Saturday, 13 November 2021

कविता----(बाल दिवस है )

(बाल दिवस है)
चाय की दुकान पे----------
सुट-बूट वाले साहब के,
अधरो पे सुलगते सिगरेट का कश है,
उस फैले धुँऐ में तेरह साल का बच्चा,
जूठे कप-प्लेट उठाता है,
जरा सा उसके मैले हाथो का श्पर्श
और माँ की गाली!
मासूम गालो पर------
बाल पकड़कर चंद चाटे,
देख रोटी-------
इतनी कम उम्र में इस बच्चे की भूख,
तेरी खातिर कितना विवश है!
इस मासूम को---------
अपनी पिड़ाओ की दुनिया से बाहर,
ये भी पता नही कि---------
कल तमाम देश के बच्चो के चाचा नेहरु का जन्मदिन,
यानी की बाल दिवस है।

@@@रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर।
mo.no.7800824758

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