Saturday, 4 December 2021

(तस्वीर बनती रही )
मै रोता रहा---------
मेरे आँसुओं से भी तेरी तस्वीर बनती रही.
जलती रही शमां,
लड़खड़ा-लड़खड़ा के रात भर,
मै करवटो को तड़पा-------
और तु मेरी हीर बनती रही.
तेरी यादे थी जो बहला देती थी कुछ पल,
वरना मै ऊब गया था इस शहर से,
खिड़कियां खुली रहने दी हमने,
कि शायद कही से,
लाये हवा तेरा संदेशा,
पर हाय री! बेबसी,
कुछ बनने की,
कि तुमसे दूर रहके-----
मेरी तकदीर बनती रही.
मै रोता रहा---------
मेरी आँसुओं से भी तेरी तस्वीर बनती रही.

@@@रचयिता----रंगनाथ द्विवेद्वी.
जज कालोनी, मियाँपुर
जिला--जौनपुर pin no.222002 (उत्तर-प्रदेश)
Mo.no.7800824758

यह रचना मेरी स्वरचित व अप्रकाशित है.

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