Friday, 12 May 2017

(कमाल आमरोही निकले)

हिन्दी सिनेमा की दो तड़प मीना कुमारी और कमाल आमरोही------ (कमाल आमरोही निकले) मीना दिल हार गई-------------- लेकिन तुम बेवफ़ा कमाल आमरोही निकले। डुबना चाहा तेरी आगोश मे लेकिन डुब न सकी, हाँ !ये मीना बेशक गमे शराब मे डुब गई, लेकिन डुबती हर घुँट से मैने सुना है खुद-------- तेरे न रहने पे भी, शराब की हर घुँट से मेरे बूँद-बूँद कमाल आमरोही निकले। एक बसे घर की आह!लगी शायद, तभी तो मुझको ये तबाहे लम्हात मिले, और मै शम-मये मोम के छाले की तरह, जल और फूट रही! या खुदा! एैसी गमे बेवा सी जिंदगी, मेरी तरह तड़प के---------- किसी बिस्तर पे सोई न मिले। हाँ! ये इंतकाले मीना छोड़े जा रही, एक तड़प होंठ पे अपनी, शायद आँख भिगेगी और तुम रोओंगे, मैने तुमसे मोहब्बत ही इतनी टुट के की है, मेरे न रहने पे------ जब भी तुम अपनी इस अधुरी और तन्हा मीना को याद करोगे, तो उस याद के होंठ पे भी तुम्ही आओगे, हाँ!इतनी इनायत तुम जरूर करना------------ कि मेरी याद को सिने से लगा के, कुछ देर बीते दिनो की तरह खड़े रहना, और चुम लेना मेरी यादो के लरज़ते होंठ, जब मेरे मेहबूब------ मेरी जु़बा से कमाल आमरोही निकले। *********** परिचय----रंगनाथ द्विवेदी, जज कालोनी,मियाँपुर, जौनपुर(उत्तर-प्रदेश) mo.no.----7800824758 पेशेवर कुशलता----सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत दिव्यांग बच्चो का अध्यापन। रचनात्मक कुशलता----देश के तमाम पत्र-पत्रिकाओ मे अनवरत लेखन व प्रकाशन।

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