Sunday, 27 April 2025

निशिकांत दुबे

'भारत में 5 लाख से ऊपर पाकिस्तानी लड़कियां' : पाकिस्तानी साजिश को लेकर सांसद निशिकांत दुबे का दावा

कविता

नक्सली हमले मे शहीद एक सिपाही के बुढ़े बाप की आँख नम करती पीड़ा।
                   (बुढ़े पिता का कंपकपाता हाथ)
कल शहीद----------
की चीता जला रहा बाप रो रहा था!
तभी किसी ने उसके कंधे पे हाथ रखा,
तो वे चीख पड़ा-----------
कि रहने दो मेरे कंधे पे मत रखो,
इस देश के ये नपुंसक हाथ जरुरत नही।
गर इतनी ही सहानुभूति है मेरे शहीद बेटे से,
तो कहो देश की सियासत से---------
कि ला दे उन तमाम नक्सलियो के कटे हाथ,
नही ला सकता न जानता हूँ।
इसी जगह फिर सजेगी---------
कुछ फौजी बज़ायेंगे मातमी धुन,
और अपने शहीद बेटे की चीता को आग देगा------
किसी बुढ़े पिता का कंपकपाता हाथ।

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)
7800824758

छतीसगढ़ मे शहीद सी आर पी यफ के उन जवानो को मेरी श्रद्धांजलि।

Friday, 25 April 2025

Vivek Singh मैं आपके स्तर की टिप्पणी करूंगा तो वह ज्यादा कटू हो जाएगा आपको यह बात एक वरिष्ठ व्यक्ति होने के नाते नहीं कहनी या लिखनी चाहिए थी बात जिस परिपेक्ष की थी टिप्पणी उसी पर करनी चाहिए थी जिसका कि मैं बुरा भी नहीं मानता क्योंकि सबके अपने विचार हैं वह अपने विचार रख सकते हैं लेकिन आप आइंदा मेरे ही नहीं किसी को भी तब कुछ कहिए जब उसने आपके अपने जिन पर अंगुली उठाई हो वैसे भी जरूरी नहीं जो आपके विचार हो वही आपकी अपनी औलाद के भी विचार हो फिलहाल मैने आपके पिता होने पर या आपके अगर कोई पुत्र हो तो उस पर कोई टिप्पणी नही की हैं बात मैंने लिखी है और टिप्पणी आप मेरे पिता पर कर रहे हैं इससे आपका ओछापन और बदतमीजी साफ परिलक्षित हो रही हैं आदरणीय आइंदा इस बात का ख्याल रखे सादर
ये आपकी पोस्ट की पिक्स हैं। गौर से पढ़िये।
होस्ट भी, चीफ गेस्ट भी,वेन्यू भी सब मुस्लिम
और भी कई शायर होंगे मुस्लिम। आप अपने सम्मानित पिताजी से पूछियेगा जब आतंकवादियों का धर्म कन्फर्म है तो ऐसी जगह क्यों जाना।

Sunday, 20 April 2025

अनुराग कश्यप

एक पार्टी से सम्मान पाया 
अब उसी का हिसाब करेंगे,,
सुना हैं 
कि यह ब्राह्मण के मुंह पर पेशाब करेंगे 

Friday, 18 April 2025

(मोहब्बत मुसलमान थी)

(मोहब्ब़त मूसलमां थी)
मोहब्ब़त हम दोनो मे बे-पनाह थी,,,,,,,
फिर भी न मिल सके,,,,,,,
ऐ,मै ब्राह्मण था और-----------
मेरी मोहब्ब़त मूसलमां थी।

(कश्मीरी पंडित)

(कश्मीरी पंडित)

वे बांगा दी बुलबुल-
वे डलझील वे शीकारे.
हमारी मिट्टी-ए-मोहब्बत
कश्म़ीर,,
हमे ख्वाबो मे पुकारे.

ये सियासत-ए-साजिश
ये अलगाव,
कि हम कश्म़ीरी पंडित पड़े है-
खानाबदोशो से बदतर ऐ दिल्ली,
तेरी सड़को के किनारे.

वे गुल,वे केशर,वे सेब के बगीचे,
उफ!नही आती वे खूशबु
ना आती है--
वैसी यहाँ तक हवा रे!

