इतनी बेहतरीन साहित्यिक पत्रिका की लेखकीय प्रति का इंतजार तो बनता ही है और खासकर तब जब उसमे आपकी अपनी कहानी भी शामिल हो.
"छात्र जीवन मे इस पत्रिका को पढ़ने की बड़ी इच्छा थी जो अब जाकर परवान चढ़ने को है"
संपादक अनुपम परिहार सर का हार्दिक धन्यवाद मेरी कहानी को इस अंक में लेने के लिए साथ पता लेने के साथ ही उन्होंने लेखकीय प्रति शीघ्र भेजने को कहा ✍️✍️✍️✍️
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