(इंतजार करके रोयी) खुद को बाँहो मे भर के रोयी, वे तवायफ थी- हर रात सजके रोयी। थिरके पाँव,टुटे घुघरू ऐ रंग- वे कितना इंतजार करके रोयी।
No comments:
Post a Comment