Rangnath Dubey's Poems
Friday, 29 October 2021
(आदमी हूँ)
तेरे रूप के लावण्य से,
देवता दहके थे,
मै तो आदमी हूँ।
है इसमे पाप-पुण्य कुछ नही,
ये सुरा आचमन है,
ऐ रंग,-
इसमे देवता बहके थे,
मै तो आदमी हूँ.
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