व्यंग्य---(गधा )
कही सादे कागज़ पर आप बड़े मन से गधा लिख दीजिए फिर आपको घंटो व्यंग्य लिखने की जहमत नही उठानी पड़ेगी क्योंकि गधा शब्द व्यंग्य विधा के प्रयोग में आने वाली शब्दों की समस्त बिरादरी में से एक ऐसा शब्द है जिसे हम व्यंग्य के शब्दों का पारिवारिक सदस्य भी कह सकते है. वैसे भी गधे केवल जानवरो में ही नही पाए जाते बल्कि अब तो उससे भी कही ज्यादा गधे तो आजकल हमारे मनुष्य बिरादरी में पाए जा रहें.
सच तो यह है कि अगर हम चौबीस घंटे में से दो-चार बार किसी आदमी को अगर ठीक ढंग से गधा ना कह लें तो ऐसा लगता है कि सामने वाले आदमी से कही ज्यादा बड़े गधे तो हम खुद ही है. कभी-कभी तो गधा कहने कि तलब इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि किसी और के ना मिलने पर हम अपने बेटे को ही गधा कहकर काम चला लेते है. वैसे भी बेटे को गधा कहने से पूरे परिवार को गधा कहने का सुख मिल जाता है.
वैसे इस धरती पर किसी को पहली बार गधा कहने का कोई भी प्रमाणिक व ऐतिहासिक साक्ष्य नही मिलता फिर भी मुझे जहां तक लगता है कि जिस किसी भी व्यक्ति ने किसी को पहली बार गधा कहा होगा वह व्यक्ति निश्चित ही व्यंग्य का कोई बहुत बड़ा पहुंचा हुआ प्रकांड विद्वान रहा होगा.क्योंकि इस शब्द का पूरा चरित्र व्यंग्य से मिलता जुलता है.वैसे बताने वाले बताते है कि इन्हें बैसाख नंदन भी कहा जाता है, मनुष्यों में भी ज्यादातर ये बैसाख नंदन टाईप के गधे सर्वाधिक राजनीति में मिलते है.
वैसे भी नेता और किसी गधे के बोलने में काफी समानता है वे बोलते है तो पूरी घास को अकेले चर जाने की खुशी में बोलते है जबकि नेता अपने बिधानसभा से अकेले ही चुनाव जीत जाने की खुशी में बोलता है. यह दोनों भ्रम ही इन्हें एक दूसरे से ज्यादा श्रेष्ठ गधा साबित करते है वैसे दोनों के ही बोलने में हास्य अलंकार की प्रधानता है.इसलिए हम यह भी कह सकते है कि जब शायद चार-छ: गधे एक साथ देश में मरते है तो अगले जन्म में इन्ही मरे हुए गधो की सहानुभूति के तहत भगवान इन्हें नेता टाईप के श्रेष्ठ गधे के रूप में धरती पर भेज देता है.
हमारे देश में अब गधो को सम्मान देने की परम्परा शुरू कर देनी चाहिए और इस गधे कि परम्परा का प्रथम पुरस्कार या सम्मान व्यंग्य लिखने वाले किसी ऐसे व्यक्ति को दिया जाए जिसने अपनी पूरी जिंदगी में ज्यादातर व्यंग्य गधो पर ही लिखा हों, किसी और विषय पर नही. ठीक इसी तरह का कोई गधा राजनीति से या अन्य क्षेत्रों से भी लिया जाए और सारी पुरस्कृत गधो को, किसी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी की तरह सुविधाएं दी जाए.इससे सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पूरे देश में वर्षभर गधा होनें की होड़ मची रहेगी.
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