Sunday, 31 March 2024

कथन

जो देश हमेशा अपने श्रवण कुमार जैसे बेटो पर गर्व करता रहा हो,उसी देश में एक बेटे की वजह से उसके बूढ़े मां बाप ने आत्महत्या कर ली,,??? काफी दुःखद

Saturday, 30 March 2024

(रजिस्टर्ड अप्रैल फूल हूं)

(रजिस्टर्ड अप्रैल फूल हूँ)
शादी के बाद से------
किचन और बच्चे संम्भालने मे मशगूल हूँ,,,,,
महारत हासिल कर ली है,,पैर दबाने में,,,,,,,,
वे अक्सर लाल-पीली होती है-------
मै कुल हूँ।
ऐ,रंग--मै अपनी लुगाई का--------
रजिस्टर्ड अप्रैल फूल हूँ।

आप सभी संम्मानित पतीयो व होने वाले पतीयो को मूर्ख दिवस की ढेर सारी बधाई।

(घर की पैजनी रोती है)

(घर की पैंजनी रोती है)
बद्चलन-------------
रातो की आगोश मे सो तो लिया!
पर कभी सोचना ऐ,रंग-------
कि तुम्हारे इंतज़ार मे सारी रात,
घर की पैंजनी रोती है।

(तलाक)

(तलाक न दो)
ख्व़ाहिशो को खाक न दो,
ऐ मेरे शौहर!
शरिया के नाम पे--------
मुझे बेज़ा तलाक न दो।
बख्श़ दो--------
कहाँ जाऊँगी ले मासुम बच्चे,
मुझ बे-गुनाह को इतना भी शाॅक न दो!
बेज़ा तलाक न दो।

@@सुप्रीम कोर्ट के तीन बार तलाक देने के मसले से प्रेरित चंद लाइन।

(वंदे मातरम्)

(जाफ़रान वंदे मातरम)
क्यू नही गायेगा-------------
कोई हिन्दू या मुसलमान वंदे मातरम।
ये जेहनियत के बीमार है इन्हें क्या पता?
कि है हिन्दू के लिये गीता,
और मुसलमानो के लिये है-------
कुरान वंदे मातरम।
यकी न हो तो किसी भी कौम से पुछो,
यही कहेगा कि जिस मुल्क मे जन्मे,
आखिरी लम्हे वहीं की खाक मिले,
उसी ख्वा़हिश की है जुबान---वंदे मातरम।
आओ तरन्नूम मे गायें इसे हम तुम,
क्योंकि ये मुल्क मेरी माँ और तेरी अम्मी है,
एै"रंग" जिसके आँचल की दूध मे है बन के केसर------------
और जाफ़रान वंदे मातरम।

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.----7800824758

ये रचना आज वंदे मातरम को लेके छिड़े विवाद से प्रेरित है।

(मकान जल जाता है)

बिहार और बंगाल के दंगे पे लिखि रचना।
                  (मकान जल जाता है)
जब राजनेता कोई घिनौनी चाल चल जाता है---------
तो उससे बिहार और बंगाल जल जाता है।
सब एक दूजे को मरते-मारते है और---------
हमारे खून-पसीने से बनाया मकान जल जाता है।
जिन्हें ठीक से श्लोक नही आता,
और जिन्हें ठीक से आयत नही आती,
उन्ही के हाथो----------
शहर की पूजा और अजान जल जाता है।
कर्फ्यू में--
रेहड़ी और खोमचे वाले मजदूरो के बच्चे,
आँख मे आँसू लिये,
तकते है तवे का सुनापन सच तो ये है कि,
शहर के दंगे मे-----------
गरीबो और मजदूरो की रोटी का सामान जल जाता है।
सब एकदूजे को मरते-मारते है और----------
हमारे खून-पसीने से बनाया मकान जल जाता है।

@@@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर--222002 (उत्तर-प्रदेश)।
mo.no.----7800824758

Thursday, 28 March 2024

(सेब द चाइल्ड लिखवा रही है)

(सेब द चाइल्ड लिखवा रही है)
किसी कन्या भ्रूण को कोई क्या मारेगा?
माँ खुद मरवा रही है।
हँसी-खुशी के साथ हजार दो हजार दे,
हर शहर के पैथालाॅजी मे रिपोर्ट ले,
किसी डाक्टर के टंगे नीले परदे के उस तरफ,
अपना एबार्शन करवा रही है।
आँख इसलिये भर आती है कि-------
इन तथाकथित माँओ ने कालेज मे पढ़ा है,
"इनके पथराये हृदयो ने--------
माँ शब्द की कोमलता खो दी है",
वही निरक्षर माँ----------
चार बेटिया जन पाप-पुण्य से डरती है,
सच तो ये है कि अपनी बेटियो के लिये-----
"उन पढ़ी-लिखि ढोंगी माँओ से ज्यादा,
अपनी इन बेटियो के लिये लड़ती है"।
सरकारी अमले की कारस्तानी तो और है,
जो महिला डाक्टर पैसे ले,
एबार्शन करवाने के लिये चर्चित है,
सुना है कि वही,
पुरे शहर की दिवालो पे-------------
"सेब द चाइल्ड लिखवा रही है"।

@@@भ्रूण हत्या को इंगित करती एक कविता।

रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर----222002 (उत्तर-प्रदेश)।
mo.no.-----7800824758

यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है।

Wednesday, 27 March 2024

(शेर)

आज फिर से मुहब्बत याद आई,
मौसम से पहले आँखो मे सावन सी बरसात आई,
लौट आ एै दिल फिर अपने शहर,
खिड़की,दरवाजे सब बिरान हुये कुछ इस तरह----
हमे आज तेरे छत की याद आई।

                     (मै शम्म-ऐ-चराग हूँ)
मै शम्म-ऐ-चराग हूँ खामोश हो जलुंगी!
ये घुटन है हासिल महज़ यहाँ शमा को,
बुझ जाऊँगी सहर से पहले,
वफा तो न मिली मुझको कही किसी महफ़िल
लेकिन फक्र है मुझे की बेवा हुई तो क्या ?
मैने शौहरे शहर को,
आखिरी लम्हे तक रौशनी तो दी,
बस इतनी खुशी लेके मै मौत से मिलुंगी,
हाँ! वादा रहा फिर भी मुझको जब भी जलाओगे,
हर एक सब पहले की तरह----------
मै हूबहू जलुंगी।
मै शम्म-ऐ-चराग हूं खामोश हो जलुंगी।

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर----222001(उत्तर-प्रदेश)।
mo.no.-----7800824758

कुछ रचना के शब्दो का अर्थ-------
सब------रात
सहर----सुबह।

(चूल्हा नही जलता)

(चुल्हा नही जलता)

तुम तो
बात-बात मे शहर जलाना जानते हो,
तुम्हारे पास तो
कौमो को जलाने का ईधन है!
पर यहाँ फाँकाकशी सोने नही देती,
पेट तो जलता है
ऐ,रंग---------
पर इस बस्ती मे अक्सर
चुल्हा नही जलता.

Tuesday, 26 March 2024

जोक

जिस दिवस या तारीख को आपकी शादी,,, आपके अनुकूल पति से हुई हो आप उस दिवस या तारीख को अपनी सुंदरता का 🌹🌹 "अंतर राष्ट्रीय मेकप दिवस"❤️♥️,,,मना सकती हैं😀😀

Monday, 25 March 2024

(मां की कोख आती है)

(माँ की कोख़ आती है)
हमारे शहर मे-----------
जेहनी बेहयाई मुस्कुराती है!
क्यूँकि ऐ,रंग----------
अस्पतालो मे अब कत्ल करवाने,
माँ की कोख़ आती है।

@@सेब द चाइल्ड।

Sunday, 24 March 2024

(साँवली मछेरन)

(साँवली मछेरन)
मै दिवाना हो गया हूँ,,,शंतनु की तरह,,,,
मुझे हर जगह दिख रही,,,,,,
ऐ,रंग----वे जाल फेकती हुई----
                         साँवली मछेरन।

(मंटो मर नही सकता)

(मंटो मर नही सकता)

जब तलक---
भूख की वेश्या,
काली सलवार पहने,
ग्राहक तलाशेगी!
ऐ,रंग----
तब तलक,
बदनाम मंटो--
मर नही सकता.

Friday, 22 March 2024

(नदी रो रही)

(नदी रो रही)
रोज लहू-लुहान हो रही-----
हमारे शहर मे नदी रो रही।
ये माँ थी हम बेवफा बेटो की----
आज जलिल हो रही।
ऐ,रंग--हमारे शहर मे नदी रो रही।

जल दिवस के संम्मान मे।

(राम)

(राम)
तेरी पीड़ा की प्रत्यंचा को------
सब खीच रहे है राम!
तेरी नगरी मे,
तुम्हें टेंट से ढक कर,
मंदिर यहीं बनायेंगे-----
बस चीख रहे है राम।
हर चुनाव के मुद्दे मे,
बस भुना रहे अयोध्या को,
कुछ न किया और कुछ न करेंगे,
सच तो ये है कि,
ये नकली भक्त है आपके सारे,
जो अपने-अपने स्वार्थ का चंदन-----
भर माथे पे टीक रहे है राम।
तेरी पीड़ा की प्रत्यंचा को------
सब खीच रहे है राम।

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर---222002 (उत्तर--प्रदेश)।
mo.no.----7800824758

(मां गंगा)

