Saturday, 17 July 2021

कहानी--(गोदावरी मर गई )


कहानी--(गोदावरी मर गई )

लखनपुर गांव से थोड़ी दूर पर पड़ने वाले नदी की  पूल के पास पूरे गांव के लोग भीड़ की शक्ल में एकत्रित थे,उस भीड़ में बड़े, बुढ़े,जवान,बच्चे और गांव की महिलाऐ  भी शामिल थी.वह सब मारे कौतुहल के नदी के पूल के इर्द-गिर्द उचक के यह देख रहें थे की बढ़ी हुई नदी के पानी में जाल डालकर आखिर गांव के चार पांच आदमियों से वहां उपस्थित दो पुलिस वाले किस महिला या लड़की कि लाश निकलवा रहें थे,लेकिन जिस तरह जाल से लाश बाहर निकालने के लिए उन सभी आदमियों को मसक्क़त करनी पड़ रही थी इससे यह साफ पता चल रहा था कि यह लाश कम से कम आज की तो नही थी.

जब लाश किसी तरह से नदी के पानी से बाहर निकली तो लोगों ने देखा कि वह एक 18या 20 वर्ष की किसी जवान लड़की की लाश थी. जो कि नदी के पानी में कूदकर या डुबकर मरने की वजह से काफी फुल चुकी थी. तभी उन दोनों पुलिस वालों में से एक ने थोड़ी पुलीसिया रौब के साथ कहा कि, रमुआ! जो कि उन्हीं पांचो में से एक का नाम था वह हाथ जोड़े हुए और थर-थर कापते हुए बोला कि, जी हुजूर!जरा इस लड़की की  लाश को पीठ की बजाए मुँह की तरफ करके लिटा तो,शायद इनमें से कोई इस लड़की का चेहरा देख करके इसे पहचान लें.वैसे मुझे देखने से लग रहा है कि यह ससुरी यही कही आस-पास की है.

तभी दूसरा पुलिस वाला जो कि काफी गौर से उस लड़की की लाश को देख रहा था.वह बोला, अरे! यह तो जैसे पांच-छ: महिने के पेट से भी है.उसका साथी पुलिस वाला बोला, अरे! इस तरफ तो मेरा ध्यान भी नही गया इतना ही नही यार इसकी शादी भी नही हुई है. अरे! भाई अर्जुन क्यू इतने झटके दे रहा है भाई?  यह तुझे कैसे पता चला जरा मैं भी तो जानू मेरे जेम्सबांड, वह मजाक में बोलकर जब हंसा तो उसकी निकली हुई पेट भी उसके साथ करीब दो-तीन मिनट हिलती रही,जैसे की उसकी वह निकली हुई पेट उसके साथ ही हँसने की अभ्यस्त हों.


तो उसका साथी अपने दूसरे पुलिस वाले साथी जिसका की पेट निकला हुआ था, उसको उसने रामदरस कहकर सम्बोधित किया था,इससे यह स्पष्ट हो गया कि उस पेट निकले हुए पुलिस वाले का नाम राम दरस था. वह फिर इसके बाद आगे बोला कि यह लड़की अगर शादी शुदा होती तो इसकी उस मांग से पता चल जाता जहां कि औरते शादी होनें के बाद सिंदूर पहनती है,राम दरस खुश होकर बोला कि--जिओ मेरे शेर! तब तो उस लिहाज से तो यह ससुरी पुरी छिनाल हुई. अरे रमुआ! जल्दी  पलट यार मुझसे बर्दाश्त नही हों रहा, मैं अब इस लड़की की  सुंदर सुरत तुरंत देखना चाहता हूं. तभी रमुआ ने अपने चारो सहयोगियों कि मद्त से उसने लड़की की लाश का मुँह अपनी और वहां मौजुद भीड़ के सामने कर दिया.

और जब उस भीड़ में मौजुद सभी स्त्री पुरुषों ने उस लड़की की लाश को देखा तो सभी लोगों के  मुँह से एक साथ निकल पड़ा अरे! यह तो संतोष की बिटिया गोदावरी की लाश है. इसी के साथ वहां मौजूद सभी आदमी और औरतो ने एक दूसरे की कान के पास अपना मुँह ले जाकर आपस में फुसफुसा कर बात करना शुरू कर दिया.जब आठ-दस मिनट वह सभी आपस में केवल फुस-फुसाते रहें और कोई कुछ भी नही बोला.

तो उन्हीं दोनों पुलिस वाले में से एक ने जब बहुत जोर से माँ बहन की  गाली के साथ डाटा तो सारे लोगों के फुसफुसाने की आवाज़ जैसे किसी जादू के जोर से थम गई हो.उसने उसी भीड़ में से दो आदमी और दो औरतों को अपने पास बुलाया तो वह सब थर-थर कापते हुए अपने दोनों हाथों को जोड़कर उन दोनों पुलिस वालों से थोड़ी सी दुरी पर खड़े हों गए. इतना ही नही बल्कि पेट निकाले हुए राम दरस ने उन्हीं में से एक को अपने सामने बुलाकर उसकी गाल पर एक जोरदार तमाचा रसीद कर दिया और दुसरे को बुलाकर हाथ में पकड़ी हुई अपनी पुलीसिया लाठी से दो लाठी उसके पिछवाड़े पर रसीद कर दिया. फिर उसने पुछा, बताओ! सालो तुम दोनों का नाम क्या है?  एक बोला अलगू साहब! साले जोर से बता सुबह से कुछ खाया पिया नही है क्या?  उसने इस बार थोड़ा जोर से कहा अलगू साहब!

और तू  बता बे  तेरा नाम क्या है?  उसने अलगू की हालत पहले ही देख ली थी इसलिए उसने एक बार में ही हिम्मत कर कहा जी पांचू साहब!  फिर इससे खाली हों वह औरतों की तरफ घुमा दोनों औरतों की हालत तो पहले से ही पतली थी. उस पर राम दरस जब लाठी सहित कड़क आवाज़ में बोला,साली चुड़ैल उसने चुड़ैल कुछ इस तरह कहा की  उसके बगल वाली खड़ी औरत यह सुनकर हिलते-डुलते बस किसी तरह खड़ी थी. लग तो ऐसा रहा था कि अगर कोई उसे हल्का सा भी छू दे तो वह मारे डर के जमीन पर ऐसी गिरेगी कि, फिर वह कभी जिंदगी में दोबारा उठ नही पाएगी.


राम दरस एक बार फिर पूरी पुलीसिया रूआब के साथ बोला साली चुड़ैल अपना नाम बता तो वह लड़खड़ाती हुई जुबान में बोली साहब म म मेरा नाम
सुगनी है. हूं कहकर उसने ढ़ेर सारी सांस अपनी नाक से छोड़ी फिर दुसरी औरत से बोला और तू बता तेरा क्या नाम है? स स साहब मेरा नाम बुधमतिया है.अच्छा. फिर इतना कहने के बाद उसने अर्जुन से कहा लाश इनसे बंधवाकर इन तीनो को इस लड़की गोदावरी की हत्या के जुर्म में गिरफ्तार कर लो जब इन सबको जेल और फाँसी होंगी तब पता चलेगा कि किसी की हत्या क्या होती है?

फिर वह चारो,दोनों पुलिस वालों यानी कि अर्जुन और राम दरस के पैरो पर गिरकर जोर-जोर से रोने लगे. साहब! हमने कोई हत्या नही की. साहब! चाहे तो आप हमार पति और बच्चों का कसम खिला लो साहब. हालांकि यह बात राम दरस और अर्जुन को भी अच्छे से पता थी कि इन चारो ने गोदावरी की हत्या नही की थी.यह तो उन दोनों ने एक पुलीसिया तरीका अपनाया था,ताकि गोदावरी की मौत का कारण पता चल सके.


उनका यह निशाना काफी सटीक बैठा था इसीलिए राम दरस के गुस्से को थोड़ा ठंडा करने की गरज से अर्जुन बोला हालांकि यह भी उनका एक नाटक ही था. कि यार! आखिर  इनकी बात एक बार सुन लेने में बुराई ही क्या है? राम दरस कहता है कि चल ठीक है. अगर तू  कहता है तो मैं तेरी बात मान लेता हूं, लेकिन याद रखना अगर इन लोगों ने झूठ बोला तो थाने में लें जाकर इनकी ऐसी धुलाई करूंगा कि इन ससुरो को अपनी अम्मा याद आ जाएगी.राम दरस ने एक बार अपनी थोड़ी बड़ी और लाल आँखों से उन्हें देखा फिर एक सिगरेट जलाकर कुछ इस तरह वह धुँआ फेकने लगा कि वह और भी डर गए.


अर्जुन जानता था कि राम दरस की  ऐसी आँखें ऐसे मौको पे बड़ा काम करती थी.वह एक बार फिर उन चारो से मुख़ातिब हुआ और बोला मैं तुम लोगों को अपनी जान बचाने का एक आखिरी मौका देता हूं. अगर तुम सबने सब कुछ सच सच मुझे बता दिया तो मैं दावा करता हूं कि मैं तुम्हें कोई भी सजा नही होनें दूंगा. अगर जरा सा भी झूठ बोले तो समझ लो तुम्हारी सजा और फाँसी दोनों ही कंफर्म है. वे सभी एक सुर से बोले नही साहब! हम सभी सच-सच बोलेंगे.


दरअसल संतोष की बिटिया गोदावरी हम सभी गांव वालो कि बहुत प्यारी और दुलारी बिटिया थी. अगर हम सभी दिन में उसे एकाध बार देख नही लेते थे, तो उस दिन हमारा मन बहुत खाली सा लगता, जबकि उसका बाप संतोष नीरा पियकक्ड़ और शराबी था. जिसकी वजह से गोदावरी की माँ बीमार और दुःखी रहा करती थी. कभी-कभी तो उसके बाप के साथ के पियक्कड़ उसके बापू को ज्यादा शराब का नशा हो जाने पर वह उसके घर भी छोड़ने रात-बिरात आ जाया करते थे.

ऐसा नही कि वह सारे पियक्कड़ गोदावरी के बापू को किसी त्याग या सेवा भाव कि वजह से घर छोड़ने आते थे साहब.दरअसल गोदावरी 18 वर्ष की बहुत ही सुंदर लड़की थी,जिसको वे सारे पियककड़ अंधेरी रात में उसके बापू को छोड़ने के बहाने कभी-कभी अपनी कामुक नजरों से उसके शरीर के उस अंग विशेष को देखते जिसे की वह बेचारी अपने फटे दुपट्टे से ढ़के रहती थी. उसके बापू को संभालने के बहाने जान बूझकर वह लोग उसके उस अंग को या तो छू लेते थे या जोर से जानबूझकर चिकोट लेते थे.जिसकी वजह से किसी-किसी दिन वह चीख उठती थी.

ऐसे ही एक दिन जब किसी ने उसके युवा स्तन को चीकोटा तो वह चीख उठी. माँ गोदावरी ने झट पास आकर उससे पुछा क्या हुआ बेटी! जब कहा तो गोदावरी माँ के सीने से लगकर रोने लगी. उसका इस तरह से रोने का कारण गोदावरी की माँ अच्छे से समझ गई. आखिर थी तो वह भी एक औरत ही.उस दिन गोदावरी की माँ ने गोदावरी के बापू से खुब झगड़ा किया, लेकिन गोदावरी के शराबी बाप ने उसकी माँ को पांच छ: तमाचे मारे गाली दी इतना ही नही उसने नशे में गोदावरी से कहा हरामजादी तू  खुद छिनाल है और दूसरो पर इल्जाम लगाती है.


