Wednesday, 24 April 2019

(मै कुल्हड़ हूँ)

   (मैं कुल्हड़ हूँ)

मैं कुल्हड़ हूँ,


मैं इतनी खूबसूरत


और सुघर


यूँ हीं नहीं हूँ,


मुझे मेरे कुम्हार नें --


पसीने से तर-ब-तर भीग,


बड़ी मेहनत से गढ़ा है,


फिर सुखने के लिए 


इसने घंटो कड़ी धूप में रख 


मेरी रखवाली की,


सुख जाने पे,


मेरे कुम्हार ने ---


एक एक कर 


बहुत प्यार से मुझे उठाया


ताकि मैं कहीं से


फूटूं न ,उसी प्यार से फिर मुझे


मेरे कुम्हार ने,


आवें मे रख मुझे पकाया


और फिर आवें से निकाल


उसनें  मुझे तका


और पूछा, बता तूं ,


कैसी है??


मैंने भी ---


अपने कुम्हार से कहा,कि


तेरी कला ही कुछ ऐसी है, कि


क्या कहूँ??


बस !तू इतना समझ ले,


मेरे कुम्हार ,


मैं पहले सी खूबसूरत


और सुघर हूँ.


मैं कुल्हड़ हूँ.

@@रंगनाथ द्विवेदी


जज कालोनी,मियांपुर


जिला. जौनपुर 222002(U.P.)


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