जल दिवस के उपलक्ष्य मे माँ गंगा की पीड़ा पे लिखि कविता--------
                    (माँ गंगा)
माँ गंगा----------
अब धरती पे रो रही है!
इसके बेवफ़ा बेटो मे अब,
भगीरथ का किरदार न रहा,
रोज शहर और घर के मैलो से पाट रहे,
उफ!अब गंगा अपने बेटो का प्यार नही,
बल्कि उनके हाथो मिला जहर----------
अपने अंदर शमो रही है,
माँ गंगा-----------
अब धरती पे रो रही है।
देखो इसी का असर है कि,
इसके पानी का पुरा बदन,
जहर से नीला पड़ता जा रहा,
तड़पती गंगा माँ,
अब बह नही रही----------
बल्कि अपनी लाश को बस धो रही है।
माँ गंगा----------
अब धरती पे रो रही है।

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर ---222002 (उत्तर--प्रदेश)।
mo.no.----7800824758

Thursday, 21 March 2024

(ट्रेन हादसे)

(ट्रेन हादसे)
हाई स्पीड़-बुलेट ट्रेन-अच्छे दिन,,,,,
सब ख्व़ाब से,,,,,
मै कैसे गुफ्त़गु करु हर लाश से,,,,,,
छुट गई कलम भी कंप-कपाके मेरे हाथ से।
आखिर कब तलक होते रहेगे,ऐ,रंग----
इस मूल्क़ मे ऐसे ट्रेन हादसे।

ट्रेन हादसे मे मरे हुये लोगो को मेरी श्रद्धांजली।
बिभूति भूषण झा,सर के कुशल संपादन की एक और बड़ी उपलब्धि लोगों के बीच लगभग आने को तैयार है जी हां वे कृति है "प्रभाती " जिसमें देश 70 रचनाकारो की काव्य रचनाओं का वृहद चयन किया गया है.

उन्हीं रचनाकारो में से एक हमारी रचना का भी चयन हुआ है, जिसके लिए मै बिभूति भूषण झा सर का दिल से आभार व्यक्त करता हूं.🌹🌹🙏🙏

Wednesday, 20 March 2024

(मां की तरह बात करती है)

(माँ की तरह बात करती है)
गर आँखे बांध के भी थमाओगे,
मेरे मूल्क की मिट्टी!
तब भी मै उसकी छुवन से पहचान जाऊँगा,
क्यूँकि ऐ,रंग---एकलौता है मेरा मूल्क,
जहाँ की मिट्टी भी-----------
माँ की तरह बात करती है।

(गीत)

(गीत)
गीत----------
केवल उर्वशी या शकुंतला नही!
ऐ,रंग----ये उस गरीब की पतीली भी है,
जिसमें कई रोज से-चावल पके नही।

(केदारनाथ सिंह एक श्रद्धांजिल)

(केदारनाथ सिंह-एक श्रद्धांजलि)
केदारनाथ------------
के साहित्य से यहां की मिट्टी बोलती थी,
शब्द-दर-शब्द का खाटीपन था,
पन्ने-दर-पन्ने उनकी किताबभर नही,
दोस्तो को लिखि उस दौर की-------
उनकी हर चिट्ठी बोलती थी।
लेकिन एक-एककर सब जाते गये,
और टुटता गया ये सिलसिला,
गाँव की उबड़-खाबड़ सड़के,
और उनके साथियो की तरह बिछड़े,
किनारे पड़े छिटके आँख नम किये-------
उस सड़क के यादो की गिट्टी बोलती थी।
लेकिन आज वे भी चले गये,
उनके जाने का रुंधापन और नम आँखे,
कह रही कि---------
उनके साहित्य का ये रितापन,
शायद फिर न भर सके।

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर--222002 (उत्तर-प्रदेश)।
mo.no.-----7800824758

Tuesday, 19 March 2024

(मकान से अच्छा)

(मकान से अच्छा)
वे अपनी तोतली जुबान से बोलता है----
किसी भी हिन्दू या मुसलमान से अच्छा।
मुझे बहुत खूबसूरत लगता है----------
वे गली मे नंगा खेलता बच्चा ।
क्या?करुंगा जा के मै मंदिर या मस्जिद में,
मुझे पता है कि---------
तुम बांध दोगे बंदिशो मे एक दिन इसे भी,
ये भी समझ जायेगा जाती और मज़हब,
और बन जायेगा ये खो के अपना बचपना,
हमारी गीता और तुम्हारे कुरान का बच्चा।
तब तलक तो तक लु इस मासुम से बच्चे को,
जो खुद मे खो बना रहा मिट्टी से एै"रंग"----
एक घर इस शहर मे हर मकान से अच्छा।

@@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.----7800824758

Monday, 18 March 2024

(तवायफ की कब्र है)

(तवायफ़ की कब्र है)
यहाँ चराग नही जलते,
कोई चादर नही चढ़ती!
ये शहर की मशह़ूर तवायफ़ की कब्र है।
आज भी करती है,ये रुहें मूज़रा,
फिर फूट के रोती है!
ऐ,रंग---बस आ जाते है खिज़ा में,
दरख्त़ो के चंद पत्ते------
आवारगी करने।
ये शहर की मशह़ूर तवायफ़ की कब्र है।

