Wednesday, 8 September 2021

(तेरे शहर में)
तेरे शहर में--------------
हमारे मोहब्बत की एक शाम वसीयत है।
ले लेना तुम हमारी गज़ल का जर्रा-जर्रा,
कोई बंदिश नही----------
यहाँ जाफ़रान की खुशबू है हर शख्स़ की खातिर,
यहाँ न कोई कौम न मज़हब और----------
ना ही सरियत है।
तुम्हारें शहर में--------------
हमारे मोहब्बत की एक शाम वसीयत है।
आहिस्ता-आहिस्ता उतरेगा जे़हन मे तेरे,
इन लफ्ज़ो का गुलाबीपन,
मै याद आऊँगा तुम्हारें शहर को,
यहाँ से जाने के बाद भी,
क्योंकि मोहब्बत ही एै "रंग"--------
इस अदब के दिवान की नियत है।
तुम्हारें शहर में------------
हमारे मोहब्बत की एक शाम वसीयत है।

@@@रचयिता------रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर (उत्तर-प्रदेश)।
mo.no.------7800824758

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