Rangnath Dubey's Poems
Thursday, 17 March 2022
(मज़हब हो के रह गई)
हर रात लहु -लुहान सेज़ पे सोती है,,,
इसका शौहर----
इसकी ख्व़ाहिशो का कत्ल़ करता है.
ये मोहब्ब़त तलाशती है कतरा-कतरा,,,
वे मोहब्ब़त के लम्हो मे तकरिर करता है.
ऐ,रंग--वे यहाँ आई थी औरत होने-----
मज़हब होके रह गई.
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment