Friday, 14 February 2020

व्यंग्य---(बाबा जी इज्जत के लिये हानिकारक है )

व्यंग्य---(बाबाओं के आश्रम में जाना इज्ज़त के लिये हानिकारक है)

आजकल हमारे देश मे बड़े-बड़े संतो और बाबाओं ने अपनी घनघोर शारिरीक कामक्रीडा से "रंगीन तबीयत का सारा रिकार्ड तोड़ दिया है" . इनके आश्रम की चपेट में आई पत्नियों के पतियों की हालत "हवस" फिल्म के दौर में देवानंद के ब्लैक एंड ह्वाइट फिल्म "गाइड" की तरह हो गयी है. 

पहले आश्रम और बाबा महिलाओं के लिये सुरक्षित समझे जाते थे,लेकिन अब ऐसा नही है, क्योंकि " इनके मोहब्बत की मारक क्षमता की सुपर सोनिक मिसाइल एक गृहस्थ से दस गुनी ज्यादा खतरनाक है". आश्रम से पकड़े जा रहे बाबाओं की सफल कामुकता की हालत ये है कि---"कुछ युवा व नौजवान चोरी छिपे झंडु केशरी जीवन खा रहे".

"आश्रमो के इन बाबाओं के मोहब्बत का ये उपजाऊपन शादी-शुदा लोगो को अंदर ही अंदर मरुस्थल व बंजर किये दे रहा".बाबाओ का जीवन VMW की तरह हो गया है,और सामान्य गृहस्थ का जीवन बापू के दहेज़ मे मिले कबाड़ वाले कमरे में धूल फांकते चेतक स्कूटर की तरह."काजू,बादाम, खजूर,शीलाजीत के सेवन ने इनके मूँह की कांतियता में चार चाँद लगाये है.

गृहस्थ और आम-नौजवानों के--"मोहब्बत का लगवाग्रस्त भौतिक मूँह देखते ही बन रहा".शादीशुदा तीस प्रतिशत पति शेयर मारकेट मे सारी पूँजी ही जैसे डूब जाने के सदमें मे है. नौजवानों की नई पौध का बेरोजगारी की हालत मे पिता की जेब से झटके पैसे से "पुरुष की ब्यूटीपार्लर से कराया रंग-रोगन,फिजियोथैरेपी सब बेकार जा रहा".

इन बाबाओ के आकर्षण का गुरुत्वाकर्षण उसपे से इन महिलाओं को इनके इस आश्रम तक लाता है. इनके नाम में भी "एक से एक विशेषण,एक से एक अलंकार कोई जलेबी बाबा,कोई कैंडी बाबा,कोई चुंबन स्वामी".शादीशुदा पति-पत्नी की हालत ये है कि उन्हें एक दुसरे को "मोहब्बत वाले मानसून की नज़र से देखे महिनो गुज़र जाते है". 

अब तो ये आवश्यक हो गया है कि जैसे सरकार ने--"सिगरेट,तंबाकू, गुटखा और शराब पे ये लिखवा दिया है कि इनका सेवन कैंसर व स्वास्थ्य के लिये हानिकारक है".वैसे ही सरकार को इन बाबाओ के आश्रम के प्रवेश द्वार पर मोटे-मोटे अक्षरो मे ये लिखवा देना चाहिये कि--"शाम पाँच बजे के बाद महिलाओं का आश्रम में जाना उनकी इज्जत के लिये हानिकारक है".

यह लघुव्यंग्य मेरा स्व-लिखित व अप्रकाशित है.

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