Wednesday, 8 October 2025

चांद की पीड़ा

(चाँद की पीड़ा)
हर्ष नही,
ये है,बिषाद की पीड़ा।
रोते चकोर को है,
अपने चाँद की पीड़ा।
ऐ रंग,-
नीगल लेगा राहू सुना है,
आज इतनी असह्य होती है,
चाँद की पीड़ा।

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