Wednesday, 17 June 2026

तुम चिट्ठी हो

मैं खत हूं 
तुम चिट्ठी हो 
कभी पढ़ा मैंने तुमको 
कभी पढ़ा तुमने मुझको 
चौबीस वर्ष का साथ हमारा 
पर लगे कि जैसे तुम मुझको 
जन्म-जन्म मिलती हो 
मैं खत हूं 
तुम चिट्ठी हो.

Tuesday, 16 June 2026

तुम हिंदुत्व की कोढ़ हो

(तुम हिंदुत्व की कोढ़ हो)

तुम 
हमारे हिंदुत्व की कोढ़ हो 
नीच हो,निकृष्ट हो 
पतित और घृणित हो.

तुम्हारी वजह से राम की मर्यादा 
अयोध्या में तार-तार हुई .
लोग हस रहे 
शबरी की भक्ति 
सीढ़ियों पर बैठी रो रही .

तुम पापी हो 
उसकी आस्था के जूठे बेर 
राम ने खाये थे 
तुम 
उसकी राम भक्ति की सीढ़ियों पर चढ़े 
पहले अछूत और दलित हो.

तुमसे 
और तुम्हारे संस्कार से श्रेष्ठ 
रावण था 
जिसने कुल उद्धार किया 
लेकिन तुम कुलनाशी हो
किसी वैश्या के धंधे से उठी खांसी हो .

तुम पहले ऐसे शख्स हो
जिस पर मेरी
थूकने की इच्छा हो रही 
लेकिन थूकूंगा नहीं 
क्योंकि प्रभु श्री राम की अयोध्या 
और सरयू पवित्र है.

लेकिन ओ मंदिर के दान 
और उसके चढ़ावे के चोर,चंपत 
मैं तुम्हारी लाश पर 
कुछ कुत्तों को 
पेशाब करते हुए 
किसी जटायु की तरह देख रहा हूं 
भगवान करे कि 
तुम्हारी इस राष्ट्रीय दुर्गति से 
लोग कुछ सीखे
और सरकार भी शिक्षित हो 😥😥

✍️✍️सादर क्षमा के साथ क्योंकि राम केवल हमारी आस्था का नाम मात्र ही नहीं बल्कि हमारा वह संस्कार हैं जो सृष्टि की आखिरी सांस की लाश के पीछे भी प्रतिध्वनित होगा कि "राम नाम सत्य है"🙏🙏

रंगनाथ द्विवेदी 
जज कॉलोनी,मियाँपुर 
जिला-जौनपुर 222002 (U P)
rangnathdubey90@gmail.com

Saturday, 13 June 2026

नावेल सी हो गई है

(जिंदगी मेरी नावेल सी हो गई है)
जिंदगी मेरी नावेल सी हो गई है,
जिसे मोड़कर कई दिनो से यूँही रख दिया है,
कि समय मिलते ही फिर उस पृष्ठ को खोल पढ़ुगा,
अपने जीवन के हूबहू घटनाओ की वे तमाम बाते,
यानी की गतांक से आगे---------------
जिंदगी मेरी नावेल सी हो गई है।
तमाम उठा-पटक झंझावतो का जीवन,
कही कोई विदेशी रोमांटनिजम नही,
एक विछोह,एक दर्द,
हर पृष्ठ के कथनांक के आगे--------
जिंदगी मेरी नावेल सी हो गई है।
इसी मोटी सी किताब को,
कुछ लोग लुगदी साहित्य कह,
यू छिटक जाते है जैसे मंटो की भूखी नायिका,
अपने से ज्यादा नंगो को देखती है,
अपनी काली सलवार और कपकंपाती टाँग के आगे-----
जिंदगी मेरी नावेल सी हो गई है।
कुछ पन्ने और बचे है पढ़ने को,
कल खत्म कर लुंगा इसे भी,
और बिना मोड़े रख दुंगा,
फिर इच्छा ही नही बचेगी इसके पढ़ने की,
क्योंकि पता चल जायेगा कि क्या कुछ लिखा है,
एै"रंग" इस नावेल मे गतांक से आगे-------
जिंदगी मेरी नावेल सी हो गई है।

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)।
mo.no.-----7800824758

Thursday, 11 June 2026

पपीहा

पपीहा मुँआ


मेरी पीर बढ़ाये पपीहा मुँआ,
वे भी तो तड़पे है मेरी तरह,
वे पी पी करे और मै पी पी पिया।
मेरी पीर बढ़ाये पपीहा मुँआ।
वे रोये है आँखो से देखे है बादल,
मै रोऊँ तो आँखो से धुलता है काजल,
वे विरहा का मारा मै विरहा की मारी,
देखो दोनो का तड़पे है पल-पल जिया,
मेरी बढ़ाये पपीहा मुँआ।
हम दोनो की देखो मोहब्बत है कैसी?
वे पीपल पे बैठा मै आँगन में बैठी,
की भुल हमने शायद कही पे,
या कि भुल हमने जो दिल दे दिया,
मेरी पीर बढ़ाये पपीहा मुँआ।
चल रे पपीहे हुई शाम अब तो,
ना बरसेगा पानी ना आयेंगे ओ,
मांगो ना अब और रब से दुआ,
मेरी पीर बढ़ाये पपीहा मुँआ।

###दैनिक समाचार पत्र सच का हौसला मे इस रचना को स्थान देने के लिये वंदना दी का शुक्रिया ।

लव जिहाद

(लव जिहाद नहीं )

जिस 
लड़के और लड़की को
अपने वालिदो की मोहब्बत याद नही,
वे हवस है
लव जिहाद नही.

ये महज दो जिस्मों की,
इजाजत-ए-हम बिस्तरी है 
इसी से इस रिश्ते की,
कोई उम्र या कोई मयाद नही,
ये हवस है
लव जिहाद नही .

ये कत्ल
ये लाश के टुकड़े
इबलिश-ए-ख्वाहिश के अंजाम है 
इसमें,
किसी रिश्ते की मुहर नही
ये एक आह! है
मैय्यत है,मातम है
बेरहमी है
यहा, कोई फरियाद नही
ये हवस है
लव जिहाद नही.

यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है.

रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियापुर
जिला-जौनपुर 222002 (U P)

फेसबुक की प्रेम कविताएं

😀कुछ महिलाएं जो दिनभर अपनी सुंदर फोटो के साथ फेसबुक पर प्रेम कविताएं लिख रही है💘आप उनमें से,किसी एक के पति को देख ले तब आपको पता चलेगा कि "फेसबुक की प्रेम कविताएं मौलिक नहीं है" 😀😄

टिप्पणी

✍️✍️राजनीति बहुत ही पतित हैं इसका चाल चलन और चरित्र दोमुंहा हैं इसके लिए जाति और वोट महत्वपूर्ण हैं व्यक्ति का अपराध नहीं 😢😢