Rangnath Dubey's Poems
Wednesday, 8 December 2021
(माँ)
दिन भर भूख से बच्चा बिल-बिलाता है,
वे-कोशीश करके हार जाती है,
अँधेरी रात मे वही माँ-
एक कटोरे दूध की खातिर
ऐ रंग-
अपने सारे कपड़े खोल देती है।
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