एक डॉक्टर
जो इलाज करती
वे खुद नृशंस रेप से मर गई !
कुछ
पशुओं ने उसके स्त्री अंगों को
नोचा, रौंदा,मसला
वे तड़पी छटपटाई
और पिशाच जांघो तले दब गई !
उसकी उस
योनि से खून बहे
जिस योनि की प्रसव पीड़ा
इस पशु के मां को भी हुई होगी.
शायद !
यह अघोषित
उसकी खुद की मां की
योनि से भी एक रेप है.
वहा एक स्तन शुदा स्त्री
नही! नही! स्त्री नही !
बल्कि मुख्यमंत्री
क्योंकि वह स्त्री होती
तो उसके
खुद के गुप्तांग और स्तन
डॉक्टर बिटिया की
रेप की पीड़ा से दुखते,दर्द करते
आंखे भर आती,
यह डॉक्टर भी
कोलकाता की निर्भया है .
मोमबत्तियां जलाओ, प्रोस्टेट करो,
इससे तुम्हारे
माटी मानुष और सोनार बांग्ला
का मुर्दापन बच जाएगा.
आखिर
इस घटना पर सदन को भी तो
थोड़ा बहुत
घड़ियाली आंसू बहाना है,
कुछ वोट टटोलना है ,
इसके रेप की घावों से,
हिंदू मुसलमान,जाति
नही! नही!
उफ! हे भगवान
आखिर इस डॉक्टर बिटिया का स्तन
मरने के बाद भी
इस तरह सदन की सीढ़ियों पर
उछल क्यूं रहा हैं ?
शायद उसे अभी भी
किसी की आंख में
कुछ पानी दिख जाने की उम्मीद है
मरने के बाद भी,
यह डॉक्टर बिटिया कितनी पागल है
जो नही जानती
कि राजधानी हो या फिर कोलकाता
इसके रेप के घाव
कभी भरेंगे नही ,
क्योंकि उन रेप के घावों वाले अंगो को
बार–बार दिखाकर
एक स्त्री
वोट लेगी.
कोलकाता की डॉक्टर बिटिया
तुम्हारा रेप
वहा कि मुख्यमंत्री के ,
खुद का किया रेप है
वे स्त्री नही
बल्कि वह वहा के
सड़क फिल्म की महारानी हैं.
यह रचना मेरी स्वरचित और अप्रकाशित है बिना अनुमति के मेरी इस रचना को शेयर ना करे.
रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी,मियांपुर
जिला--जौनपुर 222002 (U P)
rangnathdubey90@gmail.com
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