(गंगा)
कहाँ बता पायी-
कौन हिन्दू,कौन मुसलमान गंगा।
कहीं हर-हर गंगे,
तो कही-
नमाजे वजू का पानी,
आज हमसे मैली हो रही
सुबह-शाम गंगा।
हे!गंगा पुत्र मोदी तुमपे-
कर्ज-ए-बनारस है,
चुकता करो आके,
अपनी कौल,अपनी कसम
ताकि-ऐ रंग,-
अपने ही पानी से
खुद करे स्नान गंगा।
मोदी के द्वारा खुद को गंगा पुत्र कहने पर।
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