(नित नया अग्निपथ है)

(नित नया अग्निपथ है)
एै बीजेपी----------------
उत्तराखंड में तुम्हारी विजय का,
कल जो शपथ है!
वे महज शपथ ही नही,
बल्कि पहाड़ो की कठिनाईयो से भरी,
हर सड़क का------------
तुम्हारे लिये नित नया अग्निपथ है।
@@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.-----7800824758

धन्यवाद!दैनिक वर्तमान अंकुर,निर्मेश के त्यागी भईया और मेरे चुनावी कटाक्ष।

(मुसलमान है साहब)

(मुसलमान है, साहब)

ना ही , पूजा 
ना ही , किसी मस्जिद की ,
अजान है , साहब.

ये लड़की ,
इस दौर-ए-ग़ालिब की,
दीवान है , साहब.

बड़़े सलीके और 
तमीज़ से ,
लिखा है , कई रात ,
ये एक रात , हिन्दू
तो एक रात मेरी ,
गज़लों की , ----
मुसलमान है , साहब.

@ रंगनाथ द्विवेदी

Sunday, 17 March 2024

(मजहब होकर रह गई)

(मज़हब हो के रह गई)
हर रात लहू-लूहान सेज़ पे सोती है,,,
इसका शौहर----
इसकी ख्व़ाहिशो का कत्ल़ करता है।
ये मोहब्ब़त तलाशती है कतरा-कतरा,,,
वे मोहब्ब़त के लम्हो मे तकरिर करता है।
ऐ,रंग--वे यहाँ आई थी औरत होने-----
मज़हब होके रह गई।

तकरिर--धार्मिक भाषण।

(आईना रो दे)

(आईना रो दे)
मेरी आरज़ू का ऐ खूँ करने वाली,
खुदा करे!कल तेरे हाथो कि हिना रो दे।
तु जब सँवरने के लिये हो आईने के रुबरु,
मेरी वफ़ा का अक्स़ उभरे-----------
और तेरी कमीनगी पे आईना रो दे।

(कालेधन वाले कैश की तरह)

(कालेधन वाले कैश की तरह)
क्यू नही पकड़े गये मुज़रिम प्रदेश मे-----
आजम खाँ के भैंस की तरह।
क्यू नहीं किया कुछ आखिर--------
मोदी के उज्वला गैस की तरह।
मुआफ करना अब जनता देख रही है,
एै"रंग" सभी के करतूत---------
कालेधन वाले कैश की तरह।
@@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.-----7800824758

धन्यवाद!आपका निर्मेश के त्यागी भईया,दैनिक वर्तमान अंकुर और मेरे चुनावी कटाक्ष।

Saturday, 16 March 2024

(कलम तोड़ दी है)

(कलम तोड़ दी है)
मोहब्बत के---
ताजिराते हिंद की दफा से,,
वे बचती रही है।
हमने पहली दफा ये,वहम तोड़ दी है,,
ऐ,रंग--उन्हे बेवफा लिखके कलम तोड़ दी है।

(लोरियां होती)

(लोरियाँ होती)
बचपन होता---------
बचपन की चोरियाँ होती!
माँ!मै शुकून से सोता,
इस पत्थर के शहर मे!
अगर तु होती--------
और तेरी लोरियाँ होती।

(राजनाथ आ गए)

(आदरणीय राजनाथ आ गये)
उत्तराखंड के केदारनाथ आ गये,
चुनाव मे मोदी जी---------------
प्रचार करते-करते काशी विश्वनाथ आ गये।
उन्हे नाथो से लगाव है शायद तभी तो,
कभी भाजपा की प्रदेश मे लुटिया डुबाने वाले,
सुना है सियम(C M) की दौड़ मे एै"रंग"----
हमारे आदरणीय राजनाथ आ गये।
@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.-----7800824758

धन्यवाद!निर्मेश के त्यागी भईया,दैनिक वर्तमान अंकुर और मेरे चुनावी कटाक्ष।

Friday, 15 March 2024

(छापा था)

(छापा था)
कल की होली में------------
कही गम तो कही सियापा था!
एक नेता रो रहे थे-----------
तक के अपनी तनहा कुर्सी,
जिसके आस-पास भीड़ थी,
पर हाय!रे चुनाव-----------
तुने बख्श़ा नही,जबकि घोषणापत्र में हमने
एै"रंग"--------------
सब कुछ कर डालेंगे एैसा छापा था।
@@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.-----7800824758

धन्यवाद!आपका निर्मेश के त्यागी भईया,दैनिक वर्तमान अंकुर और मेरे चुनावी कटाक्ष का।

(घुंघरू बांधती थी)

