धूल की एक मोटी परत सी जम गई है
तेरे जाने के बाद,
मैंने भी पलटे नहीं
अपनी जिस्म के पन्ने,
आओ तुम मुझे
दूर तलक ले चलो,
मेरे मनु---
और
अगले प्रलय तक
तुम मुझे
"कामायनी" की तरह पढ़ो.
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रचनाकार--रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी,मियांपुर
जिला--जौनपुर 222002 (U P)
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