बहुत तरस आता है राहुल के हाल पे,
अधकचरी जानकारी ले,
बेचारे पीट रहे मोहर्रम सी छाती सुना है "रफाल" पे----
बहुत तरस आता है राहुल के हाल पे।
बकरे तक का पता नही इनको,
डींगें हाक रहे शेर की खाल पे-----
बहुत तरस आता है राहुल के हाल पे।
इनकी बेजा छिछोरी हरकते,
यू लग रहा जैसे आधुनिक कालीदास,
ले टंगारी बैठा है अपने खानदानी डाल पे------
बहुत तरस आता है राहुल के हाल पे।
पुत्र मोह मे अंधराई सोनिया गांधारी सी,
कुछ ना कर पा रही दुर्योधन से राहुल के लिये,
हाय! दिल दुख रहा उनका,
अपने राहुल से लाल पे--------
बहुत तरस आता है राहुल के हाल पे।
पार्टी मे ही सुलगन और अंदर धुँआ है,
क्या करे ?
इनकी मजबूरी है नाचना,
इस पागल मदारी के बीन सुर-लय-ताल पे-----
बहुत तरस आता है राहुल के हाल पे।
हे! भगवान लुटिया डुब रही,
राहुल रोज पीट रहे,
शाह और मोदी के शतरंजी चाल पे-----
बहुत तरस आत है राहुल के हाल पे।
@@@रचयिता---रंगनाथ द्विवेदी।
जज कालोनी,मियाँपुर।
जिला--जौनपुर (उत्तर-प्रदेश)।
Mo.no---7800824 758
इस लेख व रचना को दिल से ना ले इसे शुद्ध रुप से व्यंग्य की तरह पढ़े, इसपे राजी होना ना होना आप पे है----धन्यवाद।
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