Friday, 29 October 2021

(आईना तोड़ देती है)
पटकती है,बे-रहमी से
सिसकता-
छोड़ देती है।
ऐ रंग,-वे हुस्न-ए-बे-गैरत
हर महीने-
एक आईना तोड़ देती है।
(आदमी हूँ)

तेरे रूप के लावण्य से,
देवता दहके थे,
मै तो आदमी हूँ।
है इसमे पाप-पुण्य कुछ नही,
ये सुरा आचमन है,
ऐ रंग,-
इसमे देवता बहके थे,
मै तो आदमी हूँ.

Monday, 25 October 2021

ठुमरी समाज्ञ्री गिरजा देवी को मेरी भावभिनी श्रद्धांजलि।
                 (ठुमरी को उदास छोड़े जा रही)
मै तो बस अपनी ये साँस तोड़े जा रही---------
एै बनारस मै फिर आऊँगी तेरी घाटो पे लौट रियाज़ करने,
मै इसलिये---------------
एक आखिरी ठुमरी छोड़े जा रही।
अनगिनत साज़-आवाज़ की महफिले,
और दिवान मे गिरजा का जिक्र होगा-------
मै अपनी गायकी का एक रंग छोड़े जा रही।
ना रो मुझे जाने दे एै मेरी सदके मोहब्बत,
तु तो मेरे बचपन की सहेली है,
वे देख कब से खड़ी है ले जाने को आज़,
जाने दे ना रोक सहेली,
देख तेरे नाते वे फरिश्त़े औरत भी गमज़दा है,
उसे भी पता है कि वे गिरज़ा की साँस के साथ------
हमेशा के लिये ठुमरी को उदास छोड़े जा रही।

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)।
mo.no.-----7800824758

Sunday, 17 October 2021

(मै दर्दे दरख्त़ हूँ)
मै वे दर्दे दरख्त़ हूँ--------
जो चोट पे भी चुप रहती है शाख-शाख।
सब छोड़ जाते है--------
कुछ लम्हों के बाद मुझको,
मै सिसकती हु तन्हा अक्सर,
अपनी ही साँस-साँस।
मेरे बदन की ये लिबासे पत्तियां,
कर देती है खिज़ा में-------
बेपर्दा बदन मेरा!
मै जीती हूं किस तरह-------
शर्म को अपनी पलको से टांक-टांक।
मै वे दर्दे दरख्त़ हूँ-------
जो चोट पे भी चुप रहती है शाख-शाख।

@@@रचयिता----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.----7800824758
(एल.आई.सी की तरह करता है)
मै तंग आ गई हूँ उसकी किस्त से,,,,,,,,
ऐ,रंग----मेरा शौहर-----
मुझसे मोहब्बत भी---------
एल.आई.सी की तरह करता है।
(गुलेल नीलोफर)
छुट रहे-
गुड्डे और गुडियो के,
खेल नीलोफर।
अब कैसे होगा,
तेरा अपनी सखियो से-
मेल नीलोफर।
रो रहा,रंग,-
अमिया को तोड़ने वाला,
तेरा छज्जे पे रखा-
गुलेल नीलोफर।

Thursday, 14 October 2021

( काबुलीवाला)

मैं रोज देखती हूं------
 खुली खिड़की से
 घंटों सड़क की तरफ, ए 'रंग '
 इस उम्मीद में कि शायद, 
 कभी दिख जाए, 
 वे मेरी बचपन का----
"काबुलीवाला "

@@रंगनाथ द्विवेदी 
जज कॉलोनी, मियांपुर 
जौनपुर, उत्तर-प्रदेश 
Mo.no.7800824758
(जवान नीलोफर)
चहकती थी,फुदकती थी,हर कमरे
दालान नीलोफर।
आज विदा हो रही-
अपने बाबुल के गाँव से
उफ!बह रहे आँशू-
मेरे भी कलम के,
ऐ रंग,-
क्यों?इतनी जल्दी हो गयी
जवान नीलोफर।

एक सिल-सिलेवार एक नज्म नीलोफर।
(गुंजा का गाँव)
है,आज भी नदिया का पानी
है,आज भी पीपल की छाँव।
आज भी-
उतरे है,चन्दा पूरे आँगन
है,आज भी ऐ रंग,-
वही चन्दन
और है,वही उसकी-
गुंजा का गाँव।

Monday, 11 October 2021

(रुह के सिज़दे मे रहुँगा)
ऐ मौत आओ--------
मेरे कमरे से अपना जिस्म़ ले जाओ,,,,,,
क्युकि अब मै ता उम्र-----
रुह़ के सिज़दे मे रहुँगा।
(एक जिंदा दिया हूँ)
ताउम्र अपनी मै जल-जल के जिया हूं,
मै आदमी नही-----------
एक जिंदा दिया हूँ।
तमाम खराशे है,है तमाम सिलवटे
उधड़ा रहा मै----------
किसी मुफ़लिस के बिछौने सा,
हर जख्म जिंदगी का-------
मै खुद से सिया हूं।
मै आदमी नही--------
एक जिंदा दिया हूँ।
हु मै एक एैसा सजायाफ्ता,
जो रो नही सकता!
खौलते है आँसू मेरे दिल के अंदर,
मै कभी बहार में नही-------
खिजा़ में जिया हूं।
मै आदमी नही------
एक जिंदा दिया हूँ।

Friday, 8 October 2021

(दहलीज का चराग)
तेरे लौटने का आज भी
करता है,इंतजार-
मेरी दहलीज का चराग।
ऐ रंग,-
तड़पता है,सिसकता है,
तेरी ना-उम्मिदी के डर से,
मेरी दहलीज का चराग।
(अपनी उर्वशी पे)
वे अपना सबकुछ वार देती है,
मेरी एक खुशी पे।
इसलिए,ऐ रंग,-मै
रोज कुछ न कुछ लिखता हूँ,
अपनी उर्वशी पे।

Sunday, 3 October 2021

(किसानो के अच्छे दिन आ गये)
लात-घूँसा और पुलिस के बर्बरता की,
लाठी तलक खा गये----------
किसानों के अच्छे दिन आ गये।
डीजल--पेट्रोल महगा होता गया,
बड़ी मुश्किल से इस मर्तबा खेत जोता गया,
इनके बिकास का सारा पैसा--------
नीरव मोदी और माल्या खा गये,
किसानों के अच्छे दिन आ गये।
पिछली सरकार दस साल रही,
क्या किया उसने ?
हा इतना जरुर किया की हमारे जख्मों पे---
हमसे भी ज्यादा रोने आ गये,
किसानों के अच्छे दिन आ गये।
हर सरकार इन किसानों पे सांडर्स की तरह,
जलियांवाला बाग सा दर्द देती है,
ये ऐसे ही कभी मौसम,
तो कभी हुकूमत से लड़ते--लड़ते हार गये,
ये तब बागी हुये जब सह न सके,
तभी तो ऐ दिल्ली तेरी दहलीज पे आके,
तेरे अच्छे दिन को नकार गये-----
किसानों के अच्छे दिन आ गये।
लेकिन राजनीति अब भी कह रही,
कि विपक्ष को ईधन चाहिये था चुनाव का,
और अब भी पक्ष का वही दावा,
कि किसानों का पहले से कही ज्यादा-----
हमारी सरकार मे अच्छे दिन आ गये।
(वृद्धा के है।राम)
सबकी भक्ति,
सबकी श्रद्धा के है।राम
कौन कहता है?
कि केवल अयोध्या के है।राम
ऐ रंग,-
जुठे बेर,जाति की छोटी
शबरी जैसी वृद्धा के है।राम
जय श्री राम।
(आवारा छोड़ दिया)
उसके शहर को--------
नजदीक से देखने की खातिर,,,,,,,,
ऐ,रंग----हमने-------
खुद को आवारा छोड़ दिया।