Rangnath Dubey's Poems
Friday, 28 March 2025
(चूल्हा नहीं जलता)
(चुल्हा नही जलता)
तुम तो
बात-बात मे शहर जलाना जानते हो,
तुम्हारे पास तो
कौमो को जलाने का ईधन है!
पर यहाँ फाँकाकशी सोने नही देती,
पेट तो जलता है
ऐ रंग---------
पर इस बस्ती मे अक्सर
चुल्हा नही जलता.
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