Wednesday, 19 March 2025

(तिलिस्म ए होशरुबा)

(तिलिस्म़-ऐ-होशरुबा)
कई रात जगा हूँ,नींद टुटी है,,,,
हर बार------
बार-बार तेरा चेहरा नुमाया हुआ है।
ऐ,रंग--कह दो-----
अब उतर आये मेरी कागज़ पे,,,,
मेरे ख्वाहिशो की-----
तिलिस्म़-ऐ-होशरुब़ा।

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