(मधुशाला) मेरे रूबरू खडी हुई है बच्चन सर की मधुशाला। रह-रह के अधर मेरे कांप रहे नैनो मे जले मीठी ज्वाला ऐ रंग- जीवन ब्यर्थ चला जायेगा गर जप न सका मै ये माला। मेरे रूबरू खडी हुई है बच्चन सर की मधुशाला।
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