Tuesday, 15 April 2025

(महुवा)

✍️✍️ अपने मोहब्बत के दिनों में कईयों ने अपनी बचपन की महुआ को खोया होगा

(बचपन की महुआ )

यही--
पहली बार मुझसे मिली थी,
मेंरे बचपन की "महुआ."

इसलिए ये केवल
"महुए" के फुल का मौसम ही नहीं,
बल्कि ये मेरी मोहब्बत और
चाहत का मौसम भी है.

इसलिए,
तो मैं अक्सर आता हूं गाँव 
ताकि उसकी यादें,
फिर मुझसे उसी बचपन की तरह मिलें.

और मैं,
तन्हाई में उसकी यादों से
ये पुछ सकु 
कि बताओ?
तुम फिर कब मिलोगी,
मुझसे,
इसी दरख़्त के नीचे
मेंरे बचपन की "महुआ."

रचयिता--रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियांपुर
जिला-जौनपुर 222002 (U P )
Mo. no.7800824758

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