उस दिन गोदावरी पूरी रात रोती रही साहब! फिर आठ-दस दिन तक सब सामान्य रहा हालांकि इस बीच तब भी गोदावरी का बापू शराब पिता रहा.लेकिन एक दिन रात को जब पूरा गांव सोया हुआ था साहब तो दुसरे गांव के मुखिया का दबंग बेटा बब्बन उसके बापू को अपने दो अन्य साथियो के साथ घर छोड़ने आए थे उस दिन तो गोदावरी का बापू अन्य दिनों की अपेक्षा बहुत ही ज्यादा पीए हुए था.सच तो यह है साहब की उस रात शाम से ही मूसलाधार बरसात हों रही थी, जिसकी वजह से उस रात गांव वाले अन्य रात की अपेक्षा जल्दी  सो गए थे.


इसलिए उस रात जानबूझकर उन लोगों ने गोदावरी के बापू संतोष को बहुत ज्यादा शराब पीला दी थी, फिर उसे घर पहुंचाया. घर क्या पहुंचाया साहब! जब उसे कुछ होश ही नही था तो उसके लिए क्या घर, क्या बाहर. उसे लाकर उन लोगों ने एक तरफ टूटी चारपाई पर लेटा दिया. तभी उस कमरें में उन सभी ने गोदावरी को देखा तो उनकी कामुकता चरम पर पहुंच गई. क्योंकि बब्बन बहुत पहले से इसी मौके की ताक में था. उसके एक साथी ने कमरें को अंदर से बंद कर दिया इतना ही नही उन्होंने गोदावरी की माँ के भी कमरें की कुण्डी लगा दी.

फिर बब्बन ने जबरदस्ती उस रात अपने दोनों साथियो के साथ गोदावरी को दो-दो, तीन-तीन बार बुरी तरीके से बलात्कार किया.गोदावरी की माँ अंदर से दरवाजा पीटती रही, रोती रही,गाली देती रही. और इधर गोदावरी चीख चिल्ला, गिड़गिड़ा रही थी.उसके होंठ से खून निकल रहा था, पूरे शरीर को तीनो लोग जानवरो से भी ज्यादा बेरहमी से नोच-खसोट रहें थे और गोदावरी का बापू संतोष इससे बेखबर टूटी चारपाई पर पूरे खर्राटे के साथ सोता रहा.फिर गोदावरी बहुत जोर से किसी हलाल होते बकरे की तरह चिखी और बेहोश हों गई.

दूसरे दिन जब सुबह हुई तो कराहते हुए गोदावरी ने जब अपनी आँखें खोली तो एक बार फिर उसकी आँखों के सामने रात का सारा मंजर ताज़ा हों गया और फिर इसके बाद जब गोदावरी ने उठने का प्रयास किया तो उसका पूरा शरीर किसी पके हुए फोड़े कि तरह दर्द कर उठा अर्थात उससे अपनी जगह से उठा नही गया.तभी उसकी नज़र अपने टांगो से नीचे उतरी  हुए सलवार की तरफ गई तो वह बिल्कुल नंगी थी उसके आस-पास खून बहकर सुख चुका था.


जब गोदावरी ने अपने बापू के पास खड़ी अपनी माँ के सुख चुके आंसू भरी आँखों की तरफ देखा तो वह माँ से बोली.माँ! आज तो बापू को दिन में भी खुब शराब पीनी चाहिए है कि नही, माँ! आखिर आज तो पीने में इन्हें और भी मजा आना चाहिए क्योंकि इनके बिटिया का शराब पीकर कुछ इनके साथियो ने बलात्कार किया है. तुमको भी थोड़ा-बहुत बलात्कार करने का मन है क्या बापू? करना देखो ना आखिर आपको बहुत मेहनत भी नही करनी पड़ेगी क्योंकि आपके पीने वाले साथियो ने मेरी सलवार पहले से ही उतार रखी है. फिर माँ जोर-जोर रोते हुए गोदावरी के पास बैठ गई और बोली बस कर बेटी.

