(सरयू मे समा जायें)
ऐ सियासत,
तेरी इस दुर्गति से अच्छा है कि-----
राम फिर सरयू मे समा जायें।
पता नही-------
कब कौन सी भीड़ बहके
और एक भाई,
दुसरे भाई के ही-----
लहू मे नहा जाये,
राम फिर सरयू मे समा जायें।
ऐ अदालत,
तू ही फैसला कर दे,
कि मंदिर या मस्जिद बनाने-----
ये हिंदू और मुसलमां कहां जायें।
ऐ सियासत,
तेरी इस दुर्गति से अच्छा है कि ,"रंग"----
राम फिर सरयू मे समा जायें।
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