Sunday, 1 August 2021

कविता---(पायल )

(पायल------एक दर्द)
अपने माँ-बाप के दुलार से बनाई गई पायल,
सुना है कि-----------
ससुराल मे जलाई गई पायल।
माँ दहाड़े मारे रो रही और बाप गुँगा हो गया,
न जाने कैसे उन पापियो का कलेजा नही कांपा,
एक माँ को आखिरी बार----------
उसके मरती हुई बिटिया की ना सुनाई गई पायल।
सोचा था भेजेगी इसके बापु को लाने,
लेकिन हाय रे! निष्ठुर समय---------
कि एक माँ तड़प रही मछली की तरह,
उसके आँख के पानी के एक-एक बुँद की तरह-----
तोड़े गये घुँघरू और पुरे कमरे मे घुँघरू दर घुँघरू,
बहुत तड़पाई गई पायल।
जिससे ब्याहा था खुशी-खुशी वे भी था शामिल,
उन कातिलो में,
हे! भगवान तु भी चुप था बिटिया तड़प रही थी,
उसकी तड़प मे चीख़ रही थी-----------
पती के हाथो पहनाई गई पायल।
सास का कलेजा क्यू  कांपा नही,
क्यू पथरा गई, क्यू डायन हो गई,
आखिर इसकी बिटिया का कसूर क्या था?
जबकि हर काम की खातिर एक पैर पे------
पुरे घर मे दौड़ाई गई पायल।
एक माँ-बाप का श्राप है,
कि उतना तुम सब भी रोओगे-तड़पोगे,
जितना तुम्हारे घर में------
हमारी रुलाई गई पायल।
माँ-बाप के  दुलार से बनाई गई पायल,
सुना कि----------
ससुराल में जलाई गई पायल।

@@@रचयिता----रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर
जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)।
mo.no.-----7800824758

शायद हम आप प्रयास करे तो कुछ पायल घर के मंदिर मे किसी सुमधुर संगीत की तरह बजती और खिलखिलाती रहे।

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