Rangnath Dubey's Poems
Thursday, 24 March 2022
(रोटियो की मज़ार पे लिखता हूँ)
ऐ शरिफे शहर----
मै उसकी गदराई जवानी और,,,,
काली सलवार पे लिखता हूँ।
मै अपने दौर का मंटो हूँ,भूखा हूँ,,,,
ऐ,रंग----
इसलिये मै अक्सर विरान तवे---
और रोटियो की मज़ार पे लिखता हूँ।
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