Rangnath Dubey's Poems
Thursday, 27 January 2022
(रुप का आचमन करना)
मै इस ज़मी पे--------------
किसी देवता के प्याले से छलक आई हूँ!
एै"रंग" जरा संभल के-------------
मेरी रुप का आचमन करना।
@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.------7800824758
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