(घुँघरु बांधती थी)
रईसो के दरमियां वे सलिके से जाती थी,
कभी ठुमरी,कभी दादरा गाती थी।
ऐ,रंग--वे पाक थी कोठे पे सुना है-----
कि केवल!वे पाँव मे घुँघरु बांधती थी।

(अपनी लटो को)

(अपनी लटो को)
अपनी लटो को----
चेहरे पे आने ना दिया करो,,,
बड़ी जलन होती है------
जब ये तुम्हे चुमते है।

Thursday, 14 March 2024

(शराबी आचमन है)

(शराबी आचमन है)
ये जो तेरा अल्हड़ बाकपन है,,,
कशीश है शायर का----
ऐ,रंग--कवि का------
शराबी आचमन है।

(गौरैया)

(गौरैया)
याद करो बचपन--------
वे फुदक के!चहक के!कितना बहलाती थी!
एक बेटे की तरह।
ऐ,रंग-------गौरैया
केवल हमारे छत की चिड़ियाँ नही,
आज रुठ गई!
जो कल हमारी माँ थी।

(याद तुम्हारी नही गई)

(याद तुम्हारी नही गई)
अभी तलक याद तुम्हारी नही गई,
वे पिंक से सूट मे तुम्हे देखना,
जैसे अभी कल की बात हो,
तुम गई तो बेशक---------
पर मेरी जेहन में ज्यो की त्यो तुम आज भी हो,
तुम्हारी कसम मौसम बदले,साल बदला
लेकिन तुम्हें चाहते रहने कि--------
मेरी खुमारी नही गई,
अभी तलक याद तुम्हारी नही गई।
वे पतझड़ की हवा,
और उनकी शाखो से गिरते पत्ते,
और तुम्हारे कालेज से छुटने का वे वक़्त,
जब तुम्हारे खुले बाल,
हवाओ से इधर-उधर बिखर जाते थे,
फिर उन्हे तुम अपनी नाज़ुक अँगुलियो से,
जब पिछे की तरफ करती थी,
वे मेरा तुम्हे देखने का खूबसूरत लम्हा था,
मै आज भी उसी लम्हें से मोहब्बत करता हूँ,
सच तो ये है कि----------
बिना तुम्हारी याद के हमसे,
कोई दिन या रात गुजारी नही गई!
अभी तलक याद तुम्हारी नही गई।

@@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.-----7800824758

Wednesday, 13 March 2024

(प्यार की रेसिपी)

(माँ के प्यार की रेसिपी)
मै आज भी खाता हूँ रेस्टोरेंट और---
बीबी का पकाया,,
पर ऐ,रंग--भूख नही मिटती।
शायद वे मिला नही पाती खाने मे----
माँ के प्यार की रेसिपी।

(बंजारन)

(बंजारन)
मेरी जिंदगी मे आई थी कभी-----
एक खानाबदोश बंजारन।
उसकी कत्थई आँखो को यादकर,
मै लिखता गया,लिखता गया,
न जाने कब-----
एक मुकम्मल किताब बन गई!
ऐ,रंग--------
वे खानाबदोश बंजारन।

(हाथी चली गई)

(हाथी चली गई)
पंजा चला गया और साइकिल चली गई,
पुरे प्रदेश मे करिश्मा हुआ--------------
यादव चले गये कुछ जाती चली गई।
हाय!रे चुनाव और मतदान की आँधी,
कि माया रो रही हैं कह के,
कि ईवीयम के नाते एै"रंग"--------
उनके उम्मीद की हाथी चली गई।
@@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.-----7800824758

धन्यवाद!दैनिक वर्तमान अंकुर,निर्मेश के त्यागी भईया और मेरे चुनावी कटाक्ष।

(पिया आ जाओ)

(पिया आ जाओ)
होली मे दुखे है अंग-अंग------
कि पिया आ जाओ!
भरो पिचकारी से रंगो अंग-अंग-------
कि पिया आ जाओ।
छेड़ो मै छिटकु,भागु फिर पकड़ो,
मै शर्माऊ तेरे सीने से लग,
जीऊँ मै होली के सारे उमंग,तेरे संग-----
कि पिया आ जाओ।
फिर हँसे अँगना और मोरा कंगना,
नथिया करे ननद सी शरारत,
मै हारु तुम जीतो,ये होली की जंग------
कि पिया आ जाओ।
नयनो मे सब कुछ,नयनो मे मदिरा,
आँचल मे महुवा,
और साँसो में महके अमवा की बौर,
कुके है चोली मे कोयल,
कि होली मे सिसके ना हमारी पलंग-----
कि पिया आ जाओ।
@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.-----7800824758

धन्यवाद!मध्यप्रदेश से प्रकाशित साप्ताहिक समाचारपत्र अकोदिया सम्राट जो आपने होली पे लिखी रचना को प्रकाशन का स्नेह दिया।

(नेताओं का घर)

