(मै भी कुम्हार हूँ)
हां मै भी----
अपने गीतो की चाकी पे,
शब्दो की मिट्टी रख,
कुछ गीत----
उसके दिवाली के दीये की तरह बनाता हूँ.
वे भी कुम्हार है मिट्टी के दियले का,
और मै भी कुम्हार हूँ--
अपने गीतो का.
वे उपले की आँच में,
पकाता है दियलो को और मै-
अपने हृदय के उपलो की आँच में,
गीतो के शब्द पकाता हूँ.
हां मैं भी कुम्हार हूँ.
रंगनाथ द्विवेदी.
जज कालोनी, मियांपुर
जिला--जौनपुर, ( उत्तर प्रदेश)
Mo. no. 7800824758
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