Wednesday, 26 February 2025

(श्री देवी मर गई)

हिंदी सिनेमा की अमिट सुंदरी को हमारी श्रद्धांजलि 🌹🌹🌹🌹.

 (श्रीदेवी मर गई)

श्रीदेवी आज तु---
लाइट,ऐक्सन,कैमरा 
यानी सबको तन्हा और,
विरान कर गई.

देखो हमारी भीगी नम आँखे--
हम कोई ऐक्टिंग नही करते,
इसमे आज तेरे 
निभाये हर किरदार की वे
हर एक सुरत उतर गई.

तु क्या जाने कि तेरे जाने से,
हमारी मुहब्बत के 
दरख्त़ो के सारे महबूब पत्तो को,
तु दर-बदर-कर गई.

हो सकता है कि 
इन दरख़्तो पे लगे फिर नये पत्ते,
फिर पहले सी बहार आये,
लेकिन तु क्या जाने कि 
किस तरह तेरे जाने से,
हमारे दौरे शाख की बुलबुल,
हमेशा कि खातिर 
हमारे मुहब्बत के शाख से उड़ गई.

शायद आसमां पे भी खुदा को,
अपनी सिनेमा की खातिर 
तेरे जैसे किरदार की जरुरत थी,
शायद आज इसी से-
तु हमसे और हमारे जैसे तमाम 
चाहने वालो से बिछड़ गई।
सच यकीन नही हो रहा 
ए "रंग" आज-----
की हमारे दिल 
और हमारे सिनेमा की श्रीदेवी मर गई.

रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी.
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर---222002(u p).

(पाक उड़ा आए)

(पाक उड़ा आये)
तुम्हारी शहादत के बदले--
हम पाक उड़ा आये।
उनकी ईंट से ईंट बजा---
हम ख़ाक उड़ा आये।
फ़क्र है, हमें अपने तिरंगे पे,,
इसकी आन की ख़ातिर,,
ऐ"रंग"--हम उन्हीं के घर में-----
उनकी नाक उड़ा आये।।

जय हिंद की सेना।🇮🇳
रंगनाथ दुबे।

(साहित्य अमृत)

हिंदी साहित्य की उत्कृष्ट मासिक पत्रिका "साहित्य अमृत" के मार्च-2023 के अंक में प्रकाशित मेरी कहानी "पुनर्मिलन" जो मोहब्बत और प्यार के नए आयाम को छूती है.

इसे विश्व पुस्तक मेले में नृपेन्द्र अभिषेक नृप भाई ने खरीदी और मुझे इसकी जानकारी भी दी उनका भी लेख इस बेहतरीन अंक में शामिल हैं ऐसे में अपने साथ उन्हें भी पढ़ने की जो खुशी मिलेगी सो अलग.

वैसे इस पत्रिका के संस्थापक संपादक पंडित विद्यानिवास मिश्र जी थे जो खुद हिंदी साहित्य के युग प्रणेता साहित्य लेखकों में अग्रणी थे,,,,बाकी बाते लेखकीय प्रति मिलने पर एक बार पुनः सभी वर्तमान संपादक मंडल का बहुत- बहुत धन्यवाद ✍️✍️✍️✍️

(फागुन फ्लेवर का महीना है)

(मोहब्बत के फ्लेवर का महीना है)

यह गुनगुने मिजाज 
और तेवर का महीना है ,
वह देखो सज रही है,
घंटो दर्पण के सामने,
यह उसके पिया के दिए,
जेवर का महीना है.
भाभी टटोलती है 
ननद और देवर को,
ऐ,रंग--
इस देश मे फागुन--
मोहब्ब़त के फ्लेवर का महीना है.

(पंकज उधास)

(मिट्टी आ गई)

फरिश्तों ने जो लिखी थी
वे चिट्ठी आ गई 
चल तेरे खाक में 
मिलने की मिट्टी आ गई.

ना रो दरख्तों पर,
ना शाख पर
यहां सबको टूटना है
बिछड़ना है
यही चलन है.

सभी ने देखा है 
कि खिजा के बाद
उन्ही महबूब 
दरख़्तों की शाख पर 
फिर से,
बहारों की 
नई पत्ती आ गई.

चल तेरे खाक में 
मिलने की मिट्टी आ गई.

Tuesday, 25 February 2025

(दो घाव हो गए)

(दो घाव हो गए )

जिन उरोजों को ढ़क,
वे मासूम देखती थी,
कभी वात्सल्य का सपना,
ए "रंग "
उसके वही दोनों उरोंज,
गरीबी के चलते-----
दो घाव हो गए.

Monday, 24 February 2025

(बसंत हूं)

( बसंत हूं )

मै रोज लद उठती हूँ"
आम के बौर सी,

गुलाबी शर्म ओढ़े!
ऐ,रंग--
मै अपने पिया के कमरे की
"बसंत हूं "

(उम्र की किताब)

(उम्र की किताब)

पुरे बदन में--
झुरझुरी सी उठ रही,

हे सखी!
बसंत पढ़े छेड़-छेड़,
मेरे उम्र की किताब.

Saturday, 22 February 2025

एक आवारा शाम हूं

(एक आवारा शाम हूं )

धुँधला जाते है
एै "रंग"----------
मेरी आगोश मे चेहरे,
मै शरीफ़ो के शहर की----
एक आवारा शाम हूं.

(हर साल खिलती है)

(हर साल खिलती है)

जो लगाई थी तुमने ,
कह के अपनी मोहब्बत की निशानी,
वे गुलदाउदी 
तुम्हारी तरह 
हर साल खिलती है.✍️✍️

Thursday, 20 February 2025

हिंदी साहित्य में

"हिंदी साहित्य में--
स्त्री विमर्श के नाम पर,
मेरी साहित्यिक देह के साथ,
पुरुष साहित्यकारों से,
कही ज्यादा,
महिला साहित्यकारो ने----
मेरी साहित्यिक देह का,
शाब्दिक बलात्कार किया है " 😢😢

(अमीन सयानी)

ऐ वक्त––
अपनी शहनाई
और साज रख दे!

माथे पे इसके 
तू अपना हाथ रख दे !

इस रेडियो के "जफर" ने 
ताजिंदगी आवाज दी है
इसके सिरहाने
"गीतमाला" ना सही 
तो तू 
किसी के सिसकने कि
आवाज रख दे .

अलविदा अमीन सयानी 😢😢🙏🙏

(औरत दर्द की मीना कुमारी है)

(औरत दर्द की मीना कुमारी है)

औरत प्यार मे
इस कदर डुब जाती है,
कि वार देती है खुद को,
फरेब की बाँहो मे।
फिर रोती बहुत है--
तन्हाई-घुटन जीती है,
बनके सुलगती है गीली लकड़ी,
ऐ,रंग--
औरत दर्द की मीना कुमारी है।

विश्व हिंदी संकलन

विश्व हिंदी सचिवालय मॉरीशस के 2023 के अंक में मेरी कहानी के शामिल होने की सूचना पत्रिका परिवार की तरफ से मिलना मेरे लेखन के लिए एक गौरव की बात है सर्वाधिक प्रसन्नता इसलिए भी है कि इसमें भारत के साथ ही विश्व दुनिया के तमाम ख्वातिलब्ध और वरिष्ठ लेखक भी शामिल है जिन्हें अभी तलक मैं केवल पढ़ता रहा हूं कभी सोचा नहीं था कि उनके नाम के साथ हमारी भी कहानी आएगी✍️✍️🙏🙏

आदरणीय महोदय/महोदया,

विश्व हिंदी साहित्य 2023 में आपकी रचना प्रकाशित हुई है, जिससे विश्व के पाठकों को बहुत लाभ हुआ है। इस पत्रिका हेतु अमूल्य लेखकीय सहयोग प्रदान करने के लिए विश्व हिंदी सचिवालय की ओर से आपके प्रति आभार व्यक्त किया जाता है।

साझा संकलन

मुझे आज फिर से फेसबुक ने याद दिलाया कि इस बेहतरीन संकलन में मेरी भी तीन रचनाएं शामिल है✍️✍️

देश के 51 कवियों के इस बेहतरीन संकलन 
में मेरी भी तीन कविताओं को शामिल करने के लिए एक बार पुनः मैं इस पुस्तक की संपादक माधुरी विभूति भूषण झा जी का बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं 🌹🌹🙏🙏

Monday, 17 February 2025

चांदनी रात

आज अपनी जीवन संगिनी के जन्मदिन पर----

मैं अपनी हार, तेरी जीत लिख दूं.
तु कहे तो –
इस कायनात की हर शै में, मैं प्रीत लिख दूं.
तुम्हें पढूं 
और पढ़ते-पढ़ते खो जाऊं इस कदर 
कि खुद को तुम्हारी सांस का "नीरज"
और तुम्हारे चेहरे को
चांदनी रात लिख दूं.

रंगनाथ द्विवेदी
संग
जीवन संगिनी✍️✍️✍️✍️✍️

Saturday, 15 February 2025

डॉक्टर अनुभूति गुप्ता

लखीमपुर-खीरी, उत्तर प्रदेश से प्रकाशित होने वाली साहित्यजगत की वार्षिक पत्रिका "अनुवीणा" प्राप्त हुई है,पत्रिका की सम्पादक, कवयित्री एवं सुप्रसिद्ध चित्रकार अनुभूति गुप्ता जी ने इसे अपनी माँ स्व. डॉ. बीना रानी गुप्ता जी की स्मृति को समर्पित किया है.

बेहतरीन लेखकों की कहानियों, लघुकथाओं और कविताओ से परिपूर्ण यह वार्षिक पत्रिका सफेद मजबूत पन्नो और सुंदर छपाई के कारण भी अद्भुत बन पड़ा है, इस पत्रिका को कई वर्ष तक भी अगर आप अपनी किताबों और पत्रिकाओं के डायर में रखेंगे तब भी यह कभी खराब होनें का नाम नही लेगी.

"निश्चित ही अनुवीणा महज़ एक वार्षिक पत्रिका ही नहीं, बल्कि एक बिटिया के द्वारा साकार की गई मां के यादों की एक पूरी पुष्पांजलि भी है"

 एक बार पुनः मां को प्रणाम 🌹🌹🙏🙏

Friday, 14 February 2025

(वेलेंटाइन डे)


(वेलेंटाइन डे एक दुःख भरी रोमांटिक कविता)

तेजाब से 
झुलसी हुई एक लड़की
कल अचानक से 
मेरी कविता 
के सामने आकर खड़ी हो गई 
और मुझसे बोली 
कि मैं भी हूं 
एक अधूरी रोमांटिक कविता
मुझे पढ़ो 
मेरे स्वप्न के गुलाब की यह 
झुलसी हुई पंखुरी  
किसी की झूठी मोहब्बत 
के मूक गवाह है 
मैं डर रही 
हर पल 
बेमोहब्बत मर रही 
आखिर क्या वह 
या फिर कोई और 
लौटा पाएगा
इस जले हुए 
और झुलसे हुए चेहरे की
गुलाबी रंगत 
मेरी चौदह फरवरी कब आएगी
कब कोई मुझ पर 
अपनी कोई रोमांटिक कविता लिखेगा????😢😢

कहीं किसी शहर में सिसक रही होगी मेरी यह है रोमांटिक कविता✍️✍️

चांदी का आकाश देंगे

(चाँदी का आकाश देंगे)
हर गरीब को-----------------
एक नल,एक आवास देंगे!
विधवा को पेंशन,नंगे को लिबास देंगे,
गाँव मे बुनकर के फिर अच्छे दिन आयेंगे,
ये एैसा विश्वास देंगे।
यही तो नेता कि खूबी है एै"रंग"
कि ये चुनाव तलक अपने मुँह से-----
सबको सोने की धरती और चाँदी का आकाश देंगे।
@@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.-----7800824758
धन्यवाद!निर्मेश के त्यागी भईया,दैनिक वर्तमान अंकुर और हमेशा की तरह मेरे चुनावी कटाक्ष का।

Monday, 10 February 2025

(हिजाब में रखो)

( हिजाब में रखो )

छोड़ दो तालीम---
खुद को मजहबी किताब में रखों,

भाड़ में जाए इक्कीसबी सदी,
और तरक्की,
तुम महज़ एक मर्दे बदन हो,
आज भी.

इसलिए तुम,
उनके इस मर्दे बदन को,
उनके इस्लामी---
"हिजाब में रखों"

 "यहां मैं यह स्पष्ट कर दूं कि जिसके हिस्से की जो भी आजादी है, उसे बिना किसी जाति मजहब के मिलनी चाहिए चाहे वह महिला हो या पुरुष"

 अगर हम 21वीं सदी की बात करते हैं तो हमें महिलाओं लड़कियों को भी उनका न्यायोचित हक देना होगा.

(डेयरी मिल्क का रैपर)

(डेयरी मिल्क का रैपर)
मै तेरी चाहत की यादो से------
सिहर उठती हूँ आज भी!
जब तुम फाड़ते हो मेरे लिये------
उसी अपनी पुरानी अदा से--डेयरी मिल्क का रैपर।

@@@आप सभी मोहब्बत करने वालो को चाॅकलेट डे की ढ़ेर सारी बधाई।

जोक

😃😃फरवरी में आपके पति आपके हाथ से ना निकले,,इसके लिए मात्र ग्यारह सौ रुपए में "पति वशीकरण यंत्र" को अपने गले में धारण कर सवा महीने तक आप "प्रेमिका सत्यानाश" जैसे मंत्र का जाप करे.😄😃

नूपुर

बहुत हुआ 
अब दिल्ली को सुर की जरूरत है,
सत्य सनातन के लिए लड़ी 
खूब लड़ी 
झांसी की तरह 
अब वहां के 
राजनीतिक आंगन को 
डरी सहमी नहीं 
बल्कि साहस के पांवों में बजती 
हमारी बहादुर बेटी के 

Saturday, 8 February 2025

(प्रचार)

✍️✍️जिस तरह लगातार मरा मरा कहने पर राम राम कहने की ध्वनावृति सुनाई पड़ने लगती है,,,,,
ठीक उसी प्रकार जब आप लगातार मोदी मोदी कहते है तो उसकी ध्वनावृति भाजपा भाजपा सुनाई पड़ने लगती हैं 

इस तरह से आप अपनी पार्टी का कम भाजपा और मोदी का चुनाव प्रचार अधिक करते हैं 😀😀😀😀
इसलिए ईवीएम में नहीं आपके प्रचार में दोष हैं.

(संगम)

(संगम)
संगम----------
हमारी आस्था के मदिने की तरह है!
ऐ,रंग-----जहां---------
आसमाँ से रुह़े भी आती है,डुबकी लगाने।

Friday, 7 February 2025

(बंधुवा मजदूर हूं)

(बंधुवा मजदूर हूँ)
मै राम--------
और अल्लाह से बहुत दूर हूँ,
क्यूँकि ऐ,रंग--मै अपनी पीड़ाओ का----
बंधुवा मजदूर हूँ।

(251 श्रेष्ठ व्यंग्यकार)

आप, सभी इसमें शामिल व्यंग्यकारों को मेरी बहुत-बहुत बधाई 🌹🌹🌹🌹🙏🙏

Tuesday, 4 February 2025

(आडवाणी)

(आडवाणी)

त्याग में भरत
और तपस्या में लक्ष्मण
मै पूछता हूं कौन है?
जो ठुकरा सके
सत्ता शिखर
और राजवाणी .
इसलिए
ये मान लेना ही उचित है कि ,
इस दर्प युग में
है अकेले आडवाणी.

समय चक्र की धुरी है
जो घूमती है,
लेकिन मातृभूमि
ऐसे हर ललाट को
खुद चूमती है
एक गर्जना एक सर्जना
एक अटल,एक आडवाणी .

वे राम रथ
और राम पथ के
सारथी है
वे प्रण,पताका राम के है
राष्ट्र के है
भारत रत्न के उद्दघोष में
होठ है .
मोदी के लेकिन 
पुत्र सत्ता से इतर है
यह सिख दी है
अब तलक,
वे कौटिल्य है
गुरु है
ना कि ,केवल आडवाणी.

यह रचना मेरी स्वरचित और अप्रकाशित है.

रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी,मियापुर
जिला-जौनपुर 222002 (U P)

(कुंभ में)

कुंभ में 
सबरी और कुबडी में भेद नही है.

वाल्मीकि और रैदास 
डुबकी लगा रहे 
तुम भी नहा लो,
हमें कोई खेद नहीं है.

तुम्हें चीढ़ है 
विश्व कल्याण के मंत्र से 
क्या करोगे 
यह तुम्हारी गलती नही ?

तुम जिस पार्टी से जुड़े हो 
उस पार्टी में बेटे के अलावा 
कोई सिद्धांत 
कोई वेद नहीं हैं.

रंगनाथ द्विवेदी 
जज कॉलोनी, मियाँपुर 
जौनपुर--222002 (U P)
rangnathdubey90@gmail.com

(बहु श्रवण हुई)

(बहु श्रवण हुई)

अपनी सास के पांव 
और उसकी आस्था का चरण हुई 
धन्य है यह कुंभ 
कि जहां,अपनी सास के लिए 
बहु श्रवण हुई .

तुम्हारा वामपंथ
कुतर्की,कुमार्गी, विधर्मी हैं 
तुम्हारे यहां तो 
औरतों के संस्कार तक की क्षरण हुई.

जबकि धन्य है यह देश 
और धन्य है बहु
जो उठा के अपने कांधे पर 
कुंभ-पुण्य ले चली 
वाह,वाह रे सनातन 
कि व्याह में ऐसी बहु 
इस घर 
वरण हुई 
कि अपनी सास के लिए 
वह श्रवण हुई..

हर हर गंगे जय महाकुंभ जय प्रयागराज 🙏 🙏 

रंगनाथ द्विवेदी 
जज कॉलोनी, मियाँपुर 
जौनपुर --222002 (U P)
rangnathdubey90@gmail.com

(एक रविवार मेरा भी हो)

(एक रविवार मेरा भी हो)

एक छुट्टी 
एक प्यार मेरा भी हो ,
तुम्हारे तो कई आते हैं 
महीने में 
एक रविवार मेरा भी हो.

तुम 
किचन में जाओ 
प्यार से नाश्ते बनाओ ,
मैं इंतजार करूं 
और पढूं घंटों 
महीने में एक अखबार मेरा भी हो.

तुम कपड़े धूलों 
सुखाओ,बड़बड़ाओ 
मैं मुस्कुराऊं 
महीने में 
एक दिन की यह छुट्टी 
यह प्यार मेरा भी हो,
तुम्हारे तो कई आते हैं 
महीने में 
एक रविवार मेरा भी हों.

मैं तुम्हारे साथ 
पति की तरह विहेब करूं 
तुम्हें 
स्कूटी पर बिठाकर 
कही दूर,
डिनर पर ले जाऊं, 
तुम्हारी बातों पर घंटों हसू 
और तुम 
मेरी तरह शरमाओ
तुम्हें शर्माते हुए देखने की 
एक छुट्टी 
एक प्यार मेरा भी हो.

तुम्हारे तो कई आते हैं 
महीने में 
एक रविवार मेरा भी हो.

यह रचना मेरी स्वरचित और अप्रकाशित है.
चित्र गुगल से साभार.

रंगनाथ द्विवेदी 
जज कॉलोनी, मियाँपुर 
जौनपुर--222002 (U P)
rangnathdubey90@gmail.com

व्यंग्य

हंसने और जबरदस्ती खीस निपोरने में बहुत अंतर है🥸हंसने से आप लंबे समय तक स्वस्थ्य रह सकती हैं और जबरदस्ती खीस निपोरने से आपके खूबसूरत गालों की मांसपेशियों में खिंचाव आ सकता है♥️✍️

Saturday, 1 February 2025

(बीसों बसंत मैं सजी)

(बीसों बसंत मैं सजी)

बीसों बसंत मै सजी---
पोर-पोर गदराई खुद को देख-देख,
बीसों बसंत मै सजी.

कोयल हुई बाँवरी-
बागो में कूक-कूक कर,
भँवरा हुआ पागल महुवे को चुमकर,
मेरे अधर कुँवारे,
मै कुँवारी अंग-अंग---
बीसों बसंत मै सजी.

यौवन कलश छलके बूँद-बूँद कर,
आँखे हुई बाँवरी मेरी
 पिया दरस को,
हे!बसंत सखी अब तुम----
कोई ऐसी बान मारो
कि आये बाबुल के गाँव अब,
मेरे पिया की डोली,
और मै बैठ चलूं उसमे 
अपने पिया के गाँव,

फिर मैं छुईमुई सी बैठूं
सुहाग सेज पर 
वे घूंघट मेरी उठाए,
मै शर्म से सिमट जाऊं 
और मूंद जाएं मेरे 
मद भरे नयन 
और उनके छुवन की सिहरन,
से कांपे अधर मेरे,
और मैं 
इस कंपकपी की रात को,
जतन कर सहेजे,
अपने बीसों बसंत जीलूं.
बीसों बसंत मै सजी.

यह रचना मेरी स्वरचित और अप्रकाशित है.
चित्र गुगल से साभार.

रंगनाथ द्विवेदी
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर--222002 (U P)
rangnathdubey90@gmail.com