Monday, 16 June 2025

(इज्जत कि है)

(औरत की इज्ज़त की है)
हाँ!इस ब्राह्मन ने-------------------
इस शहर की मशहूर फिरदौस से मोहब्बत की है,
कोई गुनाह नही-----------------
हमने तो बस एक औरत की इज्ज़त की है।
माँग भरा है-----------------
उसे निकाल कर इस गलिज़ गली से,
उसके नाम हमने----------
एक मकान और पुरी छत की है।
कोई गुनाह नही---------------
हमने तो बस एक औरत की इज्ज़त की है।
मै श्लोक पढ़ता हूँ----------------
वे नमाज़ पढ़ती है मेरे पूजे के कमरे में,
उसे ये इजाज़त ऐ,रंग----------------
मेरे मोहब्बत के शरियत की है,
कोई गुनाह नही--------------
हमने तो बस एक औरत की इज्ज़त की है।

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