Rangnath Dubey's Poems
Thursday, 30 September 2021
(सीता का पिंड़दान)
कितनी विविधता समेटे है-----
अपना ये हिंन्दुस्तान,,,,,,,,,,,,
कौन भूल सकता है आखिर ऐ,रंग-----
वे रेत के गोले से दशरथ व उनके पितरो को---------
अर्पित सीता का पिंडदान।
पितरो को हमारी श्रद्धा के चंद पुष्प।
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