फिर इसके बाद साहब गोदावरी का बापू घर से निकला और आज तलक नही लौटा. फिर पंद्रह बीस दिन तक गोदावरी अपने घर से नही निकली साहब. वह घर में ही अपना इलाज करती रही. उसकी माँ उसे गरम हल्दी और दूध का काढ़ा देती रही.जब उसने गांव में निकलना भी शुरू किया साहब, तो वह पहले वाली गोदावरी की तरह ना थी. बिल्कुल बदल चुकी थी.अब वह किसी से गांव में उतना बात भी नही करती थी.इसी तरह चार महीने बाद एक दिन उसे उल्टी हुई और वह गांव के सामने वाले नल के पास गिर पड़ी.

गांव की औरतों ने उसके चेहरे पर पानी के छींटे भी मारे जब उसे होश आ गया तो गांव की बड़ी-बूढ़ी औरतों ने कानाफूसी करते हुए कहा कि पता नही की  इसके पेट में किसका पाप है. देख तो छिनाल को जैसे कोई शरम ही नही आ रही.वह इतना सुनते ही रोते हुए वहां से चली गई. फिर उसके तीन-चार दिन बाद उसकी लाश नदी में मिल रही है साहब. इतना कहते ही वह औरत जोर-जोर से रोते हुए बोली,साहब! इसके मारने वाले को छोड़ना मत साहब.अब वह औरत बिल्कुल ही नही डर रही थी.

अब राम दरस और अर्जुन दोनों ने पूछा तुम्हें यह सब आखिर कैसे पता. दरअसल साहब! मुझे गोदावरी भाभी की तरह नही बल्कि अपने बड़ी बहन की  तरह चाहती थी.इसलिए साहब मुझे गांव की औरतों की बातो का जरा सा भी विश्वास नही हुआ और मैं चोरी से उस दिन गोदावरी के घर गई तो उसने मुझसे रोते हुए सारी बात बता दी. उसके बाद से ही गोदावरी से फिर मैं मिल नही पाई और मुझे गोदावरी मिली भी तो ऐसे हाल में कि मैं उससे कुछ बात भी नही कर सकती.


फिर इसके बाद राम दरस और अर्जुन ने कहा ठीक है अब तुम सभी मेरी नज़र में बेगुनाह हों दरअसल हम भी क्या करे हमारे पास भी कोई जादू की छड़ी नही होती की हाथ बढ़ाकर मुजरिम या कि उसके गुनहगार को पकड़ लें. इसलिए ऐसा करना हमारी मजबूरी है, लेकिन हां!  उन हत्यारो के साथ आप सभी भी दोषी है. जब ऐसी लड़कियो के  मद्त की  जरुरत समाज़ में सबसे ज्यादा होती है. तभी यह समाज़ बिना कुछ सोचे समझे सारा दोष लड़कियो पर ही मढ़ देता है जबकि आप सभी गांव वाले जानते थे कि गोदावरी ऐसी नही फिर आप सभी ने उसे गाली दी.


जिसकी वजह से उसे इस नदी में कूदकर अपनी जान देनी पड़ी. यही आप सभी अगर सामूहिक रूप से इसे यानी की  अपने गांव की गोदावरी के लिए उस मुखिया के बेटे और उसके साथियो को सजा दिलाते तो हर गांव की गोदावरी मजबूत होती. राम दरस की  इतनी बात सुनकर यूँ  लगा कि जैसे उन सबकी अपनी बेटी गोदावरी आज नदी में कुदकर मर गई हों.




यह कहानी मेरी स्वलिखित व अप्रकाशित है.


लेखक--रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी, मियांपुर
जिला-जौनपुर 222002 (U P)
mo. no.7800824758











No comments:

Post a Comment