कल डाक से "इन्नर " पुस्तक प्राप्त हुई. जो पुरे देश में जनप्रियता के कीर्तिमान की तरफ बढ़ रही. हर राज्य से इसकी तारीफो के फ़ोन आ रहे. ये पुस्तक देश के 100 पुस्तकालयों में रखी जाएगी. इसमें देश के युवा व जनप्रिय साहित्यकारो की एक मुक़म्मल दुनिया है.
इसमें देश के 125 रचनाकारों की रचनाये शामिल है. ये 296 पृष्ठ की पुस्तक है.
इस पुस्तक में-----
15 कहानिया, 90 कविताएं
25 लघुकथाएं, 37 गजले शामिल है.
इसे आप मात्र कोरियर सहित लागत मूल्य 200 रूपये में प्राप्त कर सकते है. इसे संपादक बिभूति भूषण झा या हमारे फेसबुक के मैसेंजर या फेसबुक के कमेंट बॉक्स में मैसेज कर सकते है.
धन्यवाद, "इन्नर " और संपादक बिभूति भूषण झा सर का.
जिन्होंने मेरी एक लघुकथा----
(1)भूख से मरे शायर का दिवान छपा
व एक कविता----
(उन्नमुक्त होना चाहती हूँ )
एक भूखा शायर जो अपने जैसे भूखे शख्स की रोटियों की मजार पे लिख गया----------
(भूख से मरे शायर का दिवान )
जी हाँँ! हमारे शहर मे फूटपाथ किनारे दिनभर वे बीड़ियाँ बनाता और उन्हें सेंकता था, तैयार हो जाने पर जब वे कुछ बीड़ियाँ बेच लेता तो उन्हि चंद पैसे से कुछ सुखी रोटियां व प्याज से अपने दोजख को किसी तरह भर बगल से गुजर रहे सप्लाई के काई लगी टोटी से पानी पी कई सालो पुराना मैला-कुचैला फटा कंबल निकाल वही अपनी बिड़ी बनाने और बेचने वाली फूटपाथ की जगह सो अपनी रात गुजार दी।
वही बिड़ियाँ बनाने और बेचने वाला शायर जिस दिन बिड़ियाँ न बेच पाता उस रात वे एकाध बिड़ि सुलगा अपनी होठों से लगा इधर-उधर से बीने हुये सादे कागज़ पे अपने दर्द के नग्में लिख उसे उसी बिड़ी वाले बाकडे के एक सुरक्षित जगह रख देता।
ऐसे ही एक दिन भूख मे सोये हुये उस शायर की मौत हो गई, काफी दिन निकल आने पे भी न उठा तो उसे पुलिस वालो ने उठाने की कोशिश की तो वे मरा पड़ा था,डाक्टर के बुलवाने पे पता चला कि इसकी मौत भूख से हुई है। उस शायर की जब सारी छान-बीन पुलिस वालो ने की तो उसकी नज्मों के वे सारे कागज़ बरामद हुये।
उस समय जो शहर कोतवाल आया हुआ था वे भी शेरो-शायरी और नज्मों का काफी शौकीन था,उसने अपनी मदत से और कुछ स्थानीय सेठ-साहुकारों की मदत से जब उस भूख से मरे शायर का दिवान छपवाया तो उस दिवान ने बिकने के सारे रिकार्ड तोड़ दिये। आज वे जिस शहर की फूटपाथ पे भूख से मरा था उसी शायर के नाम लाखों-लाख के मुशायरे होते है। लेकिन वे भूखा शायर "कभी किसी जश्न या त्यौहार पे नही लिखता था, वे अपनी तरह औरो के दोजख की भूख व उनकी रोटियों की मजार पे लिखता था" ।
@@@रचयिता---रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जिला--जौनपुर पिन.नं.--222002(उत्तर-प्रदेश)।
Mo.no.---7800824758
यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है।