Friday, 14 August 2020

व्यंग्य---(हिन्दी दिवस के इमरान हाशमी )

व्यंग्य-- (हिन्दी दिवस के इमरान हाशमी)
ये हिन्दी साहित्य की--"चाटुकारिता का ओलंपिक युग चल रहा है". जिसके लिये ये चाटुकार महिनो--"अपनी हिन्दी का मेंटल रियाज करते है". उनकी सम्पूर्ण मेंटल रियाज के विशेष दिन का नाम ही हिन्दी दिवस है. "लेकिन ये विशेष दिन इनकी हिन्दी का बसंत नही,बल्कि इनके वर्ड लिट्रेचर का वेलेंटाइन-डे है"


ये हिन्दी दिवस के ऐसे तथाकथित--"शेक्सपियर है,जिन्हें शेक्सपियर का नाम तो लेना आता है लेकिन हिन्दी लिटरेचर की आत्मा को लहू-लूहान करके". ये सभी महंगे होटलो मे जुटते है, और बड़ी गहन वार्ता हिन्दी को लेके करते है, फिर दो-एक आर्टीफिशियल साँसे छोड़ते है तो यूँँ लगता है,कि जैसे-- "पूस की रात का हल्कू इनके महंगे सिगार में अपने तम्बाकू धुआं ढुढ़ रहा हो"

 उस मोटल में  बीच-बीच में बेयरा आकर इन्हे कोल्डड्रिंक और आइस क्यूब के साथ बिदेशी शराब के पैग थमाता रहता है,एंकर तो ऐसे ही लोगो में से कोई प्रकांड पर्सनैलिटी होती है,जो अपनी हिन्दी की चाटुकार भाषा का--"शब्द दर शब्द और भाव दर भाव अपनी भाषा के चेहरे पे शहनाज का मेकअप किये रहता है".

एंकर इन सभी के कद या पूँँजीपति होने के स्टैंडर के हिसाब से नाम ले इन्हें उस हिन्दी के स्टेज पे बुलाता है और ये हिन्दी के मूर्धन्य  साहित्यकार स्टेज की तरफ जाते समय अपनी टाई-सुट को सेट कर फिर बोलना शुरु करते है. इनके इस कन्फ्यूज ज्ञान से उस मोटल मे यूँँ लगता है कि ,जैसे "हिन्दी साहित्य की ग्राम्य बाला के पसीने की साहित्यिक महक जैसे एसी हाल के परफ्यूम ने छिन लिया हो".

सच तो ये है कि "ये सभी राइटर हिन्दी के इमरान हाशमी है, जिनकी बेवकूफियो की मेंटल स्टेज पे इनके समझ की कन्फ्यूज हिन्दी मल्लिका शेरावत की तरह कैटवॉक कर रही है".

ये सभी तथाकथित हिन्दी के इमरान हाशमी अपनी हिन्दी की लिट्रेचर लैग्वेंज  रुपी नालेज की रेव पार्टी में शब्दो का ड्रग्स, हसीस,कोकीन ले रहे है,इन्हें हिन्दी से कोई मतलब नही,क्योंकि हिन्दी मे इनकी बेवकूफी की इस अय्याश विद्वता को चैलेंज कर पाना संभव नही.इसी से इनकी ये रेव पार्टी पुर्णतः सफल है.ये जानते है कि कल हमी मे से कोई--"हिन्दी साहित्य व भाषा का सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करेगा".
सच अब इन्ही जैसे इमरान हाशमी से हिन्दी अपने माँ बेटे का वात्सल्य नही अपितु लव,सेक्स और धोखा जी रही.ये कटु सत्य अगर कही से किसी को आहत या पीड़ित कर हो,तो वे भी ऐसी हिन्दी की रेव पार्टी से एक कश लगाये और आगे बढ़ जाये.



यह लेख मेरा स्वलिखित व अप्रकाशित है.

@@@लेखक---रंगनाथ द्विवेदी.
जज कालोनी,मियांपुर
जिला--जौनपुर 222002 (U P)
Mo.no.7800824758

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