Friday, 5 April 2019

(सरयू मे समा जायें)


(सरयू मे समा जायें)

ऐ सियासत,


तेरी इस दुर्गति से अच्छा है कि-----


राम फिर सरयू मे समा जायें।


पता नही-------


कब कौन सी भीड़ बहके


और एक भाई,


दुसरे भाई के ही-----


लहू मे नहा जाये,


राम फिर सरयू मे समा जायें।


ऐ अदालत,


तू ही फैसला कर दे,


कि मंदिर या मस्जिद बनाने-----


ये हिंदू और मुसलमां कहां जायें।


ऐ सियासत,


तेरी इस दुर्गति से अच्छा है कि ,"रंग"----


राम फिर सरयू मे समा जायें।


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