Rangnath Dubey's Poems
Sunday, 27 March 2022
(चुल्हा नही जलता)
तुम तो बात-बात मे शहर जलाना जानते हो,
तुम्हारे पास तो कौमो को जलाने का ईधन है!
पर यहाँ फाँकाकशी सोने नही देती,
पेट तो जलता है ऐ,रंग---------
पर इस बस्ती मे अक्सर चुल्हा नही जलता।
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