायेगी)
तेरे निकाह की रात में--------
शमा गायेगी।
आँखे रोयेंगी मेरी,बीना आँसू 
अंदर एक ताजमहल टुटेगा-----
और शमा गायेगी।
तु अगर सोयेगा भी--------
अपनी सेजे मोहब्बत!
तो तेरी शरिके हयात की हर चुड़ी से---
शमा गायेगी।
तु तड़पेगा मेरी सदा से भागने वाले,
कभी बच न सकेगा!
क्योंकि इस कायनात के हर जर्रे से----
शमा गायेगी।

आईना बेचती थी

(आईना बेचती थी)

जो कभी खुद को 
ना देखती थी,,,
ए "रंग"
वही लड़की,

हमारे शहर मे--
"आईना बेचती थी".

विशेष---सभी सम्मानित लोगो से विशेष अनुरोध हैं कि मुझे टैग ना करे,अन्यथा मैं आपके टैग को रिमूव कर दूंगा ✍️✍️🙏🙏

(एक टिप्पणी)

जितनी तारीफ यह पीढ़ी डोमिनोज के पिज़्ज़ा की कर रही है,काश! उतनी ही तारीफ हम लोगों ने अपनी मां की चुपड़ी हुई रोटी की, की होती तो इतने दिनों का सड़ा गला पिज्जा हमारी यह पीढ़ी ना खा रही होती.😢😢

Friday, 5 September 2025

कान्हा

(ऐ कान्हा छोड़ ना)
ऐ कान्हा छोड़ना,गागरिया फोड़ ना
मै करती हूँ विनती,हाथो को जोड़ ना।
ऐ कान्हा छोड़ ना-----
मोहे जाना है जल्दि ओ मेरे साँवरे
गर्मी की धुप है,जलता है पाँव रे
ऐसे तु ऐ कान्हा मुख अपना मोड़ ना।
ऐ कान्हा छोड़ ना-----
घर आओगे मेरे तो,माखन खिलाऊँगी
चोरी से तुमको अलग से भी दुँगी
जाऊ मै घर को,ऐ कान्हा बोलना।
ऐ कान्हा छोड़ ना-------
फुटी जो गागरियाँ,डाटेगी मईया
मै कैसे सुनुगी रे हाय!मेरी दईया
अब तो तरस खाओ,यशुमति के भईया
अब कुछ भी ना सोचना।
ऐ कान्हा छोड़ ना।

आप सभी को कृष्ण जन्माष्टमी की बधाई।

Thursday, 4 September 2025

चूड़ियां तीज कहती हैं

(चुड़ियाँ तीज की)
पहली बार आपने ही तो पहनाई थी,
मेरी कलाई में ये चुड़ियाँ तीज की।
तब से अब तलक मेरी कलाई के साजन,
आपको ही बुलाती है सब के बीच से,
चुपके से----------------
खनक के ये चुड़ियाँ तीज की।
आप भी उठ आते है कर बहाना,
चुपके से पकड़ने हमें किसी तरह,
मै शर्मा जाती हूँ!
तो उस शर्म की घड़ी में,
बोलती है आपसे---------
ये चुड़ियाँ तीज की।
है मेरी इच्छा,है मेरी पूजा 
कि सलामत रहे आप मै सुहागन रहुं,
आप पहनाते रहे इस कलाई मे मेरे,
मै पहनती रहुं आपसे उम्र भर------
ये चुड़ियाँ तीज की।

टिप्पणी

✍️✍️हिंदी साहित्य को अपने ही देश के शेक्सपियर ने मार दिया😢😢

Tuesday, 2 September 2025

मर्सिया लिखना है

(मरसिया लिखना है)
अभी तो बस यादो के चराग जले है---
ऐ,रंग----अभी तो हमे सारी रात------
उस बेवफा पे मरसिया लिखना है।