Wednesday, 15 April 2026

पकौड़े तलते है

(पकौड़े तलते है)

नेता-----------
हमारी खुशहाली और तरक्की से जलते है.
वरना-------
इसमें गलत क्या है ?
की हम अपनी आत्मनिर्भरता के लिये,
गर किसी फूटपाथ पे,
कुछ घंटे पकौड़े तलते है.
ये हमारी दिवास्वप्न के,
वे जादुगर है,
जो अपनी राजनैतिक खुशहाली के लिये,
एक दूजे को पानी पी कोसते है,
वरना हकीकत है,
ये फैंसी रहनुमा हमारे,
अपने चुनाव की कडाही मे,
कही दिखावे के गेहूं काटते है,
तो कही देखावे के-----
पकौड़े तलते है.
आईये मिलके मतदान करे,
हम जाती नही,
एक अच्छी सरकार की पहचान करे,
खुद बारोजगार हो,
रही नौकरी,
गर मिलनी है तो मिले,
नही तो फिर शर्म कैसी,
आओ बेरोजगारी के खिलाफ,
हम ये पहल करते है,
किसी फूटपाथ पे----------
कुछ घंटे हम पकौड़े तलते है.

@@@रचयिता---रंगनाथ द्विवेदी.
जज कालोनी, मियांपुर
जिला--जौनपुर pin no.222002 (U P).
मो.नं.7800824758

यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है.

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