(मासुम लड़की) तुम जीसे कहते हो गुँगी------ वे अक्सर मेरी गज़लो मे ढ़लती है, वे थिरकती है------ जब पाँवो में बाँध के घूँघरु, तो कितना बोलती है, ऐ,रंग----वे गुँगी नही------- एक मासुम लड़की है।
विश्व विकलांग दिवस पे।
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