Rangnath Dubey's Poems
Monday, 13 October 2025
आदमी हूं
(आदमी हूँ)
तेरे रूप के लावण्य से,
देवता दहके थे,
मै तो आदमी हूँ.
है इसमे पाप-पुण्य कुछ नही,
ये सुरा आचमन है,
इसमे देवता बहके थे,
मै तो आदमी हूँ.
रंगनाथ द्विवेदी.
जौनपुर, उत्तर-प्रदेश
Mo.no.--7800824758
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