(बाँहो मे भर नही पाये)
हमने साँस-साँस भर लिया उन्हे-----
वे इतने के बाद भी,मेरे हो नही पाये।
मै आँख में बसा के उन्हे देखती रही,
वे अपनी आँखो में हमे,
कभी भर नही पाये।
मै आयते कुरान की तरह,पढ़ती रही उन्हे
वे एक लफ्ज़ भी वफा़ का,
मेरी पढ़ नही पाये।
मै उतर गई उनमें कर शौहरे यकीन,
वे एक रात भी हमे हमारी हक से,
एै,रंग----अपनी बाँहो में भर नही पाये।
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