(नेताओ का घर)
मुझे नेताओ का घर---------
अब चकलेवालियो के घर से ज्यादा,
नापाक लगने लगा है।
कोई चरित्र नही इनके बिकने और गिरने का,
मुखौटे-दर-मुखौटे लपेटे,
मुझे नेता अपने जिस्मानी गलिज़गी का,
किसी चकलेवालि के ग्राहक फासने वाले दल्ले-----
से ज्यादा घिनौना दलाल लगने लगा है।
सच अब बड़ी पिड़ा होती है वोट देते,
क्योंकि एै "रंग"-------
अब हमारे सदन की सिढ़ियो की तरफ बढ़ता नेता,
उन पवित्र सिढ़ियो का बद्नुमा दाग लगने लगा है।
मुझे नेताओ का घर--------
अब चकलेवालियो के घर से ज्यादा,
नापाक लगने लगा है।

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर----222002(उत्तर--प्रदेश)।
mo.no.----7800824758

Monday, 11 March 2024

(मां की दुआ आती है)

(माँ की दुआ आती है)
मै घंटो बतियाता हूँ माँ की कब्र से,
ऐ,रंग----ऐसा मुझे लगता है कि!
जैसे इस कब्र से भी----------
मेरे माँ की दुआ आती है।

(बीजेपी का फगवा है)

(वीजेपी का फगवा है)
किसी की खुशी छिन गई,
किसी की अगवा है!
इस फागुन मे कोई नेता---------
सुहागिन तो कोई विधवा है।
बुरा ना मानो होली है एै"रंग",
यानि की एक तरफ मगहर,
तो एक तरफ काशी की ठंडई के साथ----
बीजेपी का फगवा है।
@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.----7800824758

धन्यवाद!दैनिक वर्तमान अंकुर,निर्मेश के त्यागी भईया और मेरे चुनावी कटाक्ष।

(आओ जिहाद करे)

(आओ जिहाद करे)
बेटे और बेटियाँ-----
माँ-बाप की मोहब्ब़त को याद करे।
ना कत्ल हो,ना शहर जले,
ऐ,रंग--हम जिस्मानी हवस के खिलाफ--
आओ जिहाद करे।

(उपले जला रही थी)

(उपले जला रही थी)
कल जिस अखबार मे छपी थी-तिरंगे की तस्बीर,
ऐ,रंग----उसी अखबार से गरीबी,
अपने तीन दिनो से ठंड़े-----------
चूल्हे के उपले जला रही थी।

Sunday, 10 March 2024

(गाजीपुर टूट जाता है)

(गाजीपुर टुट जाता है)
ऐ सियासत जब तेरी गलिज़गी से,,
कोई दहशत-ए-मसर्रत छुट जाता है।
तु बस सदन मे चीखता है,,
ऐ,रंग----यहाँ गहमर और------
गाजीपुर का हौसला टुट जाता है।

कश्मीरी अलगाव वादी दहशत गर्द के छोडने पे।

मजाक

आजकल तीस प्रतिशत पत्नियों के शहारुख खान 😀😀😀😀

कुछ कुत्ते तो बेडरूम में इमरान हाशमी से भी ज्यादा सुखी हैं,,,,,,

इसलिए आप आपनी मल्लिका शेरावत को भूल कर भी कोई कुत्ता ना दिलाए 😀😀😀😀

(गठबंधन का अहम रोल है)

(गठबंधन का अहम रोल है)
सच्चाई साबित है याकि गोल है,
एक मर्तबा फिर से तिलिस्मी अपने प्रदेश का------------
ऐग्जिट पोल है।
सभी कह रहे अपनी रंगीन होली,
जबकि फाग वाले नेता जीत को आश्वस्त नही,
क्योंकि मिड़िया में लंगड़ी सरकार बनेगी,
यानि कि इस मर्तबा एै"रंग"-----------
गठबंधन का अहम रोल है।
@@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.-----7800824758

धन्यवाद!दैनिक वर्तमान अंकुर,निर्मेश के त्यागी भईया और मेरे चुनावी कटाक्ष का।

Friday, 8 March 2024

(बच्चा पाल रही हूं मैं)

(बच्चा पाल रही हूँ मै)
इस सुंदरतम सृष्टि को आहूति----
डाल रही हूँ मै,,
दोज़ख मे अपने नन्हा सा-----
एक बच्चा पाल रही हूँ मै।
देगा मुझको अपना ही कोई गाली,,
ये नाज़ायज फिर भी ,रंग----
कुम्हार की मिट्टी सा-----
इसको ढ़ाल रही हूँ मै।
इस सुंदरतम,सृष्टि को आहूति डाल रही हूँ मै----
दोज़ख मे अपने नन्हा सा----
एक बच्चा पाल रही हूँ मै।

महिला दिवस पे मेरी लंबी कविता की शुरुआती लाईने।

(पति के हाथ से जली)

(पती के हाथ से जली)
कभी मिट्टी के तेल तो कभी तेज़ाब से जली,
औरत सीता भी हुई तो आग से जली।
ये दुनिया मर्दें शहर है आज भी,
गर मासुम सजी-सँवरी भी तो ऐ,रंग-----
अपने पती के हाथ से जली।

(महिला दिवस हूं)

(महिला दिवस हूँ)
ना मज़लूम ना ही किसी से विवश हूँ,
मै खुद मे हू सक्षम,
और खुद मे जीवट हूँ।
मै भी खड़ी हूं------------
अब सदन से सड़क तक,
एै"रंग"बुथ पर मैं मतदान करती--------
इस लोकतंत्र की महिला दिवस हूँ।
@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.------7800824758

Thursday, 7 March 2024

(वोट में रहअ)

(वोट में रहअ)
चाहे धोती-कुर्ता चाहे कोट मे रहअ,
ई बनारस हौ तनी लंगोट मे रहअ।
हमन त रोजै दंड पेली ला अखाड़े मे,
न ललकार हमन के ताव आई जाई,
तु नेता हऊव चुनाव लड़,
अऊर खाली अपने औकात------
अऊर वोट में रहअ।
@@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.-----7800824758

धन्यवाद!दैनिक वर्तमान अंकुर,निर्मेश के त्यागी भईया और मेरे चुनावी कटाक्ष।

(टूटी चूड़ी)

(टुटी चुड़ी)
तेरे पहले छुअन से टुटी चुड़ी को,
मैने अब तलक संभाल रंखा है----
जब तु नही आता कई राते---
तो मै उसी से बात करती हूँ।

(नीलकंठ हूं)

(नीलकंठ हूँ)
छक के पिया है-------
हमने भी तमाम हालातो का ज़हर!
ऐ,रंग------------
मै भी अपने दौर का नीलकंठ हूँ।

@@@@हर हर महादेव।

(खूबसूरत औरत नही देखी)

(खूबसुरत औरत नही देखी)

माथे पे चुह-चुहाता पसीना,
कमर पे खुशी साड़ी!

और सर पे सीमेंट की भदेली,
श्रम की मादक चाल!

ऐ,रंग---
मेरी कविता ने कभी--
इतनी खूबसुरत औरत नही देखी।

Wednesday, 6 March 2024

(अब्बू ने लगाया था)

(अब्बु ने लगाया था)
हर चोट पे------------
चिखेगी तुम्हारे माँ की मोहब्बत।
क्यूॅकि ऐ,रंग----इस बुढ़े दरख्त़ को------
तेरे अब्बु ने लगाया था।

(बनारस क अड़ी हौ)

(बनारस क अड़ी हौ)
मत बोला----------------
तोहार चुनाव त रजा भांग नियर चढ़ी हौ!
चांप कर जितब भयवा--------
काहे के कि फागुन मे सपा से जवन भऊजी खड़ी हौ,
हमन के मोहब्बत के लोकतंत्र से बड़ी हौ,
मोदी की एैसी की तैसी हो जाई,
जा मस्त रह ई फक्कड़न क शहर हौ,
सब के जिताईला अऊर हराईला,
एै"रंग" हर-हर गंगे तोहऊ कहिला-------
ई बनारस क अड़ी हौ।
@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.------7800824758

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Monday, 4 March 2024

(राम को)

(राम को अल्लाह कहता हूँ)
फकिरी तबियत है--------
मै मस्ज़िद में नमाज पढ़ता हूँ!
बस फर्क ये है ऐ,रंग---------
मै राम को अल्लाह कहता हूँ।

(आओ जिहाद करे)

(आओ जिहाद करे)
बेटे और बेटियाँ-----
माँ-बाप की मोहब्ब़त को याद करे।
ना कत्ल हो,ना शहर जले,
ऐ,रंग--हम जिस्मानी हवस के खिलाफ--
आओ जिहाद करे।

(शबे महफिल)

(शबे भहफ़िल)
बेशक लौट जाना तुम सहर से पहले,
ऐ मेरे कातिल!
पर मै टुट के गाऊँगा कल के मुशायरे में,
है दिली ख्व़ाहिश कि तुम सामने रहना,
तुम नही मिली तो गम नही--
बस बीना आँसुओ के रोना चाहता हूँ,
कल मै शबे महफ़िल।

(जलील चुने)

(जलील चुने जायेंगे)
कहाँ गरीब मुसहर,कौल या भील चुने जायेंगे,
ये विचित्र चुनाव है---------------
इसमें कौवे,गिद्ध और चील चुने जायेंगे।
एै"रंग" शरीफ़ और शराफ़त गई तेल लेने,
यहाँ तो बिहार के मंत्री की तरह------
कुछ हमारे भी प्रदेश से जलील चुने जायेंगे।
@@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.-----7800824758

धन्यवाद!आपका दैनिक वर्तमान अंकुर,निर्मेश के त्यागी भईया और मेरे चुनावी कटाक्ष का।

Sunday, 3 March 2024

(उपले जला रही थी)

(उपले जला रही थी)
कल जिस अखबार मे छपी थी-तिरंगे की तस्बीर,
ऐ,रंग----उसी अखबार से गरीबी,
अपने तीन दिनो से ठंड़े-----------
चूल्हे के उपले जला रही थी।

(सिलेंडर महंगा हो गया)

(सिलेंडर महंगा हो गया)
हमारा अच्छा दिन--------------
न जाने किस अँधेरे मे खो गया,
जिसको बनारस की गंगा माँ ने बुलाया था---
हाय!उसको न जाने क्या हो गया?
एै"रंग" दो चरण बाकी है चुनाव का,
समझ लो अभी से--------------
हमारी किचन का सिलेंडर महंगा हो गया।
@@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.------7800824758
धन्यवाद!दैनिक वर्तमान अंकुर,निर्मेश के त्यागी भईया और मेरे चुनावी कटाक्ष का।

(जवान हुई)

(जवान हुई)
कैसे निखरते------------
किसी मजदूर बाप की बिटिया के अंग,
इसके पेट और नाभी का पिचकापन,
गर पढ़ सके तो पढ़,
अरे ये वो पगली है------------
जो आधे से ज्यादा फाकाकसी मे जवान हुई।
रातभर खाँसती माँ के सिरहाने बैठी रही,
दवा की खाली शीशी का दर्द पूछ इससे,
एक झपकी का इसके झोंका भी टूट गया------
ये एैसी ही गुजरी रातो मे जवान हुई।
बापु के काम से लौटने के पदचाप की पीड़ा,
का असह्यपन जानती है!
फिर भी मूक और मौन है,
अंदर ही अंदर बेटी को न व्याह पाने का सुलगापन क्या है?
ये जानती है!
तभी तो कभी सजी-सँवरी नही ना आईना देखा,
एै "रंग" ----------
ये एैसे ही अभागेपन मे जवान हुई।

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर---222002 (उत्तर-प्रदेश)।
mo.no.-----7800824758

(लव जिहाद में मारी गई)

(लव जिहाद में मारी गई)

✍️✍️पहले मोहब्बत
फिर---
वालिदो की याद में मारी गई,

वे लड़की
अंधी थी,ना ही पागल
जिस आगोश में लेटी
उस आगोश में मारी गई

मेरे देश
की लडकियों 
देख के सबक लो
कि क्यो तुम्हारे कौम की लड़की
कभी "दिल्ली"
तो कभी "धनबाद" में मारी गई.

उफ़!
ये कैसी मोहब्बत है 
तेरे यहां,,,
ए इस्लाम के आलिम फाजिल
कि एक हिंदू लड़की
फिर किसी
मुस्लिम लड़के के हाथों-
"लव जिहाद" में मारी गई.😥😥😥😥

रचयिता--रंगनाथ द्विवेदी 
जनपद जौनपुर उत्तर प्रदेश.

""""इसका उद्देश्य किसी को आहत करना नही है आप सार्थक और तर्कपूर्ण तरीके से अपनी टिप्पणी कर सकतें है समया भाव में बेशक जवाब ना दे सकू लेकिन पढूंगा मन से क्योंकि हो सकता है कि मैं गलत होऊ"""""

Saturday, 2 March 2024

(उपले जला रही थी)

(उपले जला रही थी)
कल जिस अखबार मे छपी थी-तिरंगे की तस्बीर,
ऐ,रंग----उसी अखबार से गरीबी,
अपने तीन दिनो से ठंड़े-----------
चूल्हे के उपले जला रही थी।

(प्यार को खतरा है)

(प्यार को खतरा है)
ईद,होली त्योहार को खतरा है,
मंदिर-मस्जिद की मीनार को खतरा है!
लड़ जायेंगे------------
शहर के शहर गर इनकी चली तो,
एै"रंग" यहाँ मुसलमान की मोहब्बत और---
हम हिन्दूओ के प्यार को खतरा है।
@@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.-----7800824758

धन्यवाद!आपका दैनिक वर्तमान अंकुर,निर्मेश के त्यागी भईया और मेरे चुनावी कटाक्ष का।

Friday, 1 March 2024

(सरकार भली नही आती)

(सरकार भली नही आती)
धोखा है फोरलेन---------
हमारे शहर में तो बिना गंड्ढे के,
कोई गली नही आती।
गाँव तकता है आज भी पूछो किसान से---
सिंचाई के वक़्त उसके बिजली नही आती!
क्या अखिलेश?क्या मोदी?,
सब हमाम के नंगे है एै"रंग" वरना,
हमारी क़िस्मत मे सालो से अब------
कोई भी सरकार भली नही आती।
@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.------7800824758
धन्यवाद!दैनिक वर्तमान अंकुर,निर्मेश के त्यागी भईया और मेरे चुनावी कटाक्ष का।