Sunday, 7 November 2021

(मै भी कुम्हार हूँ)

हां मै भी----
अपने गीतो की चाकी पे,
शब्दो की मिट्टी रख,
कुछ गीत----
उसके दिवाली के दीये की तरह बनाता हूँ.

वे भी कुम्हार है मिट्टी के दियले का,
और मै भी कुम्हार हूँ--
अपने गीतो का.

वे उपले की आँच में,
पकाता है दियलो को और मै-
अपने हृदय के उपलो की आँच में,
गीतो के शब्द पकाता हूँ. 
हां मैं भी कुम्हार हूँ. 

रंगनाथ द्विवेदी. 
जज कालोनी, मियांपुर 
जिला--जौनपुर, ( उत्तर प्रदेश)
Mo. no. 7800824758

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