पुरानी पेंशन बहाल कर दो,
नही तो फिर तुम्हें,
यह सत्ता नही मिलेगी.
तुम्हारे दंभ का ये अड़ियलपन
हमारे वोटो से है
कही हम,बदल गए
अपनी भीड़
और हुजूम के साथ
फिर कुर्सी तो होगी
लेकिन तुम्हारी उस कुर्सी को
कोई महत्ता नही मिलेगी.
पुरानी पेंशन बहाल कर दो
नही तो फिर तुम्हें,
यह सत्ता नही मिलेगी.
ये आंदोलन है
जे.पी. और लोहिया का
इसे पहचानो
हमारे चालीस वर्षो की
निष्ठा को
चौथे स्तंभ से
दबाने और कुचलने वालो.
यह बिगुल है इंकलाब का
इसे हवा ना दो
नही तो तुम्हारे अन्याय का सूरज
डूब जाएगा
तुम पछताओगे,
दिल्ली की तरफ मुंह करके
जब तुम्हारी
महज एक गलती से
तुम्हे यह तुम्हारी,सत्ता नही मिलेगी.
पुरानी पेंशन बहाल कर दो
नही तो फिर तुम्हें
यह सत्ता नही मिलेगी.
यह रचना मेरी स्वरचित और अप्रकाशित है.
रंगनाथ द्विवेदी
जज कॉलोनी,मियांपुर
जौनपुर (U P)
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