ये लाशे मईयत,ये रुह-ए-तड़प है,
ऐ,"रंग"
हम कैसे होगे आखिर 
जन्नतनशी--
कश्मीर कि खाक-ए-मिट्टी
के बीना रे।

ये, बिस्थापित कश्मीरी पंडितो का एक दर्द है.

रंगनाथ द्विवेदी, जज कॉलोनी
मियांपुर, जौनपुर-222002 (U P )
Mo.no.7800824758

(ईद पे आओगे)

(ईद पे आओगे)
दोगे थपकी-----------
उसकी लगती हुई नीद पे आओगे,,,,,,,,,,।
नही आये टुट गई,,,,,,,,,
फिर समझाया उसने खुद को ऐ,रंग-----
कि शायद अबकी ईद पे आओगे।

Tuesday, 15 April 2025

(पांव के पायल की तरह)

(पाँव के पायल की तरह है)
जिंदगी------------
मेरी प्रेमिका के पाँव के पायल की तरह है।
वे झुक कभी---------
जब अपनी नर्म सी अँगुलियो इसे बांधती है,
तो एैसा लगता है कि जैसे जिंदगी-----------
उसके यौवन से फिसले हुये आँचल की तरह है।
जिंदगी-------------
मेरी प्रेमिका के पाँव के पायल की तरह है।
वे शर्म और हया से लदी झुइमुई सी है,
जब मै देखता हूं एकटक---------
अपनी प्रेम हिरनी को,तो लगता है जैसे जिंदगी,
मेरी प्रेमिका के--------
आँख के काजल की तरह है।
जिंदगी-----------
मेरी प्रेमिका के पाँव के पायल की तरह है।
वे स्याह बाल उसके,
जब कभी खुलते है और खुल के बिखरते है,
तो लगता है जैसे जिंदगी,
मेरी प्रेमिका के बालो मे उतर आये एै"रंग"------
सावन के बादल की तरह है।
जिंदगी--------
मेरी प्रेमिका के पाँव के पायल की तरह है।

@@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)
mo.no.-----7800824758

(महुवा)

✍️✍️ अपने मोहब्बत के दिनों में कईयों ने अपनी बचपन की महुआ को खोया होगा

(बचपन की महुआ )

यही--
पहली बार मुझसे मिली थी,
मेंरे बचपन की "महुआ."

इसलिए ये केवल
"महुए" के फुल का मौसम ही नहीं,
बल्कि ये मेरी मोहब्बत और
चाहत का मौसम भी है.

इसलिए,
तो मैं अक्सर आता हूं गाँव 
ताकि उसकी यादें,
फिर मुझसे उसी बचपन की तरह मिलें.

और मैं,
तन्हाई में उसकी यादों से
ये पुछ सकु 
कि बताओ?
तुम फिर कब मिलोगी,
मुझसे,
इसी दरख़्त के नीचे
मेंरे बचपन की "महुआ."

रचयिता--रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियांपुर
जिला-जौनपुर 222002 (U P )
Mo. no.7800824758

Thursday, 10 April 2025

(आँखें रोटियां पढ़ती हैं)

(आँखे रोटियाँ पढ़ती है)

तेरे स्कूल के दाखिले 
निशुल्क है लेकिन
ऐ,"रंग"
जब पेट हो खाली--
तो आँखे रोटियाँ पढ़ती है.

Wednesday, 9 April 2025

(भरपेट दूध मिलेगा)

(भरपेट दूध मिलेगा)
झोपड़ी से------------
नरगिस के सिसकने की,
आवाज़ आ रही है!
ऐ,रंग----आज शायद,
उसके भूखे बेटे को-----
भरपेट दूध मिलेगा।

(एक टिप्पणी)

अगर लिव इन रिलेशनशिप लड़कियों का लड़को से किया गया एक मेच्योर फिजिकल रिलेशनशिप हैं,,,,तो फिर उनके खूबसूरत और आकर्षक अंगो के इतने टुकड़े क्यों ???✍️✍️✍️

व्यंग्य--गधा

✍️✍️आइए हम सभी लोग मिलकर यह सामूहिक कसम खाएं कि आज के बाद से हम किसी को डायरेक्ट गधा नहीं कहेंगे 😀😀

Tuesday, 8 April 2025

झूठे वादे रह गए होंगे

(झुठे वादे रह गये होंगे)
उदास बगीचे हो गये होंगे,
स्वप्न आँखो से बनके आँसू बह गये होंगे।
विरह झेलती होंगी तेरी तमन्नाये,
तेरे प्रिये के झुठे वादे रह गये होंगे।

@@आज एक अलग नेचर की चंद लाइन।

Sunday, 6 April 2025

(आधा शहर कत्ल हो जाए)

(आधा शहर कत्ल हो जाये)
उनके निगाहो की है,,,तासीर कुछ ऐसी,,,,
गर तबीयत से देख ले तो,,,,,,,,,,,
दावा है,ऐ,रंग--------
कि आधा शहर कत्ल हो जाये।

(मकान बेच आए)

(मकान बेच आये)
नीम बेच आये,उसकी छाँव बेच आये!
जीस कमरे मे हमें माँ की लोरी सुलाती थी,
ऐ शहर तेरी ज़वा आगोश की खातीर,
हम वे मकान बेच आये।

(शाम आवारा भटकना चाहता हूं)

(शाम आवारा भटकना चाहता हूँ)
देवताओ से उबन होने लगी है---------
मै कुछ शाम आवारा भटकना चाहता हूँ।
हर एक के ख्व़ाहिश के फूल की तरह,
मै किसी मंदिर-मस्जिद या कब्र पे चढू----
ये गवारा नही,
हाँ मै किसी तवायफ़ के गजरे से लग-----
एक रात ही सही महकना चाहता हूँ।
ये दावते रईशी के निवाले बहुत हुये,
मै किसी फुटपाथ पे-------------
उस हरामी बच्चे की तरह,
अखबार पे सुखी रोटियां रख,
मै भी शहर के नाले की बजबजाती बू के पास,
उस सरकारी नल के पानी से----------
कुछ कौर निगलना चाहता हूँ।
देवताओ से उबन होने लगी है"रंग"-------
मै कुछ शाम आवारा भटकना चाहता हूँ।

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.------7800824758

व्यंग्य

मेरे एक परिचित काफी दिनों से एक शुगर फ्री गर्लफ्रेंड की तलाश में हैं 😀😀 क्योंकि उनकी अपनी पत्नी की मिठास पर से भरोसा उठ गया है 😀😀

Friday, 4 April 2025

(उपले जला रही थी)

(उपले जला रही थी)
कल जिस अखबार मे छपी थी-तिरंगे की तस्बीर,
ऐ,रंग----उसी अखबार से गरीबी,
अपने तीन दिनो से ठंड़े-----------
चूल्हे के उपले जला रही थी।

मोबाइल खराब होने के बाद हम पुनः आपसे मुखातिब हूं.

Thursday, 3 April 2025

(श्रद्धा के हैं राम)

(श्रद्धा के है राम)
सबकी भक्ति----------
सबकी श्रद्धा के है राम।
कौन कहता है कि---------
केवल अयोध्या के है राम।
जुठे बेर जाति की छोटी-----
शबरी जैसी वृद्धा के है राम।
उस पार उतरते नदिया से,
भव सागर पार कराने वाले,
कहते है कि स्वर्ग दिया मेरे वंशज को,
इसलिये तो दुनिया के----------
हर नाविक के है राम।
शापग्रस्त बरसो से पड़ी,
पथ में पत्थर सी एै"रंग" अहिल्या,
उसे तार के सिद्ध किया------
कि एैसी पिडित हर एक नारी के है राम।
सबकी भक्ति---------
सबकी श्रद्धा के है राम।

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.-----7800824758

आप सभी को रामनवमी की ढ़ेर सारी बधाई।

Wednesday, 2 April 2025

(भगवान यीशू)
येरुशलम की सड़को पे-------
लहू के कतरे गीरते रहे,,,,,,,,,,,,,,
उफ!तलक न की भगवान के बेटे ने।
बस इबलिशो की नादानियत पे हँसे थे यीशू---------
मै फिर आऊँगा लौट के,,ये कहे थे यीशू।
ऐ,रंग--इंसानियत की खातीर--------
अपनी आखिरी साँस तक लड़े थे यीशू।

इबलिशो----शैतानो।
आप सभी को गुड़ फ्राईड़े की ढ़ेर सारी बधाई।
(बेजा तलाक न दो)
ख्वा़हिशो को खाक न दो!
एै मेरे शौहर-----------
सरिया के नाम पे,
मुझे बेजा तलाक न दो।
बख्श दो---------
कहा जाऊँगी ले मासुम बच्चे,
मुझ बेगुनाह को-------
इतना भी शाॅक न दो,
बेजा तलाक न दो।
न उड़ेलो कान में पिघले हुये शीशे,
मुझ बांदी को सजा तुम--------
इतनी खौफ़नाक न दो,
बेजा तलाक न दो।
न छिनो छत,न लिबास
खुदा के वास्ते रहने दो,
मेरी बेगुनाही झुलस जाये-------
मुझे वे तेजाब न दो,
बेजा तलाक न दो।
सी लुंगी लब,रह लुंगी लाशे जिंदा,
लाके रहना तुम दु जी निकाहे औरत,
मै उफ न करुंगी!
बस मेरे बच्चो की खुशीयो को कोई बेजा,
इस्लामी हलाक न दो-------
बेजा तलाक न दो।
@@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.7800824758
____तलाक एक दर्द है जो इसे भुगत रही कोई औरत ही समझ सकती है!अगर संभव है तो मेरी इस रचना के पढ़ने वालो से मेरी कलम अनुरोध करती है प्लीज कभी किसी भी औरत से बेजा तलाक न ले,शुक्रिया।

@@@शुक्रिया!साप्ताहिक समाचारपत्र अकोदिया सम्राट(म.प्र.)मेरी इस कविता को अपना बेशकिमती स्नेह देने के लिये।

(प्यार की किताब)

(प्यार की किताब)
हमारे और तुम्हारे प्यार की किताब,
पे महज़ जिम्मेदारियो कि धूल भर पड़ी है!
बाकी तुम वही हो और मै वही हूँ!
हाँ!कुछ पल मिल जाते है जब हम और तुम-----------
मिल के इस किताब की धूल को साफ करते है,
फिर पहले की तरह चमकने लगते है,
हमारे तुम्हारे प्यार के सारे हर्फ,
जिसे हमने-तुमने------
प्यार भरे उन दिनो मे लिखा था,
जब तुम-तुम थी और मै-मै था!
हाँ!याद करो जब घंटो हम,
एक दुसरे की शानो पर अपना सर रंखे,
शाम तलक सपने बुना करते थे,
आज उन्ही सपनो मे रंग भरने के लिये,
हम और तुम---------------
अपने दो मासूम जीवन फूलो की खातिर लगे है!
शायद या यकीनन हम फिर पढ़ेगे पहले की तरह ही----------
एक दूजे की शानो पर अपना सर रंखे,
पुराने दिनो की तरह ही-----------
अपने इस प्यार की किताब।
@@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.-----7800824758

(तंज)

देश की तरक्की का सबसे बड़ा उदाहरण हैं कि--"हमारे गांव से अब घुरहू और ढकेलू जैसे नाम गायब हो गए"😀😀😀😀😀

Tuesday, 1 April 2025

(जाफ़रान वंदे मातरम)
क्यू नही गायेगा-------------
कोई हिन्दू या मुसलमान वंदे मातरम।
ये जेहनियत के बीमार है इन्हें क्या पता?
कि है हिन्दू के लिये गीता,
और मुसलमानो के लिये है-------
कुरान वंदे मातरम।
यकी न हो तो किसी भी कौम से पुछो,
यही कहेगा कि जिस मुल्क मे जन्मे,
आखिरी लम्हे वहीं की खाक मिले,
उसी ख्वा़हिश की है जुबान---वंदे मातरम।
आओ तरन्नूम मे गायें इसे हम तुम,
क्योंकि ये मुल्क मेरी माँ और तेरी अम्मी है,
एै"रंग" जिसके आँचल की दूध मे है बन के केसर------------
और जाफ़रान वंदे मातरम।
@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.----7800824758
ये रचना आज वंदे मातरम को लेके छिड़े विवाद से प्रेरित है।

धन्यवाद!दैनिक वर्तमान अंकुर और निर्मेश के त्यागी भईया मेरी इस रचना को स्नेह